संसद में फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर का पहला सवाल: ‘ज्ञान भारतम्’ पहल से संरक्षित होगी भारत की प्राचीन ज्ञान-विरासत, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

 

 

*संसद में फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर का पहला सवाल: ‘ज्ञान भारतम्’ पहल से संरक्षित होगी भारत की प्राचीन ज्ञान-विरासत*

 

संसद के मानसून सत्र के प्रथम दिन फतेहपुर सीकरी सांसद एवं भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने संस्कृति मंत्रालय से भारत की प्राचीन पांडुलिपियों एवं ज्ञान-विरासत के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। सांसद चाहर ने ‘ज्ञान भारतम्’ पहल के उद्देश्यों, जनजातीय ज्ञान-परंपराओं के संरक्षण, डिजिटलीकरण की प्रगति, भारतीय सभ्यता से इसके संबंध तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को लेकर सरकार की रूपरेखा के बारे में जानकारी मांगी।

सांसद राजकुमार चाहर के प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम्’ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसकी घोषणा 1 फरवरी 2025 को केंद्रीय बजट में की गई थी। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य भारत की समृद्ध पांडुलिपि धरोहर का सर्वेक्षण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार करना है। इसके लिए वर्ष 2025-2031 की अवधि हेतु ₹491.66 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्री ने बताया कि इस पहल के तहत देशभर की पांडुलिपियों का सर्वेक्षण एवं पंजीकरण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा जनसुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही भारतीय भाषाओं, पांडुलिपि विज्ञान एवं शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (NDR) का भी निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ‘ज्ञान भारतम्’ पहल के प्रमुख घटकों में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण एवं पंजीकरण, तकनीकी अवसंरचना एवं साझेदारी निर्माण, प्रलेखन, संरक्षण, डिजिटलीकरण, प्रकाशन तथा क्षमता निर्माण एवं शोध शामिल हैं।

मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक देशभर में 8 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इनमें से 3,53,947 पांडुलिपियां ज्ञान भारतम् पोर्टल पर आम जनता के लिए उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भारत की ज्ञान-संपदा तक आसान पहुंच मिल सके।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग के संबंध में मंत्री ने बताया कि सरकार OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन), HTR (हस्तलिखित पाठ पहचान), AI आधारित भाषा एवं लिपि मॉडल, अनुवाद, लिप्यंतरण तथा उन्नत खोज सुविधाओं के विकास पर कार्य कर रही है। इन तकनीकों के माध्यम से भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर शोध एवं अध्ययन के लिए अधिक सुलभ भी बनाया जाएगा।

सांसद राजकुमार चाहर द्वारा संसद में उठाया गया यह प्रश्न भारत की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर के संरक्षण के प्रति उनकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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