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रिश्वतखोर लेखपाल का आतंक! 80 हजार हड़पे, किसानों को लूटा, प्रधान को दी जेल भिजवाने की धमकी”साभार सूत्र अनिल सोलंकी

*“रिश्वतखोर लेखपाल का आतंक! 80 हजार हड़पे, किसानों को लूटा, प्रधान को दी जेल भिजवाने की धमकी”*

 

_“एटा के जलेसर में भ्रष्टाचार का खुला खेल—गाली-गलौज, धमकी और फर्जी मुकदमे की चेतावनी से दहशत में ग्रामीण”_

 

*तुर्रम सिंह राजपूत✍️*

 

जलेसर (एटा), 30 अप्रैल 2026।

जनपद एटा के जलेसर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत भ्याऊं से सरकारी तंत्र की एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के ग्राम प्रधान सतीश कुमार उर्फ अभयप्रताप सिंह ने क्षेत्रीय लेखपाल हरिओम पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और खुलेआम धमकियों की बौछार जैसे गंभीर आरोप लगाकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

प्रधान द्वारा उपजिलाधिकारी जलेसर को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि लेखपाल हरिओम ने किसानों को पेमाइश (नाप-जोख) के नाम पर जमकर लूटा। आरोप है कि उसने गांव के लोकेश चौधरी से 5,000 रुपये और पप्पू शाह से 75,000 रुपये की मोटी रकम वसूली, लेकिन काम के नाम पर कुछ भी नहीं किया। न तो पेमाइश हुई और न ही किसानों के पैसे वापस किए गए।

जब ग्राम प्रधान ने किसानों की आवाज उठाई और लेखपाल से जवाब मांगा, तो मामला और बिगड़ गया। शिकायत के मुताबिक, लेखपाल हरिओम ने प्रधान के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की और खुलेआम धमकी दी कि वह उन्हें झूठे मुकदमे में फंसा कर जेल भिजवा देगा।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लेखपाल की कथित धमकियों और गाली-गलौज की ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने की बात कही गई। प्रधान का दावा है कि उनके पास इस पूरे घटनाक्रम के ठोस सबूत मौजूद हैं, जो भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं।

प्रधान ने यह भी आरोप लगाया है कि यह कोई एक-दो मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि लेखपाल हरिओम गांव के कई किसानों से इसी तरह अवैध वसूली कर चुका है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है।

ग्राम प्रधान सतीश कुमार ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी लेखपाल के खिलाफ तत्काल कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए, भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हो और किसानों से वसूली गई पूरी रकम वापस दिलाई जाए।

*ग्रामीणों में उबाल:*

गांव के किसानों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका आरोप है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के कारण ही गरीब किसान लगातार शोषण का शिकार हो रहे हैं।

*प्रधान का दो टूक संदेश:*

“अब बर्दाश्त की सीमा खत्म हो चुकी है। किसानों को लूटने वाले ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, वरना जनआक्रोश फूट पड़ेगा।”

यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या ग्रामीण इलाकों में तैनात कुछ सरकारी कर्मचारी कानून से ऊपर हो चुके हैं? अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर प्रकरण में क्या कार्रवाई करता है।

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