*आगरा में नेशनल कॉन्क्लेव-2026 का शुभारंभ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा- शिक्षा में बदलाव का असली आधार शिक्षक का सशक्तिकरण*
आगरा,। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE), नई दिल्ली एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में जेपी सभागार में आयोजित दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश श्री योगेंद्र उपाध्याय, एनसीटीई के चेयरमैन श्री पंकज अरोरा तथा संस्कृति प्रमोशन फाउंडेशन के प्रो. चांद किरण सलूजा समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविद और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रगीत वंदेमातरम् और सरस्वती वंदना के बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। दो दिवसीय कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “Capacity Building of Stakeholders for Nationwide Roll-out of PUSHTI (NPST) & MITRA (NMM)” रखा गया है। कॉन्क्लेव में उत्तरी क्षेत्र के 9 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों- चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से एससीईआरटी, डायट, नवोदय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन, सीबीएसई, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर और शिक्षाविद शामिल हुए। यहां शिक्षकों की गुणवत्ता, निरंतर व्यावसायिक विकास और अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से अन्य शिक्षकों के मार्गदर्शन को लेकर व्यापक मंथन किया जा रहा है।राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षा में परिवर्तन का वास्तविक आधार शिक्षक का सशक्तिकरण, उसकी व्यावसायिक दक्षता और निरंतर विकास है। उन्होंने कहा कि एनसीटीई की ओर से नवोन्मेषी, मूल्यनिष्ठ और तकनीक आधारित शिक्षकों के प्रशिक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अधिकार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह अवसर, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम भी बने। शिक्षकों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं है और अनुभव की कोई आयु नहीं है। इसलिए शिक्षक स्वयं भी निरंतर सीखें और अपने अनुभव का लाभ दूसरे शिक्षकों को दें। PUSHTI और MITRA पर विशेष जोर राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तैयार किए गए PUSHTI (National Professional Standards for Teachers-NPST) और MITRA (National Mission for Mentoring-NMM) की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि PUSHTI शिक्षकों की व्यावसायिकता, मूल्यों और सतत विकास को स्पष्ट दिशा देता है, जबकि MITRA के माध्यम से अनुभवी एवं नवाचारी शिक्षकों को मेंटर के रूप में जोड़कर अन्य शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन देने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अनुभवी शिक्षकों का ज्ञान और अनुभव शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक पूंजी है। इसी अनुभव को नई पीढ़ी के शिक्षकों तक पहुंचाना शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तकनीक के साथ मानवीय संवेदना जरूरी राज्यपाल ने कहा कि आज के दौर में शिक्षकों को एआई, डिजिटल संसाधनों, स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन शिक्षण सामग्री के प्रभावी एवं जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाना जरूरी है। तकनीक का उपयोग केवल जानकारी देने तक सीमित न रहे, बल्कि उसे मानवीय संवेदना के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की गति अलग होती है। कोई बच्चा जल्दी सीखता है तो किसी को अधिक समय लगता है। ऐसे में शिक्षक बच्चों की जरूरत और सीखने की शैली को समझकर रोचक एवं तकनीक आधारित शिक्षण पद्धति अपनाएं। बच्चों की भावनाओं को समझें शिक्षक राज्यपाल ने एक बच्ची का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बच्ची कक्षा में आकर रोती थी और कुछ देर बाद बाहर चली जाती थी। बाद में पता चला कि उसके माता-पिता खेतों में काम करने चले जाते थे और भाई के निधन के बाद वह अकेली पड़ गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों की परिस्थितियों को समझना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। शिक्षक को बच्चों के पास जाकर उनसे संवाद करना चाहिए और उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। उन्होंने स्थानीय भाषा में शिक्षण, प्रारंभिक स्तर पर भाषा और गणित की बुनियादी समझ मजबूत करने तथा ‘करके सीखने’ की पद्धति को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने बाजार से तैयार प्रोजेक्ट खरीदने की प्रवृत्ति को रोकने की भी बात कही। गुजरात के शिक्षा मॉडल का किया जिक्र राज्यपाल ने गुजरात में प्राथमिक शिक्षा में किए गए सुधारों का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां सरल भाषा पद्धति अपनाई गई, जिससे बच्चों को सीखने में आसानी हुई। उन्होंने शिक्षकों की कमी, रिक्त पदों, स्थानांतरण में मेरिट और सेवा अवधि को आधार बनाने तथा स्कूल नहीं जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई जैसे कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक है, जिसमें करीब 1 करोड़ 3 लाख से अधिक शिक्षक हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रत्येक शिक्षक अपने विद्यार्थियों की जरूरत और बदलती तकनीक के अनुरूप खुद को लगातार विकसित करता रहे। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा- मंथन से निकलेगा अमृत उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि कॉन्क्लेव में 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मंथन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब मंथन हुआ है, उसमें से अमृत निकला है और समाज में उसका वितरण हुआ है। यह कॉन्क्लेव विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा को नैतिकता, ज्ञान-विज्ञान, स्वावलंबन और अपनी संस्कृति से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। 25 करोड़ बच्चों के नेटवर्क का किया उल्लेख एनसीटीई चेयरमैन पंकज अरोरा ने PUSHTI और MITRA की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह उत्तर भारत क्षेत्र का पहला ऐसा कॉन्क्लेव है। उन्होंने कहा कि देश में करीब 25 करोड़ बच्चों का नेटवर्क है और उच्च शिक्षा में करीब साढ़े चार करोड़ विद्यार्थी हैं, जिनमें लगभग 49.7 प्रतिशत महिला विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समावेशी, तकनीकी, क्षमता निर्माण और मूल्यनिष्ठ शिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल सके। शिक्षक संघों से भी सहयोग का आह्वान राज्यपाल ने शिक्षक संघों से भी शिक्षा की गुणवत्ता और स्तर ऊंचा उठाने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ग्रामीण, दूरस्थ और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में तकनीक का उपयोग कर भौगोलिक दूरी को ज्ञान की दूरी नहीं बनने देना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में परिकल्पित एनईटीएफ और एसएसएसए के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा में न्यूनतम गुणवत्ता मानक, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है और शिक्षक उस पूंजी के निर्माता हैं। उन्होंने दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव-2026 तथा MITRA डिजिटल पोर्टल एवं मोबाइल एप के सफल संचालन के लिए शुभकामनाएं दीं। कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में MITRA-नेशनल मिशन फॉर मेंटोरिंग पर तकनीकी सत्र आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने सहभागिता करते हुए शिक्षक प्रशिक्षण एवं मेंटरिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया।














