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परिवहन संकट से जूझता बाह, क्या फिर लौटेगा दस्यु प्रणाली का दौर? शंकर देव तिवारी 

परिवहन संकट से जूझता बाह, क्या फिर लौटेगा दस्यु प्रणाली का दौर?

शंकर देव तिवारी

: बाह (आगरा)

तीन नदियों (चंबल, यमुना और उत्तंगन) के दोआबा क्षेत्र में बसा बाह आज विकास की दौड़ में पिछड़कर एक बार फिर अभावग्रस्तता के मुहाने पर खड़ा है। कभी परिवहन के मामले में बेहद समृद्ध रहा यह इलाका आज बसों के परमिट और रेल सेवाओं के स्टॉपेज की भारी कमी से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते रोजगार के लिए इस परिवहन संकट को दूर नहीं किया गया, तो क्षेत्र का युवा रोजी-रोटी की मजबूरी में एक बार फिर दशकों पुरानी दस्यु प्रणाली (डकैती) की राह पर लौटने को विवश हो सकता है।

400 से सिमटकर ‘शून्य’ पर पहुंचे परमिटएक दौर था जब बिना किसी आधिकारिक डिपो के भी बाह से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न शहरों के लिए करीब 400 निजी बसें चलती थीं। इटावा, भिंड, बटेश्वर और शिकोहाबाद के लिए बकायदा यूनियन के तहत समय से बसें संचालित थीं। लेकिन जैसे ही बाह में सरकारी बस डिपो की मांग पूरी हुई, वैसे ही पुराने दोनों निजी बस अड्डे बंद हो गए। आज डिपो तो है, लेकिन उसमें मात्र 100 बसें हैं, जो बड़े शहरों को जोड़ने में भी नाकाम हैं। नतीजा यह है कि प्रमुख मार्गों पर अब परमिट संख्या शून्य है और जनता डग्गामार वाहनों व ऑटो-टैंपू के भरोसे है।

पुल बने पर मकसद हुआ फेलपिछले तीन दशकों में यमुना नदी पर करीब आधा दर्जन पुलों का निर्माण किया गया ताकि अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। लेकिन धरातल पर परिवहन सेवाएं न होने से इन महंगे पुलों का मुख्य उद्देश्य ही दम तोड़ चुका है।

रेलवे ट्रैक पर गाड़ियां तो हैं, पर ठहराव नहींपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत आगरा-भांडई-बाह-इटावा रेल ट्रैक का काम तेजी से पूरा किया गया था। हाल ही में आगरा-इटावा रेल मार्ग में बदलाव कर इसे फतेहाबाद, बाह और बटेश्वर होकर भी संचालित किया गया है। लेकिन स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि लंबी दूरी की गाड़ियों का बाह या अटल जी के पैतृक गांव बटेश्वर स्टेशन पर स्टॉपेज ही नहीं है। बटेश्वर मई, कचोराघाट के बाजारों और पिनाहट व जरार जैसी बड़ी मंडियों के विकास को इस उपेक्षा ने रोक दिया है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार: स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी

“बाह-इटावा रेल ट्रैक के रूट में बदलाव कराकर इस क्षेत्र को मुख्य लाइन से जोड़ने का प्रयास किया गया है। जहां तक एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज और बटेश्वर स्टेशन को आदर्श स्टेशन बनाने की मांग है, इसके लिए रेल मंत्रालय को पत्र लिखा गया है। जल्द ही यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव की सौगात मिलेगी।”— राजकुमार चाहर, सांसद, फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र

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“बाह डिपो में बसों की संख्या बढ़ाने और बंद हो चुके स्थानीय रूटों पर दोबारा परिवहन सेवाएं बहाल करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। लोकल रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए अनुबंधित बसों की संख्या में भी इजाफा किया जाएगा।”— बी.पी. अग्रवाल, क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम), यूपी रोडवेज, आगरा परिक्षेत्र

समाज सेवी पप्पू दिवाकर सिंह गुर्जर पालिका अध्यक्ष कहते हैं कि “तीन राज्यों की सीमा से लगे इस संवेदनशील क्षेत्र में युवाओं का पलायन रोकना हमारी प्राथमिकता है। परिवहन सेवाएं सुलभ होने से ही उद्योगों और मंडियों को बढ़ावा मिलेगा। यदि बुनियादी ढांचा ही कमजोर रहेगा, तो युवाओं में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।”—

 

 

जिला पंचायत के पूर्व सदस्य मलखान सिंह राठौर का मानना ही कि यमुना के पुल और रेलवे की पटरियां तब तक बाह की तकदीर नहीं बदल सकतीं, जब तक उन पर दौड़ने वाले साधनों में स्थानीय जनता को जगह न मिले। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को समय रहते जागना होगा, वरना अभाव की कोख से उपजा असंतोष क्षेत्र को फिर से पुरानी राह पर धकेल सकता है।

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