मिर्जापुर: तालाब की भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा और प्रशासन की मौन सहमति – एक गंभीर सवाल।

मिर्जापुर: तालाब की भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा और प्रशासन की मौन सहमति – एक गंभीर सवाल।

नई दिल्ली कार्यालय से सिम्मी भट्टी की खास रिपोर्ट।

मिर्जापुर जनपद के चुनार तहसील अंतर्गत ग्राम सभा विशेश्वरपुर माफी में तालाब की सार्वजनिक भूमि पर दबंगों द्वारा किया जा रहा कब्जा न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और जनहित के विरुद्ध एक संगठित अपराध भी है। आराजी संख्या 620 और 323 (तालाब) जैसी सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जा और उस पर जालसाजी से अपना नाम दर्ज कराना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के प्रावधानों का खुला मखौल है।
कानूनी विसंगतियां: प्रशासन के सामने दो गंभीर सवाल-
जनमानस और न्यायप्रिय नागरिकों के मन में उठ रहे ये दो प्रश्न प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करते हैं:
जवाबदेही का अभाव: तालाब की भूमि जो खतौनी में स्पष्ट रूप से ‘तालाब’ के रूप में दर्ज है, उस पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ अब तक उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (धारा 67) के तहत सख्त बेदखली और अर्थदंड की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
अवैध नामांतरण का सच: यदि भूमि अभिलेखों में तालाब दर्ज है, तो किस अधिकारी ने, किस आधार पर और किस धारा के अंतर्गत इसे निजी नाम पर दर्ज करने की अनुमति दी? यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला है, जिसकी जांच अनिवार्य है।
दबंगई और कानून का दुरुपयोग: एक सामाजिक चिंता,
अतिक्रमणकारियों द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) का भय दिखाकर धमकाना कानून का दुरुपयोग करने की साजिश है। यह स्पष्ट करता है कि अतिक्रमणकारी न केवल भूमि कब्जाने के अपराधी हैं, बल्कि समाज में भय का वातावरण बनाने वाले अराजक तत्व भी हैं।

बीएमएफ (BMF) नेशनल कोर कमेटी की आरटीआई सेल का कड़ा रुख,
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएमएफ नेशनल कोर कमेटी की आरटीआई सेल ने इसे संज्ञान में लिया है। यूनियन के आरटीआई सेल के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव सुमित कुमार ने इसे भू-माफियाओं के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध का शंखनाद बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केवल विशेश्वरपुर माफी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र में ग्राम समाज की संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
हमारी मांग और भविष्य की राह-
ग्राम सभा के हित में निम्नलिखित कदम उठाए जाने अत्यंत आवश्यक हैं:
1. उच्च स्तरीय एसआईटी जांच:संपूर्ण मामले की जांच जिलाधिकारी स्तर से ऊपर के अधिकारियों की समिति द्वारा कराई जाए, ताकि तहसील चुनार के दोषी अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ सके।
2. तालाब का जीर्णोद्धार: अवैध कब्जा हटवाने के उपरांत तालाब की खुदाई और सफाई कराई जाए ताकि जल संचयन सुनिश्चित हो सके।
3. सार्वजनिक उपयोग: अतिक्रमण मुक्त हुई अन्य सरकारी जमीनों पर खेल का मैदान, बारात घर और गौशाला का निर्माण कर उन्हें ग्रामीणों को सुपुर्द किया जाए।
4. दंडात्मक कार्रवाई: सरकारी भूमि को कब्जाने वाले भू-माफियाओं पर गुंडा एक्ट और एनएसए (NSA) के तहत कार्रवाई हो।
अब समय आ गया है कि प्रशासन अपनी चुप्पी तोड़े। क्या माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी का ‘बुलडोजर’ और ‘भू-माफिया विरोधी अभियान’ विशेश्वरपुर माफी की इस सच्चाई को देख पाएगा? ग्रामीण जनता और जागरूक संगठन अब और अधिक देरी सहन करने के मूड में नहीं हैं। न्याय की उम्मीद में सभी की नजरें अब मिर्जापुर जिला प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
आरटीआई सेल के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव ने कहा कि यूनियन के हाई कमान के आदेश पर सभी बिंदुओं पर आरटीआई के तहत सूचना मांगी जाएगी।
उन्होंने कहा कि हम अपने अगले संस्करण में उन माफियाओं के नाम का भी खुलासा करेंगे जिन्होंने अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है अभी हमारी टीम गहनता से जांच कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि जांच उपरांत भू-माफियाओं के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र भी पुलिस प्रशासन को सौंपा जाएगा।
यूनियन की आधिकारिक निर्देश पर ग्रामीणों के बीच जाकर पूछताछ एवं जांच पड़ताल किया जाएगा एवं ग्राम प्रधान से भी मुलाकात की जाएगी पूरे गांव के आराजी का विवरण मांगा जाएगा।

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