कवयित्री डॉ. सरिता सिंह की नई पुस्तक “अंतहीन सफर”का भव्य विमोचन, रिपोर्ट नीरज जैन

गोरखपुर की साहित्यिक धरा एक बार फिर गौरवान्वित हुई, जब शहर की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. सरिता सिंह की नई पुस्तक “अंतहीन सफर”का भव्य विमोचन एक सरकारी सभागार में सम्पन्न हुआ। यह अवसर केवल एक पुस्तक के लोकार्पण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह साहित्य, संवेदना और सृजनशीलता के उत्सव का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने डॉ. सरिता सिंह को उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

डॉ. सरिता सिंह केवल एक कवयित्री ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं। उनके काव्य सृजन में जीवन के संघर्ष, संवेदनाएँ और अनुभवों की गहराई साफ झलकती है। देश के विभिन्न मंचों पर जाकर उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है और अपनी अलग पहचान बनाई है।

यदि उनके व्यक्तित्व को संक्षेप में व्यक्त किया जाए, तो यह कहना उचित होगा कि उनमें संघर्ष करने और निरंतर परिश्रम करने की अद्भुत क्षमता है। वे अपने जीवन के हर क्षेत्र—नौकरी, परिवार, साहित्य और समाज सेवा—को समान समर्पण और संतुलन के साथ निभाती हैं। यह संतुलन ही उनकी सफलता का मूल आधार है।

उनका सबसे विशेष गुण है उनकी विनम्रता। इतनी उपलब्धियों के बावजूद उनमें घमंड का नामोनिशान तक नहीं है। उनका सहज और सादगीपूर्ण स्वभाव हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है।

व्यक्तिगत रूप से, उनके साथ बिताया गया हर पल मुझे प्रेरणा देता है। उनके साथ रहकर मुझे स्वयं पर गर्व महसूस होता है। वे न केवल एक उत्कृष्ट रचनाकार हैं, बल्कि एक ऐसी व्यक्तित्व भी हैं, जो अपने कर्म और व्यवहार से दूसरों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरती हैं।

डॉ. सरिता सिंह को उनकी इस नई पुस्तक के लिए हार्दिक बधाई। उनकी लेखनी यूँ ही निरंतर प्रवाहित होती रहे और साहित्य जगत को समृद्ध करती रहे—इसी कामना के साथ।

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