मिरजापुर पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 100 घंटे के भीतर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश; साजिश में शामिल महिला समेत 6 अभियुक्त गिरफ्तार, फिर जमानत।
रिपोर्ट- एके बिंदुसार संस्थापक भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) कोर कमेटी की कलम से————————-
पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’ और साजिश का पर्दाफाश खाकी को चुनौती देने वाली महिला पत्रकार की ‘खतरनाक पटकथा’ का खुलासा।
वाराणसी डिविजन उत्तर प्रदेश।
मिर्जापुर के अदलहाट और चुनार क्षेत्र में पिछले चार दिनों से जिस कथित अपहरण ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा रखी थी, उसका अंत एक चौंकाने वाले खुलासे के साथ हुआ। पुलिस ने जिसे ‘अपराध’ समझा था, वह असल में एक सोची-समझी ‘साजिश’ निकली, जिसकी सूत्रधार खुद कथित पीड़िता ही थी।
1. घटना की पृष्ठभूमि (06 मई से 09 मई तक)
चुनार के दीक्षितपुर निवासी सरिता सिंह पटेल (यू-ट्यूबर व पत्रकार) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया है। चार दिनों तक लापता रहने के बाद जब वह मिलीं, तो उन्होंने पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए और खुद को बंधक बनाए जाने की कहानी सुनाई। इस सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में धारा 140(3) BNS के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।
2. 100 घंटे की जांच और डिजिटल साक्ष्यों का जाल
पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना अदलहाट, SOG और सर्विलांस की संयुक्त टीम को लगाया। जांच के दौरान पुलिस को सरिता के बयानों में विरोधाभास मिला। जब डिजिटल फुटप्रिंट्स और मोबाइल लोकेशन की जांच की गई, तो परतें खुलनी शुरू हुईं:
लोकेशन: कथित अपहरण के दौरान पीड़िता की लोकेशन उन जगहों पर मिली जहाँ वह स्वेच्छा से गई थी।
सहयोगी की भूमिका: अमरदीप नामक व्यक्ति के साथ सरिता के निरंतर संपर्क और मोटरसाइकिल से आवाजाही के प्रमाण मिले।
3. पुलिस की थ्योरी: क्यों रची गई साजिश?
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दावा किया कि सरिता पटेल चुनार पुलिस द्वारा पूर्व में की गई कुछ कार्यवाहियों से नाराज थी। वह पुलिस पर दबाव बनाकर अपनी बात मनवाना चाहती थी और इस सनसनीखेज मामले के जरिए नाजायज धन उगाही की फिराक में थी।
4. ‘प्लान-बी’: रोंगटे खड़े कर देने वाला ड्रामा
पूछताछ में सामने आया कि घटना को असली दिखाने के लिए सरिता ने अमरदीप की मदद से अपने ही हाथ-पैर बंधवाए। हद तो तब हो गई जब मामले को और अधिक ‘खतरनाक’ दिखाने के लिए मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकालकर शरीर पर छिड़कने की योजना बनाई गई, ताकि पुलिस बैकफुट पर आ जाए।
अदालती कार्यवाही और शाम को मिली ‘राहत’
कोर्ट में पुलिस की थ्योरी को लगा झटका, सभी आरोपी रिहा
विशेष घटनाक्रम:
जहाँ दोपहर तक पुलिस अपनी सफलता के गुणगान कर रही थी, वहीं शाम होते-होते अदालत के एक फैसले ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।
न्यायालय में पेशी और गंभीर धाराएं,
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की अत्यंत कठोर धाराएं (जैसे धारा 61(2) आपराधिक साजिश, 308(6) जबरन वसूली, 224 लोक सेवक को गुमराह करना आदि) लगाकर उन्हें न्यायालय में पेश किया। पुलिस का उद्देश्य आरोपियों को लंबी हिरासत में भेजना था।
अदालत की तीखी प्रतिक्रिया और फटकार,
सुनवाई के दौरान जब बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस की थ्योरी को चुनौती दी, तो माननीय न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
अनावश्यक धाराएं: कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों के इतनी गंभीर धाराएं क्यों लगाई गईं।
पुलिस को चेतावनी: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह या दबाव बनाने के लिए किसी नागरिक की स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता।
शाम का नाटकीय मोड़: सामूहिक जमानत,
न्यायालय ने मामले के तथ्यों को देखते हुए पुलिस के तर्कों को अपर्याप्त माना। शाम को कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए:
मुख्य अभियुक्ता सरिता सिंह पटेल सहित सहयोगी अमरदीप, विजय कुमार, सुभाष, अंकिता और सुनीता को तत्काल जमानत दे दी।
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे मामले की विवेचना में पारदर्शिता बरतें और किसी को अनावश्यक परेशान न करें।
वर्तमान स्थिति: साख का सवाल,
जमानत मिलने के बाद अब यह मामला मिर्जापुर में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहाँ पुलिस इसे अपने ‘गुड वर्क’ के रूप में देख रही थी, वहीं कोर्ट की फटकार और तत्काल जमानत ने पुलिस की जांच की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
यह मामला एक तरफ पत्रकारिता और सक्रियता की आड़ में रची गई कथित साजिश का उदाहरण है, तो दूसरी तरफ कानून की उन बारीकियों का भी, जहाँ अदालत ने पुलिस की “अति-सक्रियता” पर लगाम लगाई। फिलहाल सभी आरोपी जेल से बाहर हैं, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी।
पुलिस द्वारा दिए गए विवरण पर एक नजर-
जनपद के थाना अदलहाट क्षेत्र में बीते दिनों हुए कथित अपहरण के मामले में मिरजापुर पुलिस ने चौकाने वाला खुलासा किया । जिस महिला ने अज्ञात बदमाशों पर अपहरण का आरोप लगाया था, वह स्वयं ही इस पूरे षड्यंत्र की मुख्य सूत्रधार निकली। पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के कुशल निर्देशन में थाना अदलहाट व एसओजी/सर्विलांस की संयुक्त टीम ने भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस फर्जी घटना का भंडाफोड़ करते हुए 06 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है
क्या थी घटना की पृष्ठभूमि?
दिनांक 06.05.2026 को वादिनी सरिता सिंह पटेल पत्नी सुभाष सिंह पटेल (निवासी: दीक्षितपुर, थाना चुनार) ने तहरीर दी थी कि अज्ञात अभियुक्तों द्वारा उसका अपहरण कर 04 दिनों तक अज्ञात स्थान पर छुपाकर रखा गया। इस सूचना पर थाना अदलहाट में मु0अ0सं0-101/2026 धारा 140(3) बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू की गई थी।
इन धाराओं के तहत हुई थी कार्रवाई (BNS की कठोर धाराएं):
पुलिस ने जांच के बाद मामले में षड्यंत्र और धोखाधड़ी की पुष्टि होने की बात कही थी एवं मुकदमे में निम्नलिखित धाराओं की वृद्धि की थी:
धारा 140(3): अपहरण से संबंधित।
धारा 109(1): उकसाने/दुष्प्रेरण से संबंधित।
धारा 127: गलत तरीके से बंधक बनाना।
धारा 309: डकैती या जबरन वसूली के प्रयास के संदर्भ में।
धारा 3(5): सामान्य आशय (Common Intention)।
धारा 61(2): आपराधिक साजिश।
धारा 351(3): आपराधिक धमकी।
धारा 308(6): जबरन वसूली के लिए क्षति पहुँचाना।
धारा 212: अपराधी को शरण देना।
धारा 224: लोक सेवक को गलत सूचना देकर गुमराह करना।
गिरफ्तार अभियुक्त अमरदीप से हुई कड़ी पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (सर्विलांस) की समीक्षा से पता चला कि मुख्य अभियुक्ता सरिता पटेल एक इलेक्ट्रॉनिक यू-ट्यूबर एवं हिंदी दैनिक समाचार पत्र पवन प्रभात की मिर्जापुर ब्यूरो चीफ है। वह चुनार पुलिस द्वारा पूर्व में कुछ अभियुक्तों को जेल भेजने के कारण नाराज थी। वह पुलिस पर अपनी मर्जी के मुताबिक कार्य करने का दबाव बनाना चाहती थी और इसी बहाने नाजायज धन उगाही की योजना बनाई थी।
साजिश का ‘प्लान-बी’: पेट्रोल छिड़ककर सनसनी फैलाने की कोशिश
योजना के तहत सरिता पटेल को उसके सहयोगी अमरदीप ने अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर बरामदगी स्थल (थाना राजगढ़ क्षेत्र) तक पहुँचाया। वहां सरिता ने अमरदीप की मदद से अपने हाथ-पैर बंधवाए। यही नहीं, घटना को और अधिक गंभीर दिखाने के लिए अमरदीप ने अपनी बाइक से पेट्रोल निकालकर सरिता के शरीर पर छिड़कने के लिए दिया, ताकि पुलिस पर दबाव चरम पर हो।
जिनको गिरफ्तार किया गया था उनका विवरण।
सरिता सिंह पटेल (मुख्य साजिशकर्ता) – पत्नी सुभाष सिंह पटेल, निवासी दीक्षितपुर।
अमरदीप (सहयोगी) – पुत्र स्व0 कमल कुमार, निवासी विशेषरपुर माफी।
विजय कुमार सिंह – पुत्र बलबन्त सिंह, निवासी थिरेसापुर।
सुभाष – पुत्र स्व0 गंगाराम, निवासी दीक्षितपुर।
अंकिता – पत्नी विजेन्द्र, निवासी रामपुर सक्तेशगढ़।
सुनीता – पत्नी संदीप, निवासी खमवां जमूती।
बरामदगी:
सह-अभियुक्त अमरदीप की निशानदेही पर वह साड़ी बरामद की गई है, जिसे सरिता पटेल ने घटना के समय अपनी पहचान छिपाने के लिए पहना था।
इस जटिल मामले के अनावरण के लिए गठित टीम में प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सेठ (थाना अदलहाट), उप निरीक्षक आशुतोष शुक्ला, और एसओजी/सर्विलांस प्रभारी राजीव कुमार सिंह मय टीम शामिल रहे। पुलिस अधीक्षक ने टीम के ‘गुड वर्क’ की सराहना करते हुए कहा कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
”यह गिरफ्तारी समाज के लिए एक संदेश है कि झूठी कहानियों और साजिशों के जरिए पुलिस प्रशासन को डिगाया नहीं जा सकता। वैज्ञानिक साक्ष्य हमेशा सच बोलते हैं।” — मिर्जापुर पुलिस।






