भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल ) Indian Media Foundation ( National )
नियमावली एवं उद्देश्य
धारा – 1: नाम-
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )
Indian Media Foundation (National )
धारा – 2: उद्देश्य
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )एक राष्ट्रीय, गैर-लाभकारी मीडिया कर्मियों एवं पत्रकार बंधुओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का राष्ट्रीय संगठन है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन( नेशनल )एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो सुदृढ़, समृद्ध, एवं स्वावलंबी राष्ट्र हो। जिसका दृष्टिकोण आधुनिक प्रगतिशील एवं प्रबुद्ध हो, और जो अपनी प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों से प्रेरणा ग्रहण करता हो तथा न्याययुक्त राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता को स्थापित करने के लिए देश के सभी राज्यों में अपनी प्रभावशाली भूमिका का निर्वहन कर सके।
भारतीय मीडिया कर्मियों एवं पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ता बंधुओं के अधिकार सम्मान सुरक्षा एवं उनको उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए एक सशक्त संगठन है, यह संगठन भारत के संविधान के नियमों और अधिनियम के अनुसार सशक्त मीडिया समृद्ध भारत का नव निर्माण एवं सशक्त मीडिया भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए कार्य करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन “नेशनल ” एक राष्ट्रीय, गैर-लाभकारी मीडिया कर्मियों एवं पत्रकार बंधुओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का संगठन है जो स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रूप से सभी प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा डिजिटल मीडिया के पत्रकार बंधुओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं भारतीय नागरिकों के लिए और मानव अधिकारों के ज्ञान और संरक्षण के लिए बना है। सभी भारतीय नागरिकों के लिए और मानव अधिकारों के ज्ञान और संरक्षण को प्रदान करेगा। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) भारत के लोकतंत्र प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए सदैव तत्पर रहेगा।
प्रदेश स्तर पर, विभाग या जिला स्तर पर कोई भी सामाजिक कार्यक्रम, कार्यक्रम का उद्देश्य, कार्यक्रम का विस्तृत विवरण, या कार्यक्रम की तारीख, समय और जगह निर्धारण के लिए समय-समय पर कोर कमेटी के माध्यम से आयोजन समिति एवं कार्यक्रम समिति बनाकर निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश कार्यकारिणी प्रदेश में होने वाले सभी प्रकार के पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता व मीडिया सम्मेलनों तथा सामाजिक कार्यक्रम या अभियानों का संचालन करेगी। इसी तरह मंडल कमेटी जिला कमेटी तहसील एवं ब्लॉक कमेटी कार्यक्रम का संचालन करेगी। भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी द्वारा समय-समय पर विचार मंथन करके पत्रकार बंधुओं के स्वावलंबन हेतु मीडिया कर्मियों एवं पत्रकार बंधुओं तथा सामाजिक कार्यकर्ता बंधुओं के साथ बैठक करके लक्ष्य एवं कार्यक्रम निर्धारित करेगी।
धारा – 3: मूल दर्शन
“सशक्त मीडिया भ्रष्टाचार मुक्त भारत एवं सशक्त मीडिया समृद्ध भारत के नवनिर्माण के लिए भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने का संकल्प” भारतीय मीडिया फाउंडेशन का मूल दर्शन होगा।
धारा – 4: निष्ठायें
राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकात्मता, लोकतंत्र, सामाजिक-आर्थिक विषयों पर समानतावादी दृष्टिकोण, जिससे शोषणमुक्त एवं समतायुक्त समाज की स्थापना हो सके और सकारात्मक पंथ-निरपेक्षता अर्थात सर्वधर्म समभाव से समाजकार्य में भारतीय मीडिया फाउंडेशन( नेशनल)विश्वास रखता है।
धारा – 5: कार्यकारिणी
क्षेत्र: संगठनात्मक में समन्वय और सहयोग के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ अन्य पदाधिकारियों की समन्वय समिति का गठन करेगी।
प्रदेश: संगठनात्मक में समन्वय और सहयोग के लिए क्षेत्र अध्यक्ष, भारत के संविधान में उल्लिखित राज्य और केंद्र-शासित क्षेत्र के अनुरूप अध्यक्ष के साथ अन्य पदाधिकारियों की समन्वय समिति का गठन करेगी।
मंडल, जिला, महानगर, तहसील एवं ब्लॉक: संगठनात्मक में समन्वय और सहयोग के लिए राज्य के मंडल, जिला, महानगर, तहसील एवं ब्लॉक अध्यक्ष के साथ अन्य पदाधिकारियों की समन्वय समिति का गठन करेगी।
धारा – 6: संगठनात्मक ढांचा
राष्ट्रीय स्तर:
भारतीय मीडिया फाउंडेशन का पूर्ण या विशेष अधिवेशन (मीटिंग पॉइंट्स)
राष्ट्रीय परिषद (कार्यालय)
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
राष्ट्रीय पद सूची-
चेयरमैन – 1
डिप्टी चेयरमैन – 2
अध्यक्ष – 1
वरिष्ठ उपाध्यक्ष – 1
उपाध्यक्ष – 9
प्रमुख महासचिव – 1
महासचिव – 9
सचिव – 10
संगठन सचिव – 10
सूचना एवं जन संपर्क प्रमुख – 1
कोषाध्यक्ष – 1
प्रवक्ता – 1
प्रमुख सलाहकार – 1
सलाहकार – 4
व आवश्यकता अनुसार सहायक पदाधिकारी (उपरोक्त सूची के अलावा अन्य किसी भी नये पद की नियुक्ति के लिए संस्थापक/चेयरमैन या राष्ट्रीय अध्यक्ष की लिखित अनुमति की आवश्यकता रहेगी)
कार्यकारिणी पार्षद-आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जाएंगे।
2. राष्ट्रीय क्षेत्र स्तर :
पूर्व क्षेत्र (बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम)
पश्चिम क्षेत्र (गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़)
उत्तर क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर)
दक्षिण क्षेत्र (कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु)
क्षेत्रीय अधिवेशन (मीटिंग पॉइंट्स)
क्षेत्रीय परिषद (कार्यालय)
क्षेत्रीय कार्यकारिणी
क्षेत्रीय पद सूची-
मैनेजमेंट प्रभारी एवं प्रतिनिधि-1
सहायक मैनेजमेंट प्रभारी एवं प्रतिनिधि-5
व आवश्यकता अनुसार सहायक पदाधिकारी (उपरोक्त सूची के अलावा अन्य किसी भी नये पद की नियुक्ति के लिए संस्थापक/चेयरमैन या राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष की लिखित अनुमति की आवश्यकता रहेगी)
3. प्रदेश स्तर
प्रदेश परिषद (कार्यालय)
प्रदेश कार्यकारिणी
प्रदेश पद सूची
चेयरमैन – 1
डिप्टी चेयरमैन-2
अध्यक्ष – 1
वरिष्ठ उपाध्यक्ष-1
उपाध्यक्ष – 9
प्रमुख महासचिव – 1
महासचिव-9
सचिव – 10
संगठन सचिव-10
सूचना एवं जन संपर्क प्रमुख-1
कोषाध्यक्ष – 1
प्रवक्ता-1
प्रमुख सलाहकार-1
सलाहकार-4
व आवश्यकता अनुसार सहायक पदाधिकारी (उपरोक्त सूची के अलावा अन्य किसी भी नये पद की नियुक्ति के लिए संस्थापक/चेयरमैन या राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मैनेजमेंट प्रभारी एवं प्रतिनिधि की लिखित अनुमति की आवश्यकता रहेगी)
कार्यकारिणी पार्षद-आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जाएंगे।
समितियाँ
धारा -6: मंडल, जिला, तहसील ब्लॉक समितियाँ
जिला पद सूची-
चेयरमैन – 1
डिप्टी चेयरमैन-2
अध्यक्ष – 1
वरिष्ठ उपाध्यक्ष-1
उपाध्यक्ष – 9
प्रमुख महासचिव – 1
महासचिव-9
सचिव – 10
संगठन सचिव-10
सूचना एवं जन संपर्क प्रमुख-1
कोषाध्यक्ष – 1
प्रवक्ता-1
प्रमुख सलाहकार-1
सलाहकार-4
व आवश्यकता अनुसार सहायक पदाधिकारी (उपरोक्त सूची के अलावा अन्य किसी भी नये पद की नियुक्ति के लिए संस्थापक/चेयरमैन या राष्ट्रीय अध्यक्ष, मैनेजमेंट प्रभारी एवं प्रतिनिधि एवं राज्य चेयरमैन व प्रदेश अध्यक्ष की लिखित अनुमति की आवश्यकता रहेगी)
कार्यकारिणी पार्षद-आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जाएंगे।
धारा – 7: राष्ट्रीय एवं प्रदेश कोष और खाता- राष्ट्रीय एवं प्रदेश में कोष संग्रह, खर्च और हिसाब-किताब रखने के लिए कार्य की देख रेख करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्ष एवं एक पांच सदस्यीय वित्त समिति का गठन करेंगे। पांच सदस्यों में एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष होगा।
यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश स्तर पर प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशन में और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के मार्गदर्शन में काम करेगी।
धारा – 8: पदाधिकारियों के अधिकार और उत्तरदायित्व चेयरमैन- अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के कार्यप्रणाली की समीक्षा करना उन्हें दिशा निर्देश देकर संगठन के उद्देश्यों के प्रति तैयार करना आवश्यकता अनुसार कार्यकारिणी में किसी भी प्रकार के विवाद होने पर एक निर्णायक मत देकर विवाद को समाप्त कराने का उत्तरदायित्व।
डिप्टी चेयरमैन- चेयरमैन के अनुपस्थिति में चेयरमैन के दिशा निर्देशों का पालन करना एवं कराना है।
अध्यक्ष- संबंधित समिति की बैठकों की अध्यक्षता करना।
संविधान के अनुसार अपनी समिति/कार्यकारिणी के पदाधिकारियों/सदस्यों को मनोनीत करना।
विभिन्न पदाधिकारियों तथा समिति/कार्यकारिणी के सदस्यों के बीच कार्य एवं उत्तरदायित्व का विभाजन करना।
अन्य संगठनों से बातचीत में भाग लेना, या उस कार्य के लिए अपने संगठन के प्रतिनिधि मनोनीत करना।
अपनी समिति/कार्यकारिणी की बैठक की तिथि निश्चित करना और संविधान में उल्लिखित अवधि के भीतर बैठक का आयोजन करना।
मैनेजमेंट एवं क्षेत्रीय इकाई के अध्यक्ष एवं संयोजक की सिफारिश/नियक्ति करना और उनके कार्य का ताल-मेल बैठाना।
संगठन की संगठनात्मक और रचनात्मक गतिविधियों एवं कार्यक्रमों को बढ़ाने के लिए कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में समिति/कार्यकारिणी का मार्गदर्शन करना।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष-
अध्यक्ष द्वारा निर्देशित जिम्मेदारी का निर्वहन करना।
अन्य उपाध्यक्ष अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष जिस उपाध्यक्ष को लिखित रूप से निर्देशित करेगा वह बैठक की अध्यक्षता करेगा।
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा निर्देशित उपाध्यक्ष, अध्यक्ष के उत्तरदायित्वों व अधिकारों का वहन करेगा।
प्रमुख महासचिव-
अध्यक्ष द्वारा निर्देशित तिथियों पर बैठकों का आयोजन करना, इसके लिए सूचना, विषय-सूची भेजना तथा व्यवस्था करना।
बैठक की कार्यवाही का ब्यौरा रखना और सदस्यों में वितरित करना।
अन्य महासचिव प्रमुख महासचिव एवं अध्यक्ष के दिशा निर्देशों के अनुसार कार्य करेगा एवं उसे अनुपालन कराएगा।
सचिव-
अध्यक्ष एवं महासचिव द्वारा निर्देशित उत्तरदायित्व का वहन करना तथा महासचिव को उसके कार्यों में सहयोग देना।
संगठन सचिव-
अध्यक्ष एवं महासचिव के निर्देशानुसार संगठन के हित में कार्य करना तथा पदाधिकारियों व सदस्यों को संगठित करना एवं हर कार्यक्रम में व्यवस्था करना व देखभाल करना।
संगठन के हर पदाधिकारी व सदस्य को बैठक व महत्वपूर्ण कार्यों की सूचना प्रदान करना सदस्यता अभियान की समीक्षा करना।
प्रवक्ता-
अध्यक्ष के निर्देशानुसार मीडिया प्रबंधक संचार विशेषज्ञ होते हैं जो विभिन्न मीडिया प्लेटफार्म के लिए सभी लक्षित सामग्री को विकसित और कार्यान्वित करते हैं। वे सभी मीडिया सामग्री पर शोध करते हैं, लिखते हैं, प्रूफरीड करते हैं और संपादित करते हैं, मीडिया अभियानों को लागू और प्रबंधित करते हैं, और जनसंपर्क और संचार योजनाओं को वितरित करते हैं संगठन के कार्यक्रमों एवं उद्देश्यों को विभिन्न संचार माध्यमों से सरकार एवं आमजन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रवक्ता की होती है।
सूचना एवं जन संपर्क प्रमुख-
संगठन के सामूहिक निर्णय एवं अध्यक्ष के निर्देशानुसार सूचना एवं जन संपर्क प्रमुख का कार्य है कि वह संगठन के पदों का ईमानदारी से प्रतिनिधित्व और वकालत करे, संगठन के विचारों को शासन प्रशासन और मीडिया के समक्ष तार्किक तरीके से रखने का अधिकार होता है। प्रवक्ता के निर्देशों पर संगठन के लक्ष्यों को समर्थन देते हुए समाज में लोगों को प्रशिक्षण देकर संगठन के उद्देश्यों के प्रति कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रमुख सलाहकार-
स्वतंत्र रूप से संगठन को बेहतर प्रदर्शन हेतु विभिन्न प्रकार के सहयोगों के लिए प्रबन्धन सलाहकार के रूप में वाह्य विशेषज्ञों से नियमित रूप से सलाह एवं परामर्श करना। संगठन के किसी भी कार्य के सम्पादन को अत्यधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव एवं सेवाओं की पहचान हेतु प्रबन्धन परामर्श सहयोग एवं मार्ग दर्शन करना एवं संगठन की ओर से सरकार के समक्ष प्रस्ताव रखना विचार विमर्श करना एवं संगठन हित में नए कार्यक्रम तैयार करना तथा नीति निर्धारण समिति के समक्ष कार्यक्रम को बनाने हेतु प्रस्ताव देना।
सलाहकार- प्रमुख सलाहकार के निर्देशों का अनुपालन करना और उसे प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना।
कोषाध्यक्ष-
अध्यक्ष के निर्देशानुसार अपनी इकाई के आय-व्यय का ब्यौरा रखना
अपनी इकाई के आय-व्यय का ऑडिट करवाना और उसकी रिपोर्ट प्रतिवर्ष समिति/कार्यकारिणी को प्रस्तुत करना।
अधीनस्थ इकाइयों के आय-व्यय की जाँच करना।
धारा – 9: संगठन कोष
अध्यक्ष के आदेश पर कोष संग्रह के लिए राष्ट्रीय तथा प्रदेश स्तरों पर रसीदें छपाई जायेगी।
प्रत्येक रसीद क्रमांकित होगी तथा 25 रसीदों की पुस्तिका में जारी की जायेगी।
प्रत्येक रसीद पर संबंधित प्रदेश/राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर की मुहर छापी जायेगी, संग्रहकर्ता भी प्रत्येक रसीद पर अपना स्पष्ट हस्ताक्षर करेगा।
प्रदेश स्तर तक संगठन का खाता बैंक में खोला जायेगा। जिसमे अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से धन निकालने की व्यवस्था की जायेगी।
मंडल तथा स्थानीय समिति का क्षेत्र, संबंधित प्रदेश कार्यकारिणी निर्धारित करेगी।
प्रदेश कार्यकारिणी, यदि कोई अन्य निश्चय न करे तो जिलों का क्षेत्र सामान्यतः राज्य के प्रशासकीय जिलों के ही समान होगा, परन्तु जिन नगरों की जनसंख्या पांच लाख से अधिक होगी, उन्हें पृथक (विशेष या अलग) जिला बनाया जा सकेगा।
संबंधित प्रदेश कार्यकारिणी जनसंख्या के आधार पर 20 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरीय क्षेत्रों को एक से अधिक जिलों में विभाजित कर सकेगी।
आवश्यकता होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहायता के लिए प्रभारी एवं प्रतिनिधि की नियुक्ति कर सकते है और प्रदेश अध्यक्ष को भी ऐसी नियुक्तियों की अनुमति दे सकते है।
आवश्यकता होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष दो या दो से अधिक प्रदेशों के संगठन कार्य के लिए क्षेत्रीय मैनेजमेंट प्रभारी एवं प्रतिनिधि की नियुक्ति कर सकते है और प्रदेश अध्यक्ष को प्रदेश स्तर पर दो या अधिक जिलों के लिए विभाग/संभाग प्रभारी एवं प्रतिनिधि की नियुक्तियों की अनुमति दे सकते है।
धारा – 10: प्रदेश इकाई का क्षेत्र
भारत के संविधान में उल्लिखित राज्य और केंद्र-शासित क्षेत्रों के अनुरूप संघ की प्रदेश इकाइयों (यूनिट) का संगठन किया जायेगा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी चाहे तो महानगर क्षेत्रों अथवा किसी विशिष्ट क्षेत्र के लिए प्रदेश इकाइयों (यूनिट्स) के अंतर्गत क्षेत्रीय समितियों के गठन की स्वीकृति दे सकती है।
इन समितियों के अधिकार तथा कार्य केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा बनाये गए नियमो द्वारा निर्धारित किये जायेंगे।
धारा – 11: सदस्यता
18 वर्ष या अधिक आयु का कोई भी पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता रिटायर्ड कर्मचारी अधिकारी, महिला एवं पुरुष, अभिनेता, सिंगर, लेखक, साहित्यकार, शिक्षक एवं भारतीय नागरिक, जो विधान की धारा 2, 3, और 4, को स्वीकारता है, सदस्यता-पत्र फॉर्म में लिखित घोषणा करने पर और निर्धारित शुल्क देने पर संगठन का सदस्य बन सकता है।
सदस्य का काल-खण्ड सामान्यतः : 5 वर्ष का होगा, नया काल-खण्ड प्रारम्भ होने पर (जिसका निर्णय राष्ट्रीय कार्य समिति समय-समय पर करेगी) सभी सदस्यों को फिर सदस्यता पत्र भरना होगा। इस बीच मृत्यु हो जाने पर, त्याग पत्र देने पर, अथवा निष्कासन से सदस्यता समाप्त हो जाएगी।
कोई भी व्यक्ति सामान्यतः अपने स्थायी निवास-स्थान पर अथवा उस जगह पर, जहाँ वह अपना काम काज करता हो वह संगठन का सदस्य बन सकता है।
स्थान परिवर्तन के लिए सदस्य को लिखित आवेदन संबंधित जिला/प्रदेश को देना होगा।
सदस्यता का प्रकार-
1- वार्षिक साधारण सदस्यता शुल्क ₹100 मात्र
2- वार्षिक विशिष्ट सदस्यता शुल्क ₹500 मात्र।
3- वार्षिक सक्रिय सदस्यता शुल्क ₹1100 मात्र।
4- आजीवन सदस्यता शुल्क रुपया 11000 मात्र।
1- जो भी व्यक्ति ₹100 की सदस्यता देकर साधारण सदस्य बनेंगे उन्हें सिर्फ नियुक्ति पत्र जारी की जाती है साधारण सदस्यता का।
2- जो भी व्यक्ति ₹500 का विशिष्ट सदस्यता देकर ज्वाइन करेंगे उन्हें विशिष्ट सदस्य का नियुक्ति पत्र एवं आई कार्ड दी जाती है।
3- जो भी व्यक्ति सक्रिय सदस्य 1100 रुपए देकर ज्वाइन करते हैं उन्हें मीडिया अधिकारी एवं पदाधिकारी उनकी योग्यता के आधार पर बनाया जाता है उन्हें नियुक्ति पत्र एवं आई कार्ड दिया जाएगा।
4- ₹11000 सदस्यता शुल्क देकर कोई भी व्यक्ति आजीवन सदस्य बन सकता है उन्हें वैधानिक तरीके से आजीवन सदस्यता प्रमाण पत्र जारी किया जाता हैं।
(नोट – 10 साधारण सदस्य बनाने पर आपको सक्रिय सूची में शामिल कर लिया जाएगा।)
धारा – 12 : कार्यकाल
प्रत्येक परिषद/ कार्यकारिणी/समिति तथा उनके पदाधिकारियों एवं सदस्यों का कार्य-काल सामान्यतः 5 वर्ष का होगा। राष्ट्रीय कार्यकारिणी समय-समय पर कार्यकाल को बदल सकती है जो उसके अधिकार क्षेत्र में होगा, समस्त समितियों का समय-समय पर चुनाव कराने का भी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।
कार्यकाल पूर्ण होने पर सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को सदस्य पत्र एवं सदस्यता शुल्क या अनुदान देना अनिवार्य होगा।
कार्यकाल की अवधि समाप्त होने के 3 माह पूर्व क्षेत्रीय समिति, प्रदेश समिति, मंडल, जिला, महानगर, तहसील समिति एवं ब्लाक समिति प्रखंड समिति एवं तालुका समिति को अपने अपने पद मनोनयन हेतु राष्ट्रीय अध्यक्ष या राष्ट्रीय समिति, प्रदेश समिति को प्रस्तुत करना होगा।
समस्त समितियों में पदाधिकारी सक्रिय सदस्य एवं आजीवन सदस्य को ही बनाने का प्रावधान है।
धारा – 13: सदस्य पंजिका
स्थानीय समिति के अनुसार प्रत्येक सदस्यों की पंजिका प्रदेश समिति द्वारा तैयार करवाई जाएगी जिसे राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित नियमो के अनुसार जिला कार्यकारिणी प्रमाणित करेगी। प्रमाणित सदस्यता पंजिका की एक प्रति जिला समिति तथा एक प्रति संबंधित स्थानीय समिति को भेजी जाएगी।
इस प्रकार तैयार की गयी पंजिका में प्रत्येक सदस्य का पूरा नाम, पिता/पति का नाम, आयु, व्यवसाय, निवास स्थान का पता, सदस्यता फॉर्म का क्रमांक और भर्ती की तारीख पहली बार भारतीय मीडिया फाउंडेशन का सदस्य बनने का वर्ष तथा सदस्यता फॉर्म क्रमांक का उल्लेख होगा।
धारा – 14 : सदस्य पंजिका की छानबीन:
प्रदेश कार्यकारिणी तथा जिला समिति प्रत्येक मंडल के लिए तैयार किये गए वर्षीय सदस्यता रजिस्टर की जाँच करेगी तथा पंजीकरण में हुई अनियमितता संबंधी शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था करेगी तथा रजिस्टर में सुधार करवाएगी। बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायत होने पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी जैसा आवश्यक समझेगी वैसी कार्यवाही करेगी।
धारा-15: ध्वज –
केशरिया झंडा : झंडा का दृढ संकल्प या फैसले, शत्रु की पराजय या किसी खास सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक होता है। संगठन के कार्यक्रमों के दौरान झंडे को फहराकर अपने सम्मान एवं स्वाभिमान का प्रदर्शन भी किया जाता है।
ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात 3:2 है। केसरिया पट्टी के मध्य में भारतीय मीडिया फाउंडेशन ( नेशनल) का लोगो चिन्ह होगा।
पदाधिकारियों के लिए ड्रेस निर्धारित किया गया है जो की शर्ट मेहरून कलर एवं पैंट सफेद कलर का होगा।
धारा – 16 : संविधान की व्याख्या
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )संविधान की धाराओं और नियमो और उसके आशय की व्याख्या करने का अधिकार राष्ट्रीय कार्यसमिति को होगा। राष्ट्रीय कार्यसमिति का निर्णय सभी इकाइयों और सदस्यों के लिए अंतिम और बाध्यकारी होगा। भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )के संविधान में संशोधन, परिवर्तन या परिवर्धन सिर्फ राष्ट्रीय कार्यसमिति द्वारा गठित नीति निर्धारण समिति के द्वारा किया जाएगा।
नियम
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल )के सदस्यता-प्रपत्र संबंधित राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा ही छपाये जायेंगे।
सदस्यता-प्रपत्रों पर क्रमवार संख्या डाली जायेगी, यह क्रम वर्षीय काल-खंड के बाद फिर से प्रारंभ होगा।
इन प्रपत्रों पर उस समय के प्रदेश अध्यक्ष या अध्यक्ष द्वारा नामांकित पदाधिकारी के हस्ताक्षर की मुहर होना अनिवार्य है।
सदस्यता प्रपत्र पुस्तिका के रूप में जारी किये जायेंगे, प्रथम वर्ष अथवा उस समिति क्षेत्र में पहली बार सदस्यता होने पर 25 फॉर्म की कॉपी दी जायेगी अन्यथा एक पुस्तिका में 10 फॉर्म होंगे।
जिले में सदस्य बनाने का उत्तरदायित्व मुख्यत: जिला/तहसील एवं ब्लॉक इकाइयों का होगा। प्रदेश इकाइयां जिला इकाईयों को सदस्यता प्रपत्र जारी करेगी। जिला इकाइयां बाद में इन प्रपत्रों को अपनी अधीनस्थ इकाइयों को जारी करेगी। विशेष परिस्थिति में विशेष सदस्य को भी प्रपत्र जारी किये जा सकते है पर एक बार में 50 से अधिक सदस्यता प्रपत्र जारी नहीं किये जायेंगे। पहले जारी किये गए प्रपत्रों का हिसाब व धन जमा करा देने के बाद ही अधिक प्रपत्र जारी किये जा सकेंगे यदि इस आशय की शिकायत हो की जिला इकाई प्रपत्रों का उचित वितरण नहीं कर रही है तो जाँच के बाद प्रदेश इकाई उन इकाईयों को प्रपत्र सीधे वितरित कर सकेगी और संबंधित जिले को इसकी जानकारी दे देगी।
प्रपत्र जारी करते समय उनके प्राप्त होने के सम्बन्ध में क्षेत्रीय मैनेजमेंट/ प्रदेश/जिला/तहसील कार्यालय द्वारा हस्ताक्षरित पावती ली जायेगी यदि कोई इकाई या व्यक्ति अप्रयुक्त प्रपत्रों को लौटाने और प्रयुक्त प्रपत्रों का हिसाब समय से जमा कराने में विलम्ब करता है तो संगठन की ओर से कार्यवाही एवं पद से निलंबित किया जा सकता है।
जिला इकाइयाँ प्रत्येक वर्ष सदस्यों की स्थानीय और महानगर समिति के अनुसार सूचियाँ तैयार करवायेंगी। उनमें उस वर्ष में बनाये गए नये सदस्यों को जोड़ा जायेगा जिले में स्थानीय समिति और नगर एवं महानगर समिति के अनुसार किन किन स्थानीय समितियों में कुल कितने कितने सदस्य हो गए है, इनका पूर्ण ब्यौरा प्रदेश को भेजा जायेगा।
धारा-17
प्रतिज्ञा
भारतीय मीडिया फाउंडेशन “नेशनल” के मूल दर्शन “सशक्त मीडिया के नव निर्माण एवं लोकतंत्र की व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए संकल्प” लेता हूं/लेती हूं, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकात्मता, लोकतंत्र “सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं के प्रति समानता वादी दृष्टिकोण के आधार पर समता युक्त एवं शोषणमुक्त समाज की स्थापना सकारात्मक पंथ-निरपेक्षता” सर्वधर्म समभाव और मानवतावादी मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता एवं सामाजिक कार्यों के प्रति मेरी निष्ठा है।
मैं ऐसे राष्ट्र की अवधारणा को स्वीकार करता हूं /करती हूं , जो संप्रदाय- निरपेक्ष हो तथा उपासना – पद्धति पर आधारित न हो, मैं जाति – लिंग एवं मजहब के आधार पर किसी प्रकार के विभेद पर विश्वास नहीं करता हूं/ करती हूं,
मैं भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संविधान, नियम और अनुशासन के पालन का वचन देता हूं /देती हूं, मेरे द्वारा किसी भी तरह से संगठन विरोधी कार्य किए जाने पर संगठन से निष्कासित एवं कानूनी कार्रवाई किया जाएगा तो मुझ शपथ कर्ता/ कर्त्री को कोई आपत्ति नहीं होगी।
धारा -18
केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के द्वारा अनुशासन समिति, पॉलिसी मेकिंग सुप्रीम कमेटी (नीति निर्धारण समिति) राष्ट्रीय सलाहकार परिषद , जनरल असेंबली का गठन किया जाएगा जिसमें अध्यक्ष के साथ अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
1-अनुशासन समिति को किसी भी मामले में संगठन की ओर से विधि पूर्वक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का स्वतंत्र अधिकार होगा।
2-पॉलिसी मेकिंग सुप्रीम कमेटी को संगठन के नियम एवं संविधान में संशोधन तथा नए नीति एवं कार्यक्रम का निर्धारण करने का स्वतंत्र अधिकार होगा जो प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी को भेजेगा जिस पर केंद्रीय मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी का सहमति होने के बाद उसे संपूर्ण रूप से लागू करने का अधिकार होगा।
3-राष्ट्रीय सलाहकार परिषद-भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के समस्त कार्यक्रमों के निर्धारण एवं उद्देश्य, लक्ष्य को पूर्ण करने हेतु राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सलाह और सुझाव अनिवार्य एवं अंतिम निर्णय होगा।
4-जनरल असेंबली-संगठन के समस्त सदस्यों को मिलाकर जनरल असेंबली (साधारण सभा) का गठन किया जाएगा जिसके केंद्रीय अध्यक्ष की अध्यक्षता में समस्त कार्यक्रम एवं विषयों पर विधि पूर्वक चर्चा परिचर्चा की जाएगी।
धारा 19-
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के अनुषांगिक संगठन भी होंगे।
1-यूथ विंग
यूथ विंग (Youth Wing): कर्तव्य, अधिकार एवं उद्देश्य
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का यूथ विंग संगठन की वह ऊर्जावान शक्ति है, जो युवा पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने और राष्ट्र-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
1. मुख्य उद्देश्य (Objectives)
युवा नेतृत्व का विकास: पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में नए और प्रतिभाशाली युवाओं को पहचानना और उन्हें नेतृत्व के अवसर प्रदान करना।
नवाचार और आधुनिकता: डिजिटल युग की नई तकनीकों और सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन के संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रसारित करना।
लोकतंत्र की सुरक्षा: युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें देश की समस्याओं के समाधान हेतु ‘सशक्त मीडिया’ से जोड़ना।
भ्रष्टाचार मुक्त भारत का संकल्प: युवाओं को भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने और पारदर्शी शासन के लिए कार्य करने हेतु प्रेरित करना।
2. कर्तव्य (Duties)
सदस्यता अभियान: स्कूल, कॉलेज और संस्थानों के युवा पत्रकारों को संगठन की धारा-11 के अनुसार सदस्य बनाना और उन्हें सक्रिय करना।
अनुशासन का पालन: संगठन के संविधान और नियमों का स्वयं पालन करना और अन्य युवा सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करना।
कार्यक्रमों का आयोजन: समय-समय पर युवा सम्मेलनों, कार्यशालाओं और जागरूकता अभियानों का संचालन करना।
रिपोर्टिंग और फीडबैक: अपने कार्यक्षेत्र (ब्लॉक/तहसील/जिला) की समस्याओं को मुख्य कार्यकारिणी तक पहुँचाना और जमीनी स्तर पर कार्य करना।
3. अधिकार (Rights)
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: संगठन के मंच पर युवाओं से संबंधित मुद्दों और विकास कार्यों पर स्वतंत्र रूप से विचार रखने का अधिकार।
प्रतिनिधित्व: यूथ विंग के पदाधिकारियों को संगठन की मुख्य बैठकों में अपनी विंग का पक्ष रखने और सुझाव देने का अधिकार है।
नियुक्ति की सिफारिश: अपनी इकाई के भीतर कर्मठ युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने हेतु उच्च पदाधिकारियों को सिफारिश करने का अधिकार।
प्रशिक्षण का लाभ: संगठन द्वारा आयोजित मीडिया प्रशिक्षण और कार्यशालाओं में प्राथमिकता के आधार पर भाग लेने का अधिकार।
4. कार्य क्षेत्र (Scope of Work)
यूथ विंग का कार्यक्षेत्र व्यापक है और यह मुख्य संगठन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलता है:
शैक्षणिक संस्थान: विश्वविद्यालयों और पत्रकारिता संस्थानों में युवाओं को ‘नागरिक पत्रकारिता’ (Citizen Journalism) के लिए तैयार करना।
डिजिटल प्लेटफार्म: सोशल मीडिया, यूट्यूब और न्यूज पोर्टल्स के माध्यम से युवाओं की समस्याओं (जैसे बेरोजगारी, शिक्षा सुधार) को उठाना।
ग्राम स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक: यूथ विंग की समितियाँ ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक गठित की जाती हैं, ताकि हर स्तर पर युवा शक्ति का उपयोग किया जा सके।
प्रशासनिक समन्वय: स्थानीय शासन और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जन-समस्याओं के निवारण हेतु सक्रिय रहना।
5. महत्व (Significance)
यूथ विंग का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह संगठन की भविष्य की नींव है। यह विंग न केवल ‘मिशन प्रेस’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक निडर, निष्पक्ष और पारदर्शी पत्रकार के रूप में तैयार करती है।
2-महिला सेल
‘महिला सेल’ (Women’s Cell) : कर्तव्य ,अधिकार एवं उद्देश्य
उद्देश्य महिलाओं को पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता के क्षेत्र में सशक्त बनाना है। इसके कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. महिला सेल के मुख्य उद्देश्य (Objectives)
समान भागीदारी: पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें निर्णय लेने वाली समितियों में सम्मानजनक स्थान दिलाना।
सुरक्षा और सम्मान: महिला पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना।
जागरूकता: महिलाओं के कानूनी अधिकारों, मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक करना।
नेतृत्व विकास: महिलाओं को मीडिया सम्मेलनों, जन-सुनवाई और सामाजिक आंदोलनों में नेतृत्व करने के लिए तैयार करना।
2. कर्तव्य (Duties)
नेटवर्किंग: अपने कार्यक्षेत्र में महिला पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क बनाना।
समस्या निवारण: यदि किसी महिला पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कार्यस्थल पर भेदभाव या शोषण होता है, तो उसकी आवाज उठाना और उसे न्याय दिलाने के लिए संगठन स्तर पर प्रयास करना।
प्रशिक्षण: महिलाओं के लिए विशेष मीडिया प्रशिक्षण सत्र और कार्यशालाओं का आयोजन करना।
सामाजिक कार्यक्रम: महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा) पर विशेष अभियान और जन-सुनवाई आयोजित करना।
संवाद: संगठन की मुख्य कार्यकारिणी को महिलाओं से संबंधित समस्याओं और फीडबैक से अवगत कराना।
3. अधिकार (Rights)
प्रतिनिधित्व का अधिकार: महिला सेल की प्रमुख और पदाधिकारियों को संगठन की कोर कमेटी की बैठकों में अपनी विंग का पक्ष रखने और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का पूर्ण अधिकार है।
स्वतंत्र निर्णय: सेल के अंतर्गत महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों को आयोजित करने और उनकी रूपरेखा तैयार करने की स्वायत्तता (यदि वह संविधान के दायरे में हो)।
शिकायत निवारण: किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अन्याय के विरुद्ध संगठन की ‘अनुशासन समिति’ के समक्ष शिकायत दर्ज कराने और उस पर त्वरित कार्यवाही की मांग करने का अधिकार।
सिफारिश का अधिकार: अपनी विंग की कर्मठ महिलाओं को संगठन के विभिन्न पदों पर नियुक्त करने के लिए नेतृत्व को सिफारिश करना।
4. कार्यक्षेत्र (Scope of Work)
डिजिटल और प्रिंट मीडिया: महिला पत्रकारों को डिजिटल मीडिया और प्रिंट मीडिया की नई तकनीकों से लैस करना।
अधिवक्ता फोरम के साथ समन्वय: कानूनी सहायता के लिए ‘अधिवक्ता फोरम’ के साथ मिलकर कार्य करना।
आमजन के बीच: महिला सेल केवल पत्रकारों तक सीमित नहीं है, यह समाज की उन महिलाओं तक भी पहुँचती है जिन्हें पत्रकारिता के माध्यम से न्याय की आवश्यकता है (जैसे नागरिक पत्रकारिता के माध्यम से)।
महत्व
महिला सेल का अस्तित्व इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक स्वस्थ और पारदर्शी लोकतंत्र के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण आवश्यक है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का यह सेल इस बात को सुनिश्चित करता है कि “सशक्त मीडिया” के मिशन में आधी आबादी की आवाज न केवल सुनाई दे, बल्कि उसका प्रभाव भी दिखे।
3-अधिवक्ता फोरम
अधिवक्ता फोरम (Advocates’ Forum) का गठन मीडिया कर्मियों को कानूनी कवच प्रदान करने और संगठन के कानूनी मामलों को विशेषज्ञता के साथ निपटाने के लिए किया गया है। यह फोरम पत्रकारों के ‘चौथे स्तंभ’ के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
इसके कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. अधिवक्ता फोरम के उद्देश्य (Objectives)
- कानूनी सुरक्षा: मीडिया कर्मियों को उनके पत्रकारिता कार्य के दौरान आने वाली कानूनी बाधाओं और उत्पीड़न से सुरक्षित रखना।
- संवैधानिक जागरूकता: पत्रकारों को प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित कानूनों, आईपीसी (IPC)/बीएनएस (BNS), और मीडिया से संबंधित विशेष कानूनों के प्रति जागरूक करना।
- विवाद निवारण: पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से जुड़े कानूनी विवादों का शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से समाधान निकालना।
- पैरवी (Advocacy): मीडिया प्रोटेक्शन एक्ट और पत्रकार कल्याण बोर्ड जैसी मांगों के लिए कानूनी मसौदे तैयार करना और सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखना।
2. कर्तव्य (Duties)
- परामर्श (Legal Consultation): संगठन के सदस्यों को कानूनी मामलों में परामर्श देना और एफआईआर (FIR) या नोटिस मिलने पर सही कानूनी मार्गदर्शन करना।
- कानूनी दस्तावेज तैयार करना: पत्रकारिता से जुड़े मानहानि, आरटीआई, या अन्य कानूनी पत्रों का मसौदा (Drafting) तैयार करना।
- अदालती कार्यवाही: पत्रकार हित से जुड़े मामलों में न्यायालय में संगठन की ओर से पक्ष रखना या कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
- निगरानी: पत्रकारों के खिलाफ होने वाली दमनकारी कार्रवाइयों पर नजर रखना और तुरंत कानूनी उपचार शुरू करना।
- संगठन के अनुबंधों की समीक्षा: मीडिया संस्थानों के साथ पत्रकारों के एग्रीमेंट और नियुक्ति शर्तों की कानूनी समीक्षा करना।
3. अधिकार (Rights)
- प्रतिनिधित्व: संगठन की ओर से कानूनी मंचों, न्यायाधिकरणों और प्रशासनिक बैठकों में आधिकारिक कानूनी प्रतिनिधि के रूप में भाग लेना।
- दस्तावेज निरीक्षण: पत्रकार के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में संबंधित विभाग से जवाब-तलब करना और साक्ष्यों की कानूनी समीक्षा करना।
- निर्णय लेने की शक्ति: किसी मामले में कानूनी गंभीरता को देखते हुए न्यायालय जाने या अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) जैसी आपातकालीन कानूनी सहायता की अनुशंसा करना।
- अंदरूनी जांच: यदि कोई सदस्य पत्रकारिता की आड़ में आपराधिक गतिविधि करता है, तो फोरम को उसकी आंतरिक जांच कर संगठन को रिपोर्ट सौंपने का अधिकार है।
- नीतिगत सलाह: संगठन के नेतृत्व को नई नीतियों और आंदोलनों के कानूनी पहलुओं पर राय देना।
प्रमुख कार्यप्रणाली (Strategy)
अधिवक्ता फोरम का कार्य “निवारक” (Preventive) होना चाहिए। यह फोरम सुनिश्चित करेगा कि पत्रकार को संकट में पड़ने से पहले ही कानूनी रूप से जागरूक कर दिया जाए। यह सेल संगठन के अन्य सभी सेलों (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, आरटीआई, आईटी) के लिए एक ‘कानूनी सुरक्षा कवच’ के रूप में कार्य करेगा।
4-बॉलीवुड फोरम
बॉलीवुड फोरम की स्थापना का मुख्य उद्देश्य मनोरंजन जगत, कलाकारों, तकनीकी कर्मियों और मीडिया के बीच एक सेतु का निर्माण करना है। एक जिम्मेदारीपूर्ण और पारदर्शी तंत्र विकसित करने के लिए इस फोरम के कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. बॉलीवुड फोरम के मुख्य उद्देश्य
- कलाकारों और तकनीकी कर्मियों का संरक्षण: फिल्म जगत से जुड़े छोटे स्तर के कलाकारों, तकनीशियनों और स्पॉट बॉय से लेकर सहायक कलाकारों तक के हितों की रक्षा करना।
- पारदर्शिता को बढ़ावा: फिल्म निर्माण और वितरण प्रक्रिया में व्यावसायिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना ताकि किसी भी कलाकार या कर्मी का शोषण न हो।
- मीडिया और मनोरंजन जगत में समन्वय: मीडिया जगत और फिल्म उद्योग के बीच एक स्वस्थ और सकारात्मक संवाद स्थापित करना।
- सामाजिक जिम्मेदारी: मनोरंजन के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुँचाने और कला के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए कलाकारों को प्रेरित करना।
2. कर्तव्य (Duties)
- शोषण के विरुद्ध आवाज: किसी भी कलाकार या फिल्म कर्मी के साथ होने वाले अन्याय, अनुबंध (Contract) उल्लंघन या भुगतान संबंधी विवादों पर कानूनी और नैतिक समर्थन प्रदान करना।
- मानकों का निर्धारण: कार्यस्थल पर सुरक्षा, सम्मानजनक व्यवहार और उचित पारिश्रमिक के मानक सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना।
- शिकायत निवारण: फिल्म जगत से जुड़ी समस्याओं को सुनने के लिए एक व्यवस्थित ‘जन-सुनवाई’ या शिकायत निवारण सेल का संचालन करना।
- जागरूकता अभियान: कलाकारों को उनके कानूनी अधिकारों, RTI के प्रयोग और मीडिया के साथ व्यवहार करने के तौर-तरीकों के प्रति जागरूक करना।
3. अधिकार (Rights)
- निरीक्षण और निगरानी: फाउंडेशन के दायरे में, उद्योग से जुड़े विवादों या शिकायतों के संदर्भ में तथ्यों की निष्पक्ष जांच करना।
- प्रतिनिधित्व: सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं के समक्ष फिल्म उद्योग के कर्मियों (विशेषकर असंगठित क्षेत्र) की मांगों को आधिकारिक तौर पर रखना।
- परामर्श और मध्यस्थता: किसी भी विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ (Mediator) के रूप में कार्य करना और समाधान के लिए सुझाव देना।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: फाउंडेशन के नियमों का उल्लंघन करने वाले या मीडिया की गरिमा को नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध आंतरिक जांच कर उचित कार्यवाही की अनुशंसा करना।
नोट:
बॉलीवुड फोरम का यह स्वरूप भारतीय मीडिया फाउंडेशन के व्यापक विजन—”मीडिया, लोकतंत्र और समाज की सेवा”—के अनुरूप है। इसका ध्येय फिल्म उद्योग को केवल ग्लैमर के नजरिए से न देखकर उसे एक व्यवस्थित और जवाबदेह सामाजिक इकाई के रूप में स्थापित करना है।
5-प्रिंट मीडिया सेल
प्रिंट मीडिया सेल का गठन पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखने और प्रिंट मीडिया से जुड़े पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए किया गया है। आपके मार्गदर्शन में,
इस सेल के कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. प्रिंट मीडिया सेल के उद्देश्य (Objectives)
पत्रकार सुरक्षा: प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को कार्यस्थल और फील्ड पर सुरक्षा प्रदान करना और उनके खिलाफ होने वाले उत्पीड़न को रोकना।
अधिकारों का संरक्षण: मीडियाकर्मियों के संवैधानिक अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना।
व्यावसायिक कल्याण: पत्रकारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं, बीमा और पेंशन जैसे मुद्दों को सरकारी स्तर पर उठाना।
पारदर्शिता: समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के संचालन में पारदर्शिता लाना और फर्जी/अवैध प्रकाशनों पर अंकुश लगाना।
सामुदायिक जुड़ाव: जन-पत्रकारिता (Citizen Journalism) को बढ़ावा देना ताकि जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जा सके।
2. कर्तव्य (Duties)
नियमित निगरानी: अपने क्षेत्र में कार्यरत पत्रकारों की समस्याओं को सुनना और उन पर त्वरित कार्रवाई करना।
कानूनी सहायता: किसी भी पत्रकार के विरुद्ध झूठे मुकदमे या उत्पीड़न की स्थिति में उन्हें कानूनी परामर्श और संगठन का सहयोग प्रदान करना।
प्रमाणन और सत्यापन: संगठन के सदस्यों की साख की पुष्टि करना और फर्जी पत्रकारों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्यवाही के लिए प्रशासन को सूचित करना।
रिपोर्टिंग और समीक्षा: क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं पर आधारित रिपोर्ट तैयार करना और समय-समय पर जिला/राज्य कमेटी को अपडेट करना।
संगठन का विस्तार: प्रिंट मीडिया के अधिक से अधिक साथियों को संगठन से जोड़ना और सदस्यता अभियान का संचालन करना।
जन-सुनवाई: ‘मीडिया जन-सुनवाई दिवस’ (प्रत्येक माह का पहला रविवार) में सक्रिय रूप से भाग लेकर जनता की समस्याओं को अखबारों के माध्यम से शासन तक पहुँचाना।
3. अधिकार (Rights)
जांच और पूछताछ: किसी भी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार की घटना होने पर संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक जानकारी मांगने का अधिकार।
अनुशंसा का अधिकार: स्थानीय प्रशासन या पुलिस विभाग को किसी भी पत्रकार की सुरक्षा या उनके द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों पर त्वरित कार्यवाही के लिए पत्र लिखने का अधिकार।
अनुशासनात्मक कार्यवाही: संगठन के नियमों का उल्लंघन करने वाले या पत्रकारिता की आड़ में अनैतिक कार्य करने वाले सदस्यों के विरुद्ध जांच समिति गठित करना और सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा करना।
प्रतिनिधित्व: सरकारी बैठकों, प्रेस सम्मेलनों और प्रशासनिक आयोजनों में मीडिया की ओर से आधिकारिक रूप से प्रतिनिधित्व करने का अधिकार।
निरीक्षण: संगठन से जुड़े प्रिंट मीडिया संस्थानों और कार्यालयों के संचालन मानकों की समीक्षा करने का अधिकार।
नोट: प्रिंट मीडिया सेल का प्रत्येक सदस्य भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी की नियमावली के प्रति जवाबदेह है और उन्हें अपने अधिकारों का प्रयोग सदैव जनकल्याण और प्रेस की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए करना है।
6- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेल
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेल का उत्तरदायित्व डिजिटल युग में समाचारों की विश्वसनीयता और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। टीवी न्यूज चैनलों, डिजिटल पोर्टल्स और वीडियो पत्रकारों के लिए इस सेल के कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेल के उद्देश्य (Objectives)
डिजिटल सुरक्षा: वीडियो पत्रकारों (Camerapersons) और रिपोर्टर्स को फील्ड पर सुरक्षा प्रदान करना।
तकनीकी सुदृढ़ीकरण: पत्रकारों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।
नैतिक पत्रकारिता: टीआरपी की दौड़ में पत्रकारिता के मूल्यों को गिरने से बचाना और “मीडिया आचार संहिता” का पालन सुनिश्चित करना।
मान्यता और कल्याण: डिजिटल न्यूज़ पोर्टल्स और सैटेलाइट चैनलों के पत्रकारों के लिए सरकारी मान्यता (Accreditation) और बीमा सुविधाओं की मांग करना।
त्वरित न्याय: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर लगाए जाने वाले त्वरित प्रतिबंधों या भेदभावपूर्ण व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना।
2. कर्तव्य (Duties)
तथ्यपरकता की जाँच: यह सुनिश्चित करना कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रसारित खबरें भ्रामक या समाज में विद्वेष फैलाने वाली न हों।
फील्ड सपोर्ट: दंगों, रैलियों या आपदा के समय कवरेज कर रहे पत्रकारों को बैकअप और सुरक्षा समन्वय प्रदान करना।
शिकायत निवारण: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कर्मियों के वेतन विसंगति या प्रबंधन द्वारा किए जा रहे शोषण के मामलों को संगठन के संज्ञान में लाना।
प्रशिक्षण कार्यशाला: पत्रकारों के लिए नियमित रूप से मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) और साइबर कानूनों पर प्रशिक्षण आयोजित करना।
जन-सरोकार: ‘मीडिया जन-सुनवाई’ के दौरान वीडियो साक्ष्यों के माध्यम से जनता की समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना।
3. अधिकार (Rights)
साक्ष्य संग्रहण: किसी भी पत्रकार के साथ हुए अन्याय की स्थिति में वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच करने का अधिकार।
प्रशासनिक हस्तक्षेप: किसी पोर्टल या चैनल के पत्रकार को कवरेज से रोके जाने पर संबंधित विभाग से जवाब मांगने और अनुमति सुनिश्चित कराने का अधिकार।
निवारण तंत्र: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पत्रकारों को मिलने वाली धमकियों या ऑनलाइन ट्रोलिंग के खिलाफ साइबर सेल के साथ मिलकर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार।
आधिकारिक प्रवक्ता: संगठन की ओर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (न्यूज डिबेट्स या इंटरव्यू) में आधिकारिक पक्ष रखने का अधिकार।
अनुशासनात्मक शक्ति: पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग या गलत वीडियो प्रसारित करने वाले सदस्यों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की अनुशंसा करना।
प्रमुख बिंदु
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सेल का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि “विजुअल मीडिया” लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी शक्ति का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज उठाने के लिए करे, न कि केवल मनोरंजन के लिए।
7-डिजिटल मीडिया सेल
डिजिटल मीडिया सेल का गठन सोशल मीडिया, न्यूज़ पोर्टल्स, ब्लॉगिंग और ‘नागरिक पत्रकारिता’ (Citizen Journalism) के बढ़ते प्रभाव को व्यवस्थित करने के लिए किया गया है। डिजिटल क्रांति के दौर में सूचनाओं की गति और सत्यता बनाए रखना इस सेल का मुख्य आधार है।
इसके कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. डिजिटल मीडिया सेल के उद्देश्य (Objectives)
सूचना की सत्यता (Fact-Checking): सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक खबरों या फेक न्यूज (Fake News) की पहचान करना और उन्हें खंडित करना।
लोकतांत्रिक सहभागिता: नागरिक पत्रकारिता (Nagrik Patrakarita) के माध्यम से आम जनता को अपनी समस्याओं को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उठाने के लिए प्रोत्साहित करना।
डिजिटल साक्षरता: पत्रकारों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमों, साइबर कानूनों और आईटी एक्ट की जानकारी देना।
ऑनलाइन सुरक्षा: डिजिटल पत्रकारों को ऑनलाइन ट्रोलिंग, मानहानि या धमकियों से सुरक्षित रखने के लिए एक सुरक्षा तंत्र (Safety Net) विकसित करना।
नीति निर्धारण: डिजिटल मीडिया को मुख्यधारा की मीडिया के समान अधिकार और सुविधाएं दिलवाने के लिए सरकार के समक्ष पैरवी करना।
2. कर्तव्य (Duties)
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग: अपने अधिकार क्षेत्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी रखना और संगठन विरोधी या पत्रकारिता की गरिमा गिराने वाली पोस्ट को रिपोर्ट करना।
त्वरित प्रतिक्रिया: किसी भी स्थानीय समस्या या घटना पर डिजिटल तरीके से जागरूकता अभियान चलाना और उसे ‘ट्रेंड’ कराना ताकि प्रशासन का ध्यान आकर्षित हो सके।
सदस्यता एवं पंजीकरण: अपने क्षेत्र के स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारों और ब्लॉगर्स को संगठन से जोड़ना और उनका डेटाबेस तैयार करना।
साइबर समन्वय: किसी भी डिजिटल पत्रकार के साथ साइबर अपराध (जैसे आईडी हैकिंग या अभद्र भाषा का प्रयोग) होने पर संबंधित साइबर पुलिस सेल के साथ समन्वय करना।
डिजिटल जन-सुनवाई: ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से ‘मीडिया जन-सुनवाई’ को लाइव प्रसारित करना और लोगों की शिकायतों को डिजिटल तरीके से दर्ज करना।
3. अधिकार (Rights)
डिजिटल मान्यता: डिजिटल पत्रकारों के लिए स्थानीय कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु डिजिटल परिचय पत्र या मान्यता पत्र जारी करने की अनुशंसा करना।
स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार: सोशल मीडिया पर संगठन या पत्रकारों की छवि खराब करने वाले तत्वों से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार।
साइबर कानूनी सहायता: साइबर हमलों या ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में पीड़ित पत्रकार को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
प्रसारण का अधिकार: संगठन की नीतियों और जनहित के कार्यों को सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक आधिकारिक रूप से पहुँचाने का अधिकार।
अनुशासनात्मक शक्ति: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले या गलत जानकारी फैलाकर संगठन का नाम बदनाम करने वाले सदस्यों को तत्काल चेतावनी देना या निलंबन की अनुशंसा करना।
प्रमुख कार्यप्रणाली (Strategy)
डिजिटल मीडिया सेल को “रिएक्टिव” के बजाय “प्रो-एक्टिव” होना चाहिए। इसमें ‘सोशल मीडिया वॉलिंटियर्स’ (SMVs) की भूमिका महत्वपूर्ण है जो हर ब्लॉक और जिले से जमीनी सच्चाई को डिजिटल माध्यमों से वायरल कर सकें।
8-किसान मजदूर फोरम (कृषि प्रभाग)
‘किसान मजदूर फोरम (कृषि प्रभाग)’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह प्रभाग कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मीडिया के माध्यम से मुख्यधारा की चर्चाओं में लाने और धरातल पर समाधान खोजने का कार्य करता है।
इसका विस्तृत रूपरेखा (कर्तव्य, अधिकार एवं उद्देश्य) नीचे दी गई है:
1. मुख्य उद्देश्य
नीतिगत वकालत: कृषि नीतियों और योजनाओं (जैसे एमएसपी, सिंचाई, बीज आपूर्ति) के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
मीडिया व पत्रकारिता का सहयोग: ग्रामीण और कृषि समस्याओं को सही परिप्रेक्ष्य में जनता और सरकार के सामने लाना, ताकि ‘ग्रामीण पत्रकारिता’ को मजबूती मिल सके।
अधिकारों की सुरक्षा: छोटे किसानों, खेतिहर मजदूरों और भूमिहीन कृषि कर्मियों के आर्थिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना।
जागरूकता प्रसार: किसानों को सरकारी लाभ, नवीन तकनीक, और कानूनी अधिकारों (विशेषकर RTI का प्रयोग) के प्रति सशक्त बनाना।
2. कर्तव्य (Duties)
समस्याओं का दस्तावेजीकरण: कृषि से संबंधित समस्याओं (जैसे फसल क्षति, खाद की कमी, ऋण जाल) का तथ्यात्मक डेटा जुटाना और उसे प्रकाशित/प्रसारित करना।
संवाद सेतु: सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और जमीनी स्तर के किसानों के बीच एक सीधा और ईमानदार संवाद स्थापित करना।
जन-सुनवाई का संचालन: हर महीने आयोजित होने वाली ‘मीडिया जन-सुनवाई’ में कृषि संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता के साथ शामिल करना और उनके निराकरण हेतु संबंधित विभाग को ज्ञापन देना।
सशक्तीकरण: किसान और मजदूर यूनियनों को संगठित करने में सहयोग करना और उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करना सिखाना।
3. अधिकार (Rights)
निरीक्षण व सत्यापन: क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन (जैसे सरकारी गोदाम, अनाज खरीद केंद्र) का निरीक्षण करना और विसंगतियों को सार्वजनिक करना।
सूचना का अधिकार (RTI): कृषि प्रभाग के पास यह अधिकार है कि वह कृषि बजट, योजनाओं के आवंटन और खर्च की जानकारी प्राप्त करने के लिए RTI का प्रयोग करे।
प्रतिनिधित्व: जिला और राज्य स्तरीय प्रशासनिक बैठकों में किसान और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में अपनी बात रखना और नीति-निर्माण में सुझाव देना।
मध्यस्थता: फसल मुआवजे, बीमा दावों या भुगतान संबंधी विवादों में स्थानीय स्तर पर मध्यस्थता (Mediation) करना और पीड़ित किसानों को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करना।
कार्यप्रणाली के लिए दिशा-निर्देश:
यह फोरम पूरी तरह से ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ के अनुशासनात्मक और नैतिक नियमों से बंधा है। इसका मूल मंत्र “सूचना से समाधान” है।
नोट: यह फोरम किसी भी राजनीतिक दल से ऊपर उठकर केवल किसान और मजदूर की आवाज बनने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी जिला इकाइयों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपनी रिपोर्ट ऊपर दी गई आधिकारिक हेल्पलाइन (7275850466/8176850466) के समन्वय में ही प्रेषित करें।
9- परिवहन फोरम
1. मुख्य उद्देश्य
यातायात सुरक्षा और सुविधा: सार्वजनिक और निजी परिवहन में सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना और यात्रियों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ उठाना।
परिवहन कर्मियों का सम्मान: ड्राइवर, कंडक्टर, मैकेनिक और अन्य परिवहन कर्मियों के कार्य करने की परिस्थितियों में सुधार और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना।
भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली: आरटीओ (RTO), चेक पोस्ट और टोल प्लाजा पर होने वाले अवैध वसूली व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना।
सड़क सुरक्षा व जागरूकता: दुर्घटनाओं को कम करने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाना और सड़क सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना।
2. कर्तव्य (Duties)
निगरानी और रिपोर्टिंग: परिवहन क्षेत्र में सरकारी नियमों के उल्लंघन (जैसे ओवरलोडिंग, बिना परमिट संचालन, या अवैध वसूली) की रिपोर्ट तैयार करना।
यात्री शिकायत निवारण: यात्रा के दौरान होने वाली असुविधाओं, मनमाने किराए, और दुर्व्यवहार की शिकायतों को उचित सरकारी मंचों तक पहुँचाना।
सड़क सुरक्षा अभियान: फाउंडेशन की जिला इकाइयों के माध्यम से सड़क सुरक्षा सप्ताह और यातायात नियमों के प्रति प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना।
परिवहन कर्मियों का डेटाबेस: संगठित और असंगठित परिवहन कर्मियों का डेटाबेस तैयार कर उनके बीमा और कल्याणकारी योजनाओं में सहयोग करना।
3. अधिकार (Rights)
सूचना का अधिकार (RTI): परिवहन विभाग से सड़क निर्माण, टोल टैक्स के उपयोग, आरटीओ राजस्व और सड़क सुरक्षा फंड के खर्च का विवरण मांगने का अधिकार।
निरीक्षण (Inspection): सार्वजनिक परिवहन अड्डों (बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के बाहर) पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता की जांच करना।
परामर्श व मध्यस्थता: परिवहन व्यवसायी, यूनियन और प्रशासन के बीच उपजे विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाना।
प्रशासनिक हस्तक्षेप: किसी भी बड़ी अनियमितता या सड़क सुरक्षा से जुड़ी गंभीर लापरवाही की स्थिति में संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपना और कानूनी कार्यवाही की मांग करना।
कार्यान्वयन हेतु महत्वपूर्ण निर्देश:
परिवहन फोरम को यह निर्देश दिया जाता है कि:
किसी भी प्रकार की स्थानीय कार्रवाई फाउंडेशन के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही की जाए।
विवादों के निपटारे हेतु केवल फाउंडेशन द्वारा अधिकृत हेल्पलाइन नंबरों (7275850466 और 8176850466) का उपयोग किया जाए।
स्थानीय स्तर पर किसी भी शिकायत को दर्ज करने से पहले उसकी सत्यता और साक्ष्य (Photos/Videos/Documents) अवश्य जुटाएं।
10-चिकित्सा फोरम
11-उद्योग फोरम
12-शिक्षा फोरम
13-सैनिक फोरम
14-दिव्यांग फोरम
15-सांस्कृतिक फोरम
16-आरटीआई सेल
आरटीआई सेल (RTI Cell) का गठन प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के निर्माण के लिए किया गया है। आरटीआई (सूचना का अधिकार) अधिनियम, 2005 के माध्यम से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना इस सेल का मुख्य कार्य है।
इसके कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. आरटीआई सेल के उद्देश्य (Objectives)
पारदर्शिता सुनिश्चित करना: सरकारी विभागों के कार्यों, बजट खर्च और निर्णयों में पारदर्शिता लाना।
भ्रष्टाचार पर प्रहार: भ्रष्ट गतिविधियों और अनियमितताओं को साक्ष्यों (Documents) के माध्यम से उजागर करना।
जन-सशक्तिकरण: आम नागरिकों को आरटीआई के उपयोग के प्रति जागरूक करना ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें।
शासन का सुधार: आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी से सरकारी नीतियों और कार्यों में सुधार के लिए दबाव बनाना।
2. कर्तव्य (Duties)
आवेदन ड्राफ्टिंग: पत्रकारों और आम जनता को आरटीआई आवेदन (RTI Application) लिखने और उसे सही विभाग में जमा करने में सहायता करना।
फॉलो-अप और अपील: समय सीमा के भीतर सूचना न मिलने पर प्रथम अपील (First Appeal) और आवश्यकता पड़ने पर राज्य/केंद्रीय सूचना आयोग में दूसरी अपील (Second Appeal) तैयार करना।
डाटा विश्लेषण: विभिन्न सरकारी विभागों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करना और उसे ‘जनहित’ में समाचारों या रिपोर्टों के रूप में प्रकाशित करना।
प्रशिक्षण: संगठन के सदस्यों और आम लोगों के लिए आरटीआई कार्यशालाएं आयोजित करना।
रिकॉर्ड प्रबंधन: प्राप्त जानकारी का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना ताकि भविष्य में इसका उपयोग सबूत के तौर पर किया जा सके।
3. अधिकार (Rights)
सूचना मांगना: किसी भी सरकारी कार्यालय से (सुरक्षा और गोपनीयता की शर्तों के अधीन) रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग्स और खर्चों का विवरण मांगने का अधिकार।
निरीक्षण का अधिकार: सरकारी कार्यों या रिकॉर्ड का भौतिक निरीक्षण (Inspection) करने का अधिकार।
सत्यापन अधिकार: सूचना के बदले में दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां (Certified Copies) प्राप्त करने का अधिकार।
कानूनी प्रतिनिधित्व: आरटीआई आवेदकों/पत्रकारों को सूचना न मिलने या गलत सूचना मिलने पर आधिकारिक तौर पर संगठन के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब-तलब करने का अधिकार।
परामर्श का अधिकार: प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय कर आरटीआई मामलों में लंबित जनहित के कार्यों को सुलझाने का अधिकार।
प्रमुख कार्यप्रणाली (Strategy)
आरटीआई सेल को केवल आवेदन दायर करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे “एविडेंस-बेस्ड जर्नलिज्म” का आधार बनाना चाहिए। प्राप्त सूचनाओं को समाचार के रूप में ‘दैनिक जनसंपर्क भारत’ और अन्य प्लेटफार्मों पर प्रमुखता से प्रकाशित करना ही इस सेल की वास्तविक सफलता है।
नोट: आरटीआई सेल के सदस्यों को यह ध्यान रखना चाहिए कि आरटीआई का प्रयोग केवल जनहित में किया जाए। किसी भी व्यक्तिगत प्रतिशोध या गलत इरादे से आरटीआई का उपयोग संगठन की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।
17-आईटी सेल
इसके कर्तव्य, अधिकार और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. आईटी सेल के उद्देश्य (Objectives)
डिजिटल बुनियादी ढांचा (Infrastructure): संगठन की वेबसाइट, सर्वर और आंतरिक नेटवर्क को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित करना।
डेटा प्रबंधन: सदस्यता रिकॉर्ड, समाचार डेटाबेस और प्रशासनिक दस्तावेजों का सुरक्षित डिजिटलीकरण और भंडारण।
तकनीकी स्वचालन (Automation): संगठन के कार्यों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना ताकि समय की बचत और कार्यक्षमता में वृद्धि हो।
साइबर सुरक्षा: संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और संवेदनशील डेटा को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना।
डिजिटल एकीकरण: मीडिया सेल्स (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल) के बीच तकनीकी समन्वय स्थापित करना।
2. कर्तव्य (Duties)
प्लेटफॉर्म प्रबंधन: संगठन की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन और सोशल मीडिया हैंडल्स का तकनीकी रखरखाव।
तकनीकी सहायता: संगठन के विभिन्न स्तरों (राज्य/जिला) के संयोजकों को तकनीकी प्लेटफॉर्म के उपयोग में सहायता देना।
डेटा सुरक्षा और बैकअप: नियमित अंतराल पर महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डेटा का क्लाउड बैकअप लेना।
सॉफ्टवेयर अपडेट: संगठन की आंतरिक कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक आधुनिक सॉफ्टवेयर और टूल्स को अपडेट और प्रबंधित करना।
साइबर निगरानी: संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और संगठन की डिजिटल संपत्ति पर होने वाले किसी भी प्रकार के अनधिकृत प्रयास को रोकना।
3. अधिकार (Rights)
तकनीकी अनुपालन: संगठन के किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा मानकों (Security Protocols) को लागू करने का अधिकार।
पहुँच नियंत्रण (Access Control): डेटा की संवेदनशीलता के आधार पर संबंधित अधिकारियों को लॉग-इन और डेटा एक्सेस की अनुमति देना।
डिजिटल ऑडिट: किसी भी विभागीय डिजिटल गतिविधि का तकनीकी ऑडिट करने और सुरक्षा खामियों की रिपोर्ट करने का अधिकार।
आपातकालीन कार्रवाई: साइबर हमले या तकनीकी खराबी की स्थिति में त्वरित प्रभाव से संबंधित सिस्टम को आइसोलेट या लॉक करने का अधिकार।
तकनीकी नीति निर्धारण: संगठन के लिए नई तकनीकी नीतियों, हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर की खरीद और डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार।
प्रमुख कार्यप्रणाली (Strategy)
आईटी सेल का मंत्र है—”सुरक्षित, तीव्र और सुलभ” (Secure, Speedy, and Accessible)। यह सेल सुनिश्चित करेगा कि आपके द्वारा लिए गए निर्णय और संगठन के दस्तावेज तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रहें।
18-प्रकाशन एवं क्लाउड मीडिया सेल—
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का एक अत्यंत आधुनिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ विभागीय प्रकोष्ठ हैं। जो डिजिटल युग में डेटा की सुरक्षा और उसका व्यवस्थित प्रबंधन ही किसी भी बड़े मीडिया संगठन की असली ताकत होती है।
नीचे इस विभागीय प्रकोष्ठ के कर्तव्य, उद्देश्य और अधिकारों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. मुख्य उद्देश्य (Objectives)
डेटा का डिजिटलीकरण: संगठन के सभी पुराने और नए अखबारों, समाचारों और वीडियो रिपोर्ट को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित करना।
अक्षय आर्काइव:एक ऐसा “डिजिटल पुस्तकालय” बनाना जहाँ 10-20 साल बाद भी किसी खबर या वीडियो को एक क्लिक पर खोजा जा सके।
सूचना सुरक्षा:संगठन के संवेदनशील डेटा, दस्तावेजों और पत्रकारिता से जुड़े साक्ष्यों को साइबर हमलों या तकनीकी खराबी से बचाना।
त्वरित उपलब्धता: फील्ड में काम कर रहे पत्रकारों और संपादकों को क्लाउड के माध्यम से आवश्यक डेटा तुरंत उपलब्ध कराना।
2. प्रमुख कर्तव्य (Duties)
डेटा बैकअप प्रबंधन: प्रतिदिन प्रकाशित होने वाले ई-पेपर, वेब पोर्टल की खबरों और यूट्यूब वीडियो का सुरक्षित क्लाउड बैकअप लेना।
वर्गीकरण (Categorization): सूचनाओं को जिलेवार, विषयवार (जैसे- भ्रष्टाचार, विकास, सामाजिक मुद्दे) और तिथि के अनुसार व्यवस्थित करना।
डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन: संगठन के ऐतिहासिक निर्णयों, फोटोग्राफ्स और महत्वपूर्ण वीडियो साक्षात्कारों का एक मास्टर संग्रह बनाना।
तकनीकी सुरक्षा ऑडिट: समय-समय पर यह सुनिश्चित करना कि संगठन का डिजिटल डेटा एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित है।
पहुँच नियंत्रण (Access Control):यह तय करना कि संगठन का कौन सा डेटा किस स्तर के पदाधिकारी या पत्रकार द्वारा देखा या डाउनलोड किया जा सकता है।
3. अधिकार (Powers & Rights)
डेटा अधिग्रहण का अधिकार: यह प्रकोष्ठ संगठन के किसी भी विभाग (अखबार, यूट्यूब चैनल, सोशल मीडिया टीम) से आर्काइव हेतु सामग्री मांग सकता है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना: डिजिटल सुरक्षा के लिए नए नियम बनाने और सभी सदस्यों द्वारा उनका पालन सुनिश्चित करवाने का अधिकार।
तकनीकी निरीक्षण: संगठन द्वारा उपयोग किए जा रहे डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और सर्वर की जांच करने का अधिकार।
डेटा शुद्धिकरण: अनावश्यक या भ्रामक डेटा को आर्काइव से हटाने या उसे अपडेट करने का निर्णय लेने का अधिकार।
प्रमाणीकरण: किसी पुरानी खबर या वीडियो की सत्यता की पुष्टि (Fact-Check) करने के लिए आर्काइव डेटा के आधार पर आधिकारिक रिपोर्ट देने का अधिकार।
यह विभाग आपके संगठन को कैसे लाभ पहुँचाएगा।
वर्तमान में अधिकांश मीडिया संस्थान अपना डेटा खो देते हैं या उसे खोजने में घंटों बर्बाद करते हैं। प्रकाशन एवं क्लाउड मीडिया सेल होने से भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी एक “पेपरलेस” और “हाई-टेक” संगठन बनेगा।
उदाहरण के लिए, यदि 2026 में आपको 2020 की किसी आरटीआई (RTI) रिपोर्ट की आवश्यकता पड़ती है, तो यह सेल उसे चंद सेकंड में आपके मोबाइल पर उपलब्ध करा देगा। यह आपकी “मीडिया सरकार”*और*”मिशन प्रेस” की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
19-सोशल मीडिया सेल
20- BMF News Network
21-निर्मल राष्ट्र (हिंदी समाचार पत्र)
22–भारतीय मीडिया आज तक न्यूज़ ।
23-सिटी टू विलेज (हिंदी समाचार पत्र)
आगे आवश्यकता अनुसार प्रकोष्ठ का गठन करने का प्रावधान है। जिससे सभी विभागों के प्रति पत्रकारिता की पकड़ बनाई जा सके। संगठन की ओर से समस्त सरकारी विभागों के देखने के लिए विभाग वार समितियों का गठन किया जाएगा।। (आवश्यक सूचना- यह जो आपके सामने फाइल प्रस्तुत किया गया है इसमें अभी 56 उद्देश्य को ऐड नहीं किया गया है जो संस्था का उद्देश्य है जो आवश्यकता अनुसार फाइल आपके सामने प्रस्तुत की जाएगी यह जानकारी मात्र के लिए कुछ अंश प्रस्तुत किया गया है)
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के अधिकार सम्मान सुरक्षा एवं संवैधानिक अधिकारों को दिलाने के साथ-साथ नागरिक पत्रकारिता के लिए दृढ़ संकल्पित है। उपरोक्त विषय को ध्यान में रखते हुए भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर उसंगठन (नेशनल)की मजबूती के लिए जीरो ग्राउंड से पुनर्गठन का कार्यक्रम चला रही है जिसमें संघर्षशील, कर्मठ, निडर एवं निष्पक्ष व पारदर्शी पत्रकारिता करने वाले साथियों को राष्ट्रीय कमेटी में शामिल करने का निर्णय लिया है। जो भी साथी संगठन के मुख्य नेतृत्व में आकर इस महत्वपूर्ण महाक्रांति में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं उन्हें भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी अवसर प्रदान कर रहा है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी का राष्ट्रीय मीडिया अधिकारी बनने के लिए आप तत्काल संपर्क कर सकते हैं।
केंद्रीय कार्यालय-
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