अपनी बात
अपना तेरा करना गलत
शंकर देव तिवारी
सड़कों पर सड़ता कूड़ा और जलजमाव प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। जब जनस्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा हो, तब कागजी कार्रवाइयों और विभागों के बीच तालमेल की कमी का बहाना बनाना अक्षम्य है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय प्रशासन, विशेषकर नगर इकाई, त्वरित कार्यवाही करे और संक्रामक रोगों के फैलने से पहले सड़कों को स्वच्छ बनाए। स्वच्छता ही संक्रामक रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
शहरों और कस्बों की सड़कों पर जमा होता गंदा पानी और कूड़े के ढेरों से उठती दुर्गंध अब केवल बदबू नहीं, बल्कि महामारी का निमंत्रण बन चुकी है। गंदे पानी में बैक्टीरिया और मच्छरों के पनपने से मलेरिया, डेंगू, डायरिया और चर्म रोग जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की प्रबल संभावना है। जब शहर की मुख्य या उप-सड़कें ही बीमारियों का हॉटस्पॉट बन जाएं, तो यह सवाल बेहद प्रासंगिक हो जाता है कि क्या इसके लिए किसी विभाग से अनुमति या अनापत्ति पत्र (NOC) लेने की जरूरत है।
नगर निगम, नगर पालिका या ग्राम पंचायत के सफाई कर्मी स्थानीय निकायों के कर्मचारी हैं, जिनका प्राथमिक कर्तव्य सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और नालियों की सफाई करना है। यह उनका वैधानिक दायित्व है, न कि कोई एहसान। सड़कों पर कचरा निस्तारण, जलभराव की निकासी, फॉगिंग और कीटनाशकों का छिड़काव नगर निकाय की अनिवार्य सेवाओं में आता है। इसके लिए किसी विशेष NOC की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि सफाई अभियान का उद्देश्य स्वास्थ्य और जन-सुरक्षा (Public Health & Safety) है, जो सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अक्सर देखा जाता है कि एक विभाग (जैसे लोक निर्माण विभाग – PWD) और दूसरे विभाग (जैसे नगर निगम) के बीच तालमेल की कमी के कारण सफाई बाधित होती है। यदि सड़क PWD की है, तो नगर निगम के कर्मचारी वहां सफाई करने में संकोच करते हैं या अनुमति का बहाना बनाते हैं। हालांकि, के अनुसार, कोई भी विभाग अपनी सीमा में सफाई से बच नहीं सकता। यदि सड़क पर गंदा पानी जमा है, तो वह एक “कंटक” (Nuisance) है, जिसे हटाने के लिए के तहत कोई भी जिम्मेदार अधिकारी (District Magistrate, SDM) त्वरित कार्रवाई का आदेश दे सकता है।
क्या करें नागरिक?
शिकायत दर्ज करें: सबसे पहले अपने क्षेत्र के नगर निगम/पालिका के स्वास्थ्य अधिकारी या “स्वच्छ भारत मिशन” के पोर्टल पर फोटो के साथ शिकायत दर्ज करें।
जिला प्रशासन से शिकायत: यदि निगम नहीं सुनता, तो आप दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) के पास ‘लोक कंटक’ जन हित की शिकायत कर सकते हैं।
सोशल मीडिया: के अनुसार, नगर निगम के सोशल मीडिया हैंडल पर समस्या की फोटो पोस्ट करें।
(इन बॉक्स में
फोटो सहित लगाएं )
#तहसील_के_माथे_पर_धब्बा
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इस रस्ते को लेकर मैंने कुछ दिन पूर्व एक पोस्ट लिखी थी.. जिसके बारे में कुछ जगह से जबाव मिले मुझे.. पहला #तहसीलदार साहब से जनगणना के सम्बन्ध में मिलने पर.. चर्चा के दौरान पता चला.. प्रशासन खुद परेशान है.. मगर हल उनके पास नहीं अन्य जगह है.. #नगर_पालिका_परिषद_बाह ने बताया कि वैसे तो ये काम हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है फिर भी अगर ग्राम पंचायत बिजौली और तहसील विभाग हमें एन ओ सी दे दे तो हम इस रास्ते को दुरुस्त करा सकते हैं। सब्जी मंडी में अशोक नगर वाले रास्ते के काम को किसी वकील साहब ने अटका दिया है अन्यथा वह मार्ग भी पक्का हो गया होता।
तो मामला ग्राम पंचायत बिजौली पर अटका है वो चाहें तो ये काम करा सकते हैं अभी तो ट्रिपल इंजन सरकार है.. इस बारे में ग्राम प्रधान ही सही बता सकते हैं।
वैसे ग्राम प्रधान विनोद सिंह वोद्धा जी सुलझे हुए इंसान हैं।
आशा मेरी बात उन तक पहुंचेगी तो इस पर अवश्य विचार करेंगे।
सबकी चाह यही है अपना नगर, सुरक्षित सुन्दर हो।
बदसूरत धब्बे मिट जाएं, भव्य स्वच्छता घर घर हो।
विनोद साँवरिया






