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हेरिटेज अस्पताल में श्रीमती प्रभावती देवी की मृत्यु का मामला: मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज, प्रकरण डायरी में दर्ज; अस्पताल को साक्ष्य सुरक्षित रखने का कानूनी नोटिस युसूफ खान वाराणसी

हेरिटेज अस्पताल में श्रीमती प्रभावती देवी की मृत्यु का मामला: मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज, प्रकरण डायरी में दर्ज; अस्पताल को साक्ष्य सुरक्षित रखने का कानूनी नोटिस

 

युसूफ खान वाराणसी

 

 

 

वाराणसी। हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज/हेरिटेज मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, भदवर, वाराणसी में श्रीमती प्रभावती देवी की उपचार के दौरान हुई मृत्यु के मामले में अब मानवाधिकार स्तर पर भी कार्रवाई प्रारंभ हो गई है। मृतका के पुत्र संपूर्णानंद की ओर से प्रस्तुत शिकायत को उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा डायरी संख्या 15610/CR/2026 के अंतर्गत दर्ज किए जाने की सूचना प्राप्त हुई है। उपलब्ध सूचना के अनुसार शिकायत को आयोग की प्रक्रिया में दर्ज कर आगे की कार्रवाई के लिए लिया गया है।

 

मामले में संपूर्णानंद के अधिकृत विधिक प्रतिनिधि अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, दी बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी वाराणसी, प्रमुख सचिव गृह एवं कारागार विभाग, पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी तथा मानवाधिकार आयोगों के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई है।

 

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 09 अगस्त 2026 को श्रीमती प्रभाती देवी को उपचार के लिए हेरिटेज अस्पताल लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी स्थिति गंभीर हुई और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। शिकायतकर्ता ने उपचार में कथित लापरवाही, आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता, टेम्परेरी पेसमेकर लगाए जाने की प्रक्रिया, चिकित्सकीय निगरानी तथा मृत्यु के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि घटना से संबंधित किसी भी दस्तावेज अथवा साक्ष्य से छेड़छाड़, संशोधन, विलोपन या उसे नष्ट न किया जाए। विशेष रूप से CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, केस शीट, डॉक्टर एवं नर्सिंग नोट्स, दवा एवं उपचार रिकॉर्ड, ECG/मॉनिटर रिकॉर्ड, टेम्परेरी पेसमेकर से संबंधित दस्तावेज, ड्यूटी रोस्टर, डॉक्टरों की उपस्थिति, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड, सर्वर लॉग, कॉल लॉग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने को कहा गया है।

 

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि परिवार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच के माध्यम से वास्तविक तथ्यों को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अभिलेख सुरक्षित रहना आवश्यक है, क्योंकि प्रकरण में आगे आवश्यक विधिक एवं न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

 

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या गंभीर कर्तव्य-चूक प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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