मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए आयुष्मान कैशलेस पोर्टल गो-लाइव, गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों में भारी आक्रोश,
आयुष्मान कैशलेस पोर्टल का शुभारंभ और सरकारी दिशा-निर्देश,
—- एके बिंदुसार
उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों और उनके आश्रितों के लिए एक ऐतिहासिक लेकिन विवादास्पद कदम उठाया गया है। सूचना निदेशालय के सभागार में सूचना निदेशक विशाल सिंह की अध्यक्षता में आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए बनाए गए नए पोर्टल को आधिकारिक रूप से गो-लाइव करने की सहमति दे दी गई है।
बैठक के दौरान स्टेट हेल्थ एजेंसी और आयुष्मान भारत योजना के शीर्ष अधिकारियों ने पोर्टल के प्रोसेस फ्लो का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। इसमें आयुष्मान कार्ड जारी करने, ऑनलाइन आवेदन, सत्यापन और कार्ड डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के माध्यम से बेहद बारीकी से समझाया गया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यालय के साथ-साथ प्रदेश के समस्त जिला सूचना कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से जुड़े रहे।
मुख्य बिंदु और सख्त निर्देश:
पोर्टल गो-लाइव: मान्यता प्राप्त पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा का पोर्टल अब पूरी तरह से चालू कर दिया गया है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम: सूचना निदेशक विशाल सिंह ने सभी जनपदीय अधिकारियों को बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं कि जिन मान्यता प्राप्त पत्रकारों के आयुष्मान कार्ड अभी तक नहीं बन पाए हैं, उनका विवरण एक सप्ताह के भीतर पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी: इस उच्चस्तरीय बैठक में वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह, अमित कुमार यादव सहित विभाग के कई अन्य प्रमुख अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
स्वतंत्र और गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों का फूटा गुस्सा-
यह खुला सौतेला व्यवहार है:
जहाँ एक तरफ इस फैसले से मान्यता प्राप्त पत्रकारों में खुशी और राहत का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के हजारों गैर-मान्यता प्राप्त, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। सरकार के इस पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ अब आवाजें बुलंद होने लगी हैं।
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने सरकार की इस नीति पर तीखा प्रहार करते हुए इसे पत्रकारों के साथ खुला अन्याय और सौतेला व्यवहार करार दिया है।
एके बिंदुसार के तीखे बयान और प्रमुख बिंदु:
गैर-मान्यता प्राप्त और स्वतंत्र पत्रकारों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार और सूचना निदेशालय का यह निर्णय पूरी तरह से सौतेला व्यवहार है, जो किसी भी स्थिति में न्यायसंगत नहीं है।
जमीनी स्तर पर अपनी जान को जोखिम में डालकर दिन-रात खबरें लाने वाले स्वतंत्र और डिजिटल मीडिया के पत्रकार ही असल मायनों में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को जिंदा रखे हुए हैं।
जब सुविधाओं और अधिकारों को देने की बारी आती है, तो सिर्फ गिने-चुने मान्यता प्राप्त पत्रकारों को चुनना सरकार की दोहरी नीति को उजागर करता है।
क्या बीमार केवल मान्यता प्राप्त पत्रकार ही पड़ते हैं? क्या स्वतंत्र पत्रकारों और उनके परिवारों को इलाज और स्वास्थ्य सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं होती?
सरकार को दो टूक चेतावनी और भविष्य के आंदोलन की हुंकार
राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
विवादों के बीच भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने सरकार से अपील करते हुए अपनी मांगों का पिटारा खोल दिया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि सरकार इस पोर्टल के नियमों में तत्काल प्रभाव से संशोधन करे।
तत्काल संशोधन की मांग: प्रदेश के सभी गैर-अधिमान्यता प्राप्त, स्वतंत्र, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े तमाम पत्रकारों को भी बिना किसी भेदभाव के इस आयुष्मान कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाए।
आंदोलन का बिगुल: यदि सरकार और सूचना विभाग ने इस गंभीर मांग पर जल्द संज्ञान नहीं लिया और नियमों में बदलाव नहीं किया, तो प्रदेश भर के हताश और आक्रोशित पत्रकार एक बड़े और उग्र प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार और सूचना विभाग इस बढ़ते जनाक्रोश को भांपते हुए अपने फैसले में बदलाव करेगा, या फिर स्वतंत्र पत्रकारों को उनके हकों से वंचित रख कर विवाद को और गहराने देगा? इस पर पूरे प्रदेश की मीडिया जगत की निगाहें टिकी हुई हैं।














