जहाँ शब्दों में सच्चाई और कलम में साहस होता है, वहीं लोकतंत्र सुरक्षित रहता है, रिपोर्ट निशा कांत शर्मा

“जहाँ शब्दों में सच्चाई और कलम में साहस होता है, वहीं लोकतंत्र सुरक्षित रहता है।”

 

आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस है—उन तमाम निडर पत्रकारों और कलम के सिपाहियों को नमन करने का दिन, जो विपरीत परिस्थितियों में भी निष्पक्षता और सच्चाई की मशाल जलाए रखते हैं।

 

एक स्वतंत्र प्रेस ही वह शक्ति है जो:

अंधेरे में दबे सच को रोशनी में लाती है।

आम आदमी की आवाज को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाती है।

समाज को जागरूक कर राष्ट्र निर्माण की नींव रखती है।

 

आज के इस दौर में, जब सूचनाओं का अंबार है, ‘सत्य’ की पहचान करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में ईमानदार और निर्भीक पत्रकारिता की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आइए, आज हम सब मिलकर प्रेस की आजादी का सम्मान करें और उन पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त करें जो अपनी जान जोखिम में डालकर हम तक खबरें पहुँचाते हैं।

 

सभी पत्रकार बंधुओं और मीडिया जगत से जुड़े कर्मयोगियों को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ पर गरीबों की आवाज़ की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

 

Leave a Comment