स्मार्ट मीटर की ‘लूट’ से गाँव-शहर हाहाकार, उपभोक्ताओं में विद्रोह, BJP कार्यकर्ता भी हुए शामिल
एटा स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में आई भारी वृद्धि ने गाँव से लेकर शहर तक हाहाकार मचा दिया है। राहत के बजाय ये मीटर उपभोक्ताओं की जेब लूटने में ‘स्मार्ट’ साबित हो रहे हैं। गरीब-मजदूर से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक ने इस लूट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार ने भले ही नए मीटर लगाने पर रोक लगा दी हो, लेकिन पुराने उपभोक्ता अब भी बिलों के बोझ से दबे जा रहे हैं।
उपभोक्ता चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि स्मार्ट मीटर में इतना अधिक बिल आ रहा है कि वह उनके बजट के बाहर है। एक मजदूर, जो महीने में मुश्किल से 15-20 दिन काम कर पाता है और 400-500 रुपये प्रतिदिन कमाता है, उसके लिए हज़ारों रुपये का बिल भरना असंभव हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके घर में इतनी बिजली खपत ही नहीं होती, जितना बिल आ रहा है।
जब लोग अधिकारियों के पास समस्या लेकर पहुंचते हैं, तो उन्हें पुराने मीटर के कथित बकाए का सहारा देकर ब्याज के डर से बिल भरने को मजबूर किया जाता है। गरीब-मजदूर के सामने संकट यह है कि बिल भरेगा तो खाएगा क्या? बच्चों को पढ़ाएगा कैसे?
सरकार बचाव में नीतियों की बातें कर रही है, लेकिन जनता इस खेल को पूरी तरह समझ रही है। हाल ही में सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है, लेकिन नए विद्युत कनेक्शनों पर अब भी स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं। जिन घरों में ये लग चुके हैं, वहाँ हालात और भयावह हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार स्मार्ट मीटर के खिलाफ भाजपा के अंधभक्त और कार्यकर्ता भी उतने ही जोरदार तरीके से सड़कों पर उतर आए हैं, जितना विपक्षी दल। जमीनी स्तर पर यह पहली बार देखा गया है कि सत्तारूढ़ दल के अपने कार्यकर्ता इस ‘लूट’ को बर्दाश्त नहीं कर रहे, क्योंकि अब यह लूट उनकी अपनी चौखट तक दस्तक दे चुकी है।






