देश के चौथे स्तंभ पर हमले लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता — मोहम्मद वसीम, पूर्व मीडिया प्रभारी

देश के चौथे स्तंभ पर हमले लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती

 

पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

 

— मोहम्मद वसीम, पूर्व मीडिया प्रभारी

 

लोकतंत्र की मजबूती उसके चार प्रमुख स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया—पर आधारित होती है। इनमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” कहा जाता है, क्योंकि यह समाज और शासन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करता है। पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर सच्चाई को जनता तक पहुंचाते हैं, भ्रष्टाचार, अपराध, अन्याय और जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करते हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज देश में पत्रकारों पर आए दिन हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

 

जब कोई पत्रकार निष्पक्ष और निर्भीक होकर सच्ची खबर प्रकाशित या प्रसारित करता है और उसके बदले उसे धमकियां मिलती हैं, उस पर हमला किया जाता है या उसे झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जाती है, तो यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं होता, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधा प्रहार होता है। यदि सच्चाई लिखने और दिखाने की कीमत पत्रकारों को अपनी सुरक्षा और सम्मान से चुकानी पड़े, तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

 

पूर्व मीडिया प्रभारी मोहम्मद वसीम ने पत्रकारों पर हो रहे लगातार हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होते हैं और उनका कार्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना भी है। यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आम जनता की आवाज कौन बनेगा?

 

उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमला करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून हाथ में लेने का साहस न कर सके। पत्रकारों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक दायित्व भी है। समाज को समझना होगा कि स्वतंत्र मीडिया ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

 

मोहम्मद वसीम ने यह भी कहा कि सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। देश का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है और पत्रकार उसी संवैधानिक अधिकार का उपयोग करते हुए जनता के हित में कार्य करते हैं। इसलिए उनके अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा करना आवश्यक है।

 

आज आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र और राज्य सरकारें पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू करें। पत्रकारों पर होने वाले हमलों की निष्पक्ष और त्वरित जांच हो तथा दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा मिले। इससे न केवल पत्रकारों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि लोकतंत्र भी अधिक मजबूत होगा।

 

अंततः यह कहना उचित होगा कि यदि लोकतंत्र को जीवंत और सशक्त बनाए रखना है, तो मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। सच्चाई की आवाज को डराया या दबाया नहीं जा सकता। पत्रकार समाज की आंख और कान हैं, और उनकी सुरक्षा लोकतंत्र की सुरक्षा है।

 

पत्रकारों पर हो रहे हमलों की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। यह समय है कि पूरा समाज, सरकार, प्रशासन और सभी लोकतांत्रिक संस्थाएं एकजुट होकर पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि निर्भीक पत्रकारिता का वातावरण बना रहे और देश में लोकतंत्र की जड़ें और अधिक मजबूत हों।

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