भाईपुर खुर्द से मिर्जापुर तक गूंजता न्याय का सवाल: बाबूलाल की संदिग्ध मौत—सड़क हादसा या सुनियोजित हत्या?
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के जमालपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। भाईपुर खुर्द (थाना अदलहाट) निवासी बाबूलाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने खाकी और सियासत की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार चीख-चीखकर इसे महज सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या बता रहा है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मिर्जापुर जिले के जमालपुर थाना क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जबकि पीड़ित परिवार भाईपुर खुर्द (थाना अदलहाट) का रहने वाला है। परिवार का आरोप है कि घटना से ठीक पहले किशन और अशोक यादव नामक लोग बाबूलाल को उनके घर से अपने साथ ले गए थे। इसके बाद उनका वापस न लौटना और फिर सीधे उनकी संदिग्ध मौत की खबर मिलना इस घटना को एक साधारण हादसे से कोसों दूर ले जाता है। सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्य भी इसे एक सुनियोजित हत्या की ओर इशारा करते प्रतीत हो रहे हैं।
परिजनों के गंभीर आरोप और पुलिसिया हीला-हवाली
मृतक की बहन और शोकसंतप्त रिश्तेदारों का आरोप है कि शुरुआती दौर में पुलिस ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेने के बजाय टालमटोल का रवैया अपनाया। परिवार का दावा है कि पुलिस ने न तो समय पर एफआईआर दर्ज करने में तत्परता दिखाई और न ही शुरुआती स्तर पर निष्पक्ष जांच के संकेत दिए। पुलिस का रुख शुरू से ही इसे महज एक ‘सड़क दुर्घटना’ मानकर मामले को रफा-दफा करने की ओर झुका हुआ प्रतीत होता है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों में गहरा विरोधाभास बना हुआ है।
राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक संलिप्तता के साए
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब परिवार ने स्थानीय स्तर पर गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के आरोप लगाए। परिजनों का आरोप है कि थाने पर कुछ स्थानीय प्रधानों और रसूखदार नेताओं (विशेषकर पिछड़े वर्ग आयोग के सदस्य शिव मंगल का नाम लेते हुए) द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। परिवार का सीधा आरोप है कि इसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण स्थानीय पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने से कतरा रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और न्याय की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
न्याय की गुहार लगाता परिवार
आज स्थिति यह है कि बाबूलाल की बेटी और उनके तमाम परिजन न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उनका एकमात्र संघर्ष इस बात को लेकर है कि सच सामने आए और इस संदिग्ध मौत की परतें खुलकर बाहर आएं। परिवार ने उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से उच्चस्तरीय और पूरी तरह निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके तथा इस खौफनाक घटना में संलिप्त दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
क्या मिर्जापुर पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच कर के सच को बेनकाब कर पाएगी या फिर सियासत के दबाव में एक और पीड़ित परिवार की चीखें ठंडे बस्ते में चली जाएंगी? यह सबसे बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है।















