वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का बढ़ता बोझ क्या जनता की सुनवाई हो रही प्रभावित?

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का बढ़ता बोझ क्या जनता की सुनवाई हो रही प्रभावित?

(खबर जनहित में – शान समाचार)

एटा। शासन-प्रशासन की कार्यशैली में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) अब एक अहम माध्यम बन चुकी है। लेकिन जनपद में लगातार हो रही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आम जनता से लेकर कई अधिकारी तक इसे “सुविधा” के बजाय “जंजाल” मानने लगे हैं।बताया जा रहा है कि अधिकांश विभागों में सुबह के समय या दोपहर 12 बजे के बाद नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की जाती है। ये वीसी कभी मुख्यमंत्री स्तर से, तो कभी प्रमुख सचिव, डीजीपी, कमिश्नर या अन्य उच्च अधिकारियों द्वारा ली जाती हैं। एक बार वीसी शुरू होने के बाद अधिकारी कई-कई घंटों तक उसमें व्यस्त रहते हैं।इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। फरियादी अपनी समस्याएं लेकर दफ्तर पहुंचते हैं, लेकिन अधिकारियों के वीसी में व्यस्त होने के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार जब वीसी देर तक चलती है, तो लोग बिना अपनी बात रखे ही निराश होकर वापस लौट जाते हैं।स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसका समय निर्धारण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दिन के व्यस्त समय में बार-बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होने से न केवल प्रशासनिक काम प्रभावित होता है, बल्कि जनता की सुनवाई भी बाधित होती है।लोगों का सुझाव है कि यदि सरकार को नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करनी ही है, तो उसका एक निश्चित समय तय किया जाए—जैसे शाम के समय, जब दफ्तरों में फरियादियों की संख्या कम होती है। इससे अधिकारी भी बिना व्यवधान के मीटिंग कर सकेंगे और दिन के समय जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से हो सकेगा।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रशासन को तेज और प्रभावी बनाने का एक माध्यम है, लेकिन इसका अत्यधिक और असमय उपयोग जनसुविधाओं में बाधा बनता दिख रहा है। यदि समय प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए, तो यह व्यवस्था जनता और प्रशासन—दोनों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है।

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