WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

कॉकरोच’ नाम और भारतीय जनमानस: संस्कृति, मर्यादा और संवैधानिक औचित्य का एक विश्लेषण* वरिष्ठ पत्रकार एके बिंदुसार  की कलम से

*’कॉकरोच’ नाम और भारतीय जनमानस: संस्कृति, मर्यादा और संवैधानिक औचित्य का एक विश्लेषण*

 

वरिष्ठ पत्रकार एके बिंदुसार

की कलम से——-

 

आज के दौर में जब राजनीतिक और सामाजिक विरोध के तौर-तरीकों में बदलाव आ रहा है, तो ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का उपयोग किसी संगठन के नाम के रूप में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब यहां पर हम चर्चा करेंगे कि क्या वह नाम हमारे राष्ट्र के संस्कृति सभ्यता और पहचान को विचार को संस्कार को नष्ट तो नहीं करने वाला है या आने वाले पीढ़ियों को कोई गलत दिशा तो देने वाला नहीं है।

अगर कोई किसी को किसी भी प्रकार का गाली या अशब्दों का प्रयोग करके संबोधित करता है तो चाहे वह कोई भी हो उसके लिए कानून है कड़ी से कड़ी सजा दे सकता है कानूनी धारा में रहकर उसे दंडित कराने का संघर्ष होना चाहिए।

अब हम चर्चा करेंगे किसी भी राष्ट्र की नींव उसकी संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों पर टिकी होती है। ऐसे में यह विश्लेषण करना अनिवार्य है कि क्या ऐसे नामों का प्रयोग भारतीय संदर्भ में उचित है।

1. भारतीय संस्कृति, सभ्यता और नामकरण की गरिमा

भारतीय संस्कृति में शब्दों का अपना एक विशेष महत्व और प्रभाव होता है। हमारे यहाँ नामकरण को एक संस्कार माना गया है, जो व्यक्ति या संस्था के चरित्र, उद्देश्यों और आदर्शों को दर्शाता है।

*सभ्यता का पैमाना:* हमारी सभ्यता में ‘भाषा’ को ‘संस्कार’ का प्रतिरूप माना गया है। किसी भी संगठन का नाम ऐसा होना चाहिए जो समाज में सकारात्मकता, नेतृत्व और गंभीरता का संचार करे।

*प्रतीकों का चुनाव:* भारतीय परंपरा में हमेशा से ही उन प्रतीकों को सम्मान दिया गया है जो वीरता, त्याग, सेवा, करुणा या ज्ञान का प्रतीक हों। इसके विपरीत, ‘कॉकरोच’ जैसे शब्द को नकारात्मकता, गंदगी और हीनता से जोड़ा जाता है। अतः, एक ऐसे शब्द को अपनाना जो भारतीय मानस में नकारात्मक छवि रखता है, हमारी सामाजिक परंपराओं के सौम्य और गरिमामयी स्वरूप के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।

2. क्या यह संवैधानिक रूप से उचित है?

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के अंतर्गत किसी भी नाम का चयन करना तकनीकी रूप से संवैधानिक हो सकता है।

*कानूनी सीमाएं:* भारतीय निर्वाचन आयोग और अन्य विनियामक निकाय किसी नाम पर प्रतिबंध तभी लगाते हैं जब वह कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाला, भड़काऊ या किसी विशिष्ट वर्ग को अपमानित करने वाला हो।

*नैतिक बनाम वैधानिक:* संविधान हमें कुछ भी करने की ‘स्वतंत्रता’ तो देता है, लेकिन साथ ही एक ‘उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार’ की अपेक्षा भी करता है। संवैधानिक रूप से स्वतंत्र होना और सामाजिक रूप से ‘उचित’ होना दो अलग-अलग विषय हैं। विधि केवल सीमाओं का निर्धारण करती है, लेकिन नैतिकता संस्कृति का निर्धारण करती है।

 

समाज में किसी संगठन की पहचान उसके उद्देश्यों और उसकी भाषा से होती है।

अराजकता बनाम रचनात्मकता: यदि किसी संगठन का नाम स्वयं ही नकारात्मक भाव लिए हुए है, तो वह समाज में किस प्रकार की प्रेरणा देगा? समाज से यदि संवाद करना है, तो भाषा ऐसी होनी चाहिए जो जोड़ सके, न कि विमुख कर सके।

*विमर्श का पतन:* राजनीति और सामाजिक आंदोलन देश की दिशा तय करते हैं। यदि हम ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का सहारा लेंगे, तो हम अनजाने में ही राजनीतिक विमर्श के स्तर को उस बिंदु तक ले जा रहे हैं जहाँ से समाज का गौरव और मर्यादा धूमिल होती है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए एक गलत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

 

निस्संदेह, विरोध का अधिकार लोकतंत्र की खूबसूरती है, परंतु उस विरोध का माध्यम भी उतना ही गरिमामयी होना चाहिए जिसके लिए आप लड़ रहे हैं। भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि “शब्द ब्रह्म है”। ऐसे में, किसी संगठन के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना जो भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं से मेल नहीं खाते, उचित नहीं ठहराया जा सकता।

एक राष्ट्र के रूप में, हमारी पहचान हमारे गौरवशाली प्रतीकों और भाषा से है। यदि हम समाज में बदलाव लाना चाहते हैं, तो हमें उन शब्दों का चयन करना चाहिए जो समाज में एकता, सम्मान और प्रगति की भावना को जागृत करें, न कि ऐसे शब्द जो केवल अपनी नकारात्मकता के लिए कुख्यात हों।

*क्या आपको लगता है कि समाज में अपनी बात रखने के लिए ‘शॉक वैल्यू’ (विवादास्पद नाम) का इस्तेमाल करना वर्तमान की मजबूरी है, या इसे अधिक मर्यादापूर्ण तरीके से भी किया जा सकता है?*

Leave a Comment