*पुलिस कमिश्नरेट आगरा का बढ़ा कुनबा, 577 नव- आरक्षियों की शानदार दीक्षांत परेड संपन्न*
*- मुख्यमंत्री योगी ने वर्चुअली जुड़कर नए पुलिस जवानों को दिया निष्काम जनसेवा का मंत्र*
*- पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और साइंटिफिक ट्रेनिंग से यूपी पुलिस को मिला आधुनिक स्वरूप*
*- साइबर क्राइम से निपटने और 2047 की स्मार्ट पुलिसिंग के लिए तैयार किए गए नए जवान*
*आगरा, 26 अप्रैल।* उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के पुलिस बल को लगातार आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी क्रम में रविवार सुबह 8 बजे आगरा के पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में 577 रिक्रूट आरक्षियों का आधारभूत प्रशिक्षण पूरा होने पर एक भव्य दीक्षांत परेड समारोह का आयोजन किया गया। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने खुली जिप्सी में शानदार परेड का निरीक्षण किया, सलामी ली और नव- आरक्षियों को कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन एवं निष्काम जनसेवा की शपथ दिलाई।
*शुचितापूर्ण और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया*
योगी सरकार की शुचितापूर्ण और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया (फेस रिकग्निशन व बायोमेट्रिक आधारित) के जरिए चुने गए 60,244 नव- आरक्षियों को पूरे प्रदेश में ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी के तहत आरटीसी प्रशिक्षण केन्द्र, आगरा में 21 जुलाई 2025 से इन 577 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू हुआ था। 9 महीने की इस आधुनिक और तकनीकी ट्रेनिंग के बाद आज ये जवान पूरी तरह से पुलिस बल का हिस्सा बन गए हैं।
*सीएम योगी और डीजीपी ने बढ़ाया जवानों का हौसला*
इस ऐतिहासिक दीक्षांत परेड समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। उन्होंने स्क्रीन के जरिए नव- आरक्षियों को संबोधित करते हुए उनका विभाग में स्वागत किया और उन्हें अनुशासन व पूरी ईमानदारी के साथ जनता की सेवा करने का मंत्र दिया। परेड ग्राउंड में मौजूद जवानों और उनके परिजनों ने इस संदेश को बड़े गर्व और उत्साह के साथ सुना।
*वर्दी अधिकार नहीं, जनता के विश्वास का प्रतीक है: पुलिस आयुक्त*
मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षियों को स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया। नव-आरक्षियों में जोश भरते हुए उन्होंने कहा कि वर्दी केवल रुतबे या अधिकार का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास, बड़ी जिम्मेदारी और सेवा भाव का दायित्व है। पुलिस का सर्वोच्च कर्तव्य कानून की मर्यादा में रहकर पीड़ितों की मदद करना है। उन्होंने परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गौरव का क्षण है कि उनके बच्चे देश सेवा के लिए तैयार हुए हैं।
*ड्यूटी में रील बनाने पर होगी बर्खास्तगी, साइबर क्राइम पर रहेगा फोकस*
पुलिस कमिश्नर ने जवानों को अनुशासन का सख्त पाठ पढ़ाते हुए ड्यूटी की चुनौतियों से भी अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी पुलिस की एक सख्त सोशल मीडिया पॉलिसी है। वर्दी में किसी भी तरह की रील बनाना या सोशल मीडिया पर विभागीय मर्यादा के खिलाफ टिप्पणी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसा करने पर नौकरी टर्मिनेट भी हो सकती है।
अपराध के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 70 के दशक में डकैती और 90 के दशक में अपहरण मुख्य चुनौतियां थीं, लेकिन आज साइबर क्राइम सबसे बड़ा खतरा है। यह 9 महीने की साइंटिफिक ट्रेनिंग जवानों को वर्ष 2047 तक की आधुनिक पुलिसिंग के लिए तैयार करने का एक विजन है। उन्होंने जवानों को याद दिलाया कि पुलिस 10 से 5 की नौकरी नहीं है। होली-दिवाली जैसे त्योहारों पर भी उन्हें अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभानी होगी।
परेड ग्राउंड में जब इन युवाओं ने एक साथ कदमताल करते हुए शपथ ली, तो वहां मौजूद उनके माता-पिता और परिजनों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पूरे अनुशासन और उत्साह के साथ ये 577 जवान अब समाज की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।






