भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने चुराई जनता की 6,000 यूनिट बिजली!

*भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने चुराई जनता की 6,000 यूनिट बिजली!*

*पुरानी ₹30-100 की सिक्योरिटी को आज ₹2,000-15,000 में बदलकर नंगी लूट*

 

 

*लखनऊ*, – *उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर नंगी लूट का सबसे बड़ा घोटाला सामने आ गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पंकज कुमार के एक आदेश पर पूरा बिजली विभाग* *नियम-कानून, UPERC और उपभोक्ता अधिकारों को कुचलते हुए पुराने कनेक्शन वाले लाखों गरीब-मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं की जेबें काट रहा है।*

*1974 vs 2026 – सिक्योरिटी डिपॉजिट की बर्बर तुलना*

*1974-70 के दशक में UPSEB के जमाने में घरेलू कनेक्शन (1-2 kW) पर कोई per kW फिक्स्ड सिक्योरिटी नहीं थी। मात्र ₹25 से ₹100 (ज्यादातर ₹30 से ₹50) की नाममात्र जमानत ली जाती थी।* *तब बिजली का टैरिफ *सिर्फ 5-6 पैसे प्रति यूनिट था।*

*उस समय की सुरक्षा* *(1974)*

*₹30 जमा करने पर* → *500 से 600 यूनिट बिजली की सुरक्षा*

*₹50 जमा करने पर → 800 से 1,000 यूनिट बिजली की सुरक्षा*

*₹100 जमा करने पर → 1,600 से 2,000 यूनिट बिजली की सुरक्षा*

*आज 2026 में उसी पुरानी राशि से क्या मिलता है (टैरिफ ₹6-7 प्रति यूनिट*):

*₹30* → *मात्र 4 से 5 यूनिट*

*₹50*→ *मात्र 7 से 8 यूनिट*

*₹100 → मात्र 14 से 17 यूनिट*

*यानी 100 से 140 गुना मूल्य* *घट गया है*। *औसत पुराने उपभोक्ता (जिनकी सिक्योरिटी ₹300-350 के आसपास थी)* *के मामले में करीब 5,000 से 6,000 यूनिट बिजली की सुरक्षा चोरी हो चुकी है।*

*फिर भी UPPCL अब इन पुराने कनेक्शनों पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर से पोस्टपेड स्विच करते समय पुरानी जमा राशि को 4 किस्तों में बिल में जोड़ने का खेल खेल रहा है। नई सिक्योरिटी ₹2,000 से ₹15,000+ तक जबरन थोप दी जा रही है*।

दूसरे राज्यों में फ्री बिजली, UP में भारतीय प्रशासनिक सेवा की बेरहम लूट!

तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब में सरकारें 200 यूनिट बिजली फ्री दे रही हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने बिजली विभाग को जनता का खून चूसने वाली मशीन बना दिया है।

*भारतीय प्रशासनिक सेवा vs इंजीनियर* – *बिजली* *विभाग की हत्या की साज़िश*

*जब इंजीनियर अधिकारी* *विभाग चलाते थे तो उन्हें तकनीकी ज्ञान और मैदानी अनुभव होता था*। लेकिन अब बिना इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनमानी फरमान जारी कर रहे हैं। *एक कलम के झटके में 52 साल पुरानी ₹30-100 की सिक्योरिटी को हजारों रुपये में बदल दिया जाता है*। *पूरा विभाग इनके इशारे पर गुलामों की तरह नतमस्तक हो जाता है*।

*क्या है पूरा खेल?*

*6 मई 2026 का मूल आदेश और 7 मई का संशोधन* — *दोनों में यही भारतीय प्रशासनिक सेवा की मनमानी लूट साफ दिखाई देती है। RMS सिस्टम के जरिए बिना नोटिस-बिना सुनवाई के ऑटोमैटिक वसूली शुरू कर दी गई*। *सभी डिस्कॉम भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कब्जे में हैं।

जनता का आक्रोश फूट पड़ा

*लखनऊ, *कानपुर*, *वाराणसी*, *गोरखपुर*, *आगरा*, *मेरठ समेत* *पूरे UP में लोग सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। उपभोक्ता चीख रहे हैं* –

*“1974 में मात्र ₹30-100 जमा किए थे, उससे 500 से 2,000 यूनिट बिजली की सुरक्षा थी। आज उसी पैसे में 4-17 यूनिट भी नहीं आती। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने हमारी 6,000 यूनिट चुरा ली और *अब हजारों रुपये जबरन वसूल रहे हैं*! *ये जुल्म कब तक*?”

*चुनावी तबाही यह घोटाला आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल की कब्र खोद सकता है*। *विपक्ष “भारतीय प्रशासनिक सेवा का* लूट राज” और “बिजली घोटाला” का तूफान मचा रहा है। उपभोक्ता संगठन, किसान और बिजली कर्मचारी यूनियनों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दे दी है।

जनता अब खुलकर पूछ रही है –

क्या बिजली विभाग भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का निजी साम्राज्य बन गया है? क्या 6,000 यूनिट प्रति उपभोक्ता की यह लूट चुनाव से पहले रुकेगी या दबा दी जाएगी? खैर

*युद्ध अभी शेष है*

*अविजित आनन्द*

*संपादक*

*चन्द्रशेखर सिंह*

*प्रबंध संपादक*

*समय का उपभोक्ता* – *राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ*

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