मीना माता मंदिर पर आज राम कथा केतीसरे दिन शिव पार्वती के ‌ मंगल विवाह का वर्णन

रिपोर्ट: सत्यदेव पांडे ( ब्यूरो चीफ- सोनभद्र)

चोपन। मीना माता मंदिर परिसर में आयोजित सप्तदिवसीय श्री राम कथा में कथा व्यास दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान शिव और पार्वती के मंगल विवाह की कथा का सजीव चित्रण किया। कथा सुन भक्तजन भी शिव-पार्वती के विवाह के साक्षी बने और भजनों में झूमते हुए विवाह कथा का आनंद लिया।कथा व्यास श्री भारद्वाज ने शिव-पार्वती के विवाह की कथा का विस्तार करते हुए कहा कि पार्वती ने भगवान शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। पार्वती ने अपने गुरु महर्षि नारद के कहने पर तप किया। इससे भोलेनाथ प्रसन्न होकर पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया और शिव विवाह हुआ। भगवान शिव की अद्भुत बारात और इस अनोखे विवाह को बड़ी सरसता से बताया। जिसे सुन श्रोता भी भावविभोर हो गए। उन्होंने भगवान के पहले विवाह की कथा भी सुनाई। भगवान शिव अगस्त्य ऋषि के आश्रम से कथा का श्रवण कर लौटे तो उन्हें भगवान राम के दर्शन हुए। इसे देख वे दूर से प्रणाम किया और सती को भी प्रणाम करने को कहा। सती ने तर्क करते हुए परीक्षा लेने की बात कही। शिवजी के मना करने के बाद भी नहीं मानी और सीता का रूप धारण करपरीक्षा के लिए चली गई। भगवान शिव ने सीता का रूप धारण करने की वजह से उनका मन ही मन त्याग कर दिया था, लेकिन सती को कड़े वचनों में त्याग की बात कभी नहीं कही। उन्होंने कहा कि सभी को भगवान शिव से अच्छा पति बनने की सीख लेनी चाहिए। कठोर तप से जगने के बाद सती के पिता के घर होने वाले यज्ञ की बात पता चली। इसमें सती ने जिद की और यज्ञ में गई। वहां अपना और शिवजी का अपमान देखकर यज्ञ को भंग किया और अग्नि में प्रवेश किया। सती दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में अवतरित हुई और शिवजी का वरण किया। भगवान के विवाह की कथा सुन भक्तजन भी भावविभोर होते रहे। कथाव्यास ने भी बड़ी सरसता से कथा का विस्तार किया। इस अवसर चोपन के ही नहीं पूरे सोनभद्र के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे ।

Shakeer Akhtar
Author: Shakeer Akhtar

Leave a Comment