तुम जब याद आए… बहुत याद आए
दिव्य आत्मा श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कांत जी को भावभीनी श्रद्धांजलि
-मदन गोपाल शर्मा
मेरे साहित्यिक क्षेत्र के अति घनिष्ठ मित्र पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) निवासी श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कान्त जी से कई महीनों से बात नहीं हो पा रही थी। अक्सर उनका मोबाइल बन्द रहता था। कभी-कभी घंटी बजने के बाद भी बात न होने से मन बहुत बेचैन था। मन में यह विचार भी आए कि कहीं कोई अनहोनी तो नहीं हो गई। तब मैंने कुंवर कान्त जी द्वारा लिखी और सम्पादित की गईं पुस्तकों से दूसरे सूत्रों की तलाश की, वर्ष 2010 में श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कान्त जी द्वारा सम्पादित एक पुस्तक हृदय वीणा के संकलनकर्ता श्री जितेन्द्र तिवारी जी के मोबाइल नम्बर पर सम्पर्क किया। श्री तिवारी जी के द्वारा मुझे पिथौरागढ़ निवासी साहित्यिक मित्र श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कान्त जी के बारे में जानकारी तो मिली, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी वह दिव्य आत्मा देहरादून में 30 सितम्बर 2025 को इस लोक को छोड़कर परलोक जा चुकी थी। इस दुःखद सूचना से मन आज बहुत दुखी है और मन में भारी पश्चाताप भी है कि हम मानसिक रूप से इतने निकटस्थ होते हुए भी एक बार भी आमने-सामने बैठकर नहीं मिल पाए। मैंने अपने नगर एटा (उ.प्र.) के रश्मिलोक टाकीज में समाजसेवी राकेश गांधी के सहयोग से एक सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें कुंवर कांत जी और हिंदी की लब्धप्रतिष्ठित कवयित्री डॉ. तारा सिंह (मुम्बई) को आमंत्रित किया था। डॉ. तारा सिंह (मुम्बई) से कार्यक्रम में सम्मिलित होने आईं लेकिन कुंवर कांत जी ने व्यस्तता व्यक्त की। एक बार मैं पिथौरागढ़ भी गया था लेकिन फिर भी मुलाकात नहीं हो सकी। सैकड़ों मील दूर रहकर बिना मुलाकात के ही हम दो जिस्म मगर एक जान बन गए थे। मेरे द्वारा प्रकाशित और सम्पादित राष्ट्रीय कोहिनूर के प्रत्येक अंक में श्री कुंवर कांत
पिथौरागढ़ और डॉ. तारा सिंह (मुम्बई) की रचनाएं प्रकाशित होती थीं।
पिथौरागढ़ निवासी जितेन्द्र तिवारी जी से ज्ञात हुआ कि स्वलिखित कहानी, उपन्यास और कविताओं को पुस्तकों का रूप देकर अमर हुए श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कांत जी कैंसर रोग से पीड़ित हो गये थे। शायद इसीलिए वह अपना अन्तिम समय निकट जान किसी से बात नहीं करते थे। शायद उन्होंने मेरा फोन भी इसी वजह से रिसीव नहीं किया होगा कि मुझे उनके कैंसर रोग से पीड़ित होने की सूचना से दुःख पहुंचेगा और वह दिव्य आत्मा जो मेरे जीवन में प्रकाश की किरण बनकर चमकी, वह मित्रों को बिना बताए रोगजनित पीड़ा सहते-सहते परलोक चली गई। श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कांत ने अपने परिवार में शिक्षक पत्नी श्रीमती लक्ष्मी सेन, तीन विवाहित और मेधावी बेटियां दीपिका, मेघना, अंकना, पुत्र अनुराग सेन, पुत्रवधू शकुन्तला सेन, पौत्र सुप्रतीक सेन को छोड़ा है। पुत्र अनुराग सेन 20 कुमाऊं रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात रहकर देश की सेवा कर रहे हैं।
श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कांत जी ने स्वरचित पुस्तक हृदय वीणा में मेरा जीवन परिचय प्रकाशित किया, वहीं हृदय के गीत नामक पुस्तक में मेरा नाम प्रातः स्मरणीय व्यक्तियों में लिखकर मेरे प्रति अपनी चाहत और आदर भाव का इजहार किया।
आज श्रद्धांजलि स्वरूप यह पंक्तियां लिखते समय मेरा हृदय विदीर्ण हो रहा है, आंखों से अश्रुओं की धारा बह रही है। दिल कह रहा है कि अब कैसे और कहां सशरीर मिल सकेगी, श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कांत जी की दिव्य आत्मा…? दिव्य आत्मा स्वरूप श्री इन्द्र बहादुर सेन कुंवर कांत जी जहां भी हों ईश्वर उन्हें सदैव खुशहाल रखें! दिव्य आत्मा को कोटि-कोटि नमन और भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि।
(स्वामी, प्रकाशक, सम्पादक)
दैनिक राष्ट्रीय कोहिनूर,
महाराणा प्रताप नगर, एटा-207001
मो०नं० 9084017506









