त्वरित तिकनिब;:आईसीसी की प्राथमिक जिम्मेदारी: खेल भावना की रक्षाक्रिकेट केवल प्रतिस्पर्धा का नाम नहीं, बल्कि यह खेल भावना और जेंटलमैन गेम का पर्याय है。 शंकर देव तिवारी

त्वरित तिकनिब;:आईसीसी की प्राथमिक जिम्मेदारी: खेल भावना की रक्षाक्रिकेट केवल प्रतिस्पर्धा का नाम नहीं, बल्कि यह खेल भावना और जेंटलमैन गेम का पर्याय है。

शंकर देव तिवारी

15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह से अपनी शानदार बल्लेबाजी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई है, वह विश्व क्रिकेट के लिए एक अमूल्य संपत्ति हैं。अगर कोई गेंदबाज किसी युवा बल्लेबाज को डराने या चोट पहुंचाने के इरादे से खतरनाक बाउंसर (जैसे कि गर्दन या सिर के आसपास की गेंदें) फेंकता है, तो यह क्रिकेट के नियमों और खेल भावना के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना जाता है。आईसीसी को अपनी आचार संहिता का उपयोग करते हुए ऐसे बॉलर्स और कप्तानों पर सख्त प्रतिबंध लगाना चाहिए。फाइनल के बाद का व्यवहार: अनुशासनहीनता पर लगामएक बड़े फाइनल मुकाबले की हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन मैच हारने के बाद विपक्षी टीम के खिलाड़ियों द्वारा किया गया आक्रामक और भड़काऊ व्यवहार अस्वीकार्य है。विश्व स्तर पर लाखों युवा खिलाड़ी इस खेल को देखते और सीखते हैं。यदि आईसीसी ऐसे अनुशासनहीन कृत्यों पर कड़ा संज्ञान नहीं लेती है, तो यह भविष्य के खिलाड़ियों के लिए एक गलत उदाहरण सेट करेगा। आईसीसी को मैच रेफरी की रिपोर्ट के आधार पर दोषी खिलाड़ियों पर भारी जुर्माना और बैन लगाने जैसे सख्त कदम उठाने होंगे।भविष्य के लिए एक कड़ा संदेशयह समय न केवल युवा खिलाड़ियों को तकनीकी तौर पर परखने का है, बल्कि मैदान पर उनके मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का भी है。आईसीसी को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश देना होगा कि मैदान पर कोई भी खिलाड़ी, चाहे वह किसी भी टीम या फ्रेंचाइजी का हो, खेल की गरिमा को नुकसान नहीं पहुंचा सकता。यदि आईसीसी इन मामलों में संवेदनशीलता और सख्ती नहीं दिखाती है, तो विश्व क्रिकेट के सबसे उज्ज्वल सिता

 

वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा और असाधारण प्रतिभाशाली खिलाड़ी को घातक बाउंसर का निशाना बनाने तथा फाइनल मैच के बाद गुजरात टाइटंस के खिलाड़ियों द्वारा की गई आपत्तिजनक हरकतों के मामले में आईसीसी से कड़ी कार्रवाई की पूरी उम्मीद है。इस तरह के आक्रामक व्यवहार खेल भावना के विपरीत हैं और एक युवा क्रिकेटर के करियर को खतरे में डाल सकते हैं。

 

शंकर देव तिवारी

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