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एटा में खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल! ठेले-खोमचे वालों पर कार्रवाई न होने से जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़, रिपोर्ट वैभव पचौरी

 

एटा में खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल!

ठेले-खोमचे वालों पर कार्रवाई न होने से जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़

एटा। जनपद एटा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सड़क किनारे संचालित हो रहे ठेले-खोमचे और अस्थायी खाद्य विक्रेताओं की अनियंत्रित गतिविधियों ने जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया है। खुले में धूल-मिट्टी और गंदगी के बीच बिना किसी स्वच्छता मानक के खाद्य पदार्थों की बिक्री लगातार जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई दे रहा है।

 

शहर के हर प्रमुख इलाके में फैला अव्यवस्था का जाल

मुख्य बाजारों, बस स्टैंड, स्कूल-कॉलेजों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ठेले-खोमचे संचालित हो रहे हैं। यहां खाद्य सामग्री न तो ढंकी होती है और न ही स्वच्छ पानी का उपयोग सुनिश्चित किया जाता है। कई जगहों पर बासी और खराब खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

 

बीमारियों का बढ़ता खतरा, गर्मी में हालात और गंभीर

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अस्वच्छ खाद्य पदार्थों के सेवन से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, क्योंकि उच्च तापमान में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं।

 

जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 

खाद्य सुरक्षा विभाग, नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निरीक्षण और कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। कई लोगों का यह भी कहना है कि कुछ विक्रेताओं को कथित संरक्षण मिलने के कारण उनके खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाते।

 

बच्चों और युवाओं की सेहत सबसे ज्यादा प्रभावित

 

चिंता की बात यह है कि इन ठेलों पर सबसे अधिक स्कूली बच्चे और युवा निर्भर रहते हैं। सस्ती कीमत और आसानी से उपलब्धता के कारण वे इन खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन करते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

 

प्रशासन के दावे बनाम जमीनी हकीकत

 

एक ओर प्रशासन खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता और सख्ती के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हालात बदहाल बने हुए हैं। न नियमित सैंपलिंग की ठोस व्यवस्था दिखती है और न ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई के उदाहरण सामने आते हैं।

 

उठी कड़ी कार्रवाई की मांग

 

जनपद के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल व्यापक अभियान चलाकर सभी खाद्य विक्रेताओं का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना व लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई की जाए।

 

बड़ा सवाल

लगातार शिकायतों और बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद यदि स्थिति यथावत बनी रहती है, तो क्या यह प्रशासनिक उदासीनता नहीं?

 

👉 अब नजर इस बात पर—क्या एटा प्रशासन जागेगा या यूं ही जनता की सेहत से खिलवाड़ जारी रहेगा?

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