अलीगंज SDM कोर्ट पर वकीलों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार, कोर्ट मुहर्रिर सिपाही सचिन चौधरी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, रिपोर्ट वी के दीक्षित

*जनपद एटा से आज 4 मई 2026 अपडेट*

 

*अलीगंज तहसील न्यायालय या वसूली केंद्र?*

 

*अलीगंज SDM कोर्ट पर वकीलों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार, कोर्ट मुहर्रिर सिपाही सचिन चौधरी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप*

 

*पिछले 4 वर्षों से अलीगंज तहसील न्यायालय में तैनात है, सिपाही सचिन चौधरी*

 

एटा के *तहसील अलीगंज* से *आज एक बड़ी खबर सामने* आई है। *न्याय* की *कुर्सी* पर *बैठा तंत्र* जब *खुद सवालों* के *घेरे में* आ जाए, तो *व्यवस्था* की *नींव हिलना तय* है। अलीगंज में ऐसा ही *विस्फोटक मामला सामने आया है,* जहां उपजिलाधिकारी *(SDM)* अलीगंज *एवं* उनके *कोर्ट मुहर्रिर सिपाही* सचिन *चौधरी* पर *भ्रष्टाचार, अवैध वसूली* और *न्यायिक* प्रक्रियाओं की *खुली अनदेखी* जैसे *बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।*

 

इन्हीं *आरोपों* से *आक्रोशित* होकर *बार एसोसिएशन अलीगंज* ने एक *आपातकालीन* सामान्य *सभा बुलाकर* सर्वसम्मति से न्यायालय के *अनिश्चितकालीन बहिष्कार* का ऐतिहासिक और *कड़ा निर्णय लिया है।*

 

*🔥 आरोप इतने गंभीर कि न्याय व्यवस्था पर सवाल*🤔

 

तहसील अलीगंज के *वकीलों* ने *जो आरोप लगाए* हैं, वे किसी भी न्यायिक व्यवस्था के लिए *शर्मनाक* माने जा सकते हैं

 

● बिना प्रार्थना पत्र, बिना बन्धनामा और बिना हलफनामा के जमानत देना

 

● कथित रूप से रुपयों के बदले मुल्जिमों को छोड़ना

 

● मुकदमों में बिना बहस सुने आदेश पारित करना या जानबूझकर लटकाना

 

● धारा 80 व 116 राजस्व संहिता के मामलों में भारी धन उगाही

 

● पैमाइश (माप) और धारा 32/38 में भी पैसों के बदले आदेश देना

 

अब *सबसे चौंकाने वाली बात* यह है कि *यह पूरा खेल* सिर्फ अधिकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि उनके *कोर्ट मुहर्रिर सचिन चौधरी* की *भूमिका* पर भी *गंभीर सवाल* उठे हैं, जो *पिछले चार वर्षों* से *उसी न्यायालय में तैनात हैं।*

 

*वकीलों का साफ संदेश: “अब नहीं सहेंगे*

 

बार एसोसिएशन अलिगंज ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब न्याय बिकने लगे और प्रक्रिया मज़ाक बन जाए, तो बहिष्कार ही एकमात्र रास्ता बचता है।

 

वही *वकीलों का कहना है* कि *यह केवल उनका विरोध नहीं,* बल्कि *आम जनता* के *न्याय* के *अधिकार* की लड़ाई है। यदि न्यायालय में ही नियमों की धज्जियां उड़ेंगी, तो पीड़ित आखिर जाए तो कहां?

 

*प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में*

 

कोर्ट मुहर्रिर सिपाही सचिन चौधरी पर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह चुप्पी खुद कई सवाल खड़े कर रही है।

 

● क्या जिलास्तरीय अधिकारी इन आरोपों से अनजान हैं?

 

● या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

 

*अलीगंज विधानसभा की क्षेत्रीय जनता में भी जमकर आक्रोश*

 

विधानसभा क्षेत्र के लोगों और वादकारियों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह सीधे-सीधे न्याय के साथ बड़ा धोखा है।

 

अलीगंज का यह मामला सिर्फ एक न्यायालय या एक अधिकारी या सिपाही सचिन चौधरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है। सच्चाई सामने आएगी या मामला दबा दिया जाएगा?

 

*वकीलों का बहिष्कार एक चेतावनी है।*

 

अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो यह आग और फैल सकती है।

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