आगरा में एक घंटे लंबे अभियान में पेड़ से सात फुट लंबा भारतीय रॉक पायथन को बचाया ,वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने चीनी का रौज़ा, रामबाग में ज़मीन से 20 फुट से अधिक ऊँचाई से पायथन को सुरक्षित रूप से बचाया
आगरा, 24 अक्टूबर । आगरा के चीनी का रौज़ा, रामबाग स्थित एक नर्सरी में पेड़ पर सात फुट लंबा भारतीय रॉक पायथन देखा गया, जिससे बड़ी भीड़ जुट गई और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। चिंतित निवासियों की सूचनाओं के बाद, उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट से संगठन की आपातकालीन हेल्पलाइन (+91 9917109666) के माध्यम से संपर्क किया गया। सरीसृप को बचाने के लिए दो सदस्यीय रेस्क्यू दल तुरंत स्थान पर पहुँचा।
पायथन के ज़मीन से 20 फुट से अधिक ऊँचाई पर बैठे होने के कारण, वाइल्डलाइफ एसओएस की रेस्क्यू टीम सरीसृप तक पहुँचने के लिए सावधानीपूर्वक पेड़ पर चढ़ी। एक चुनौतीपूर्ण, घंटे भर चले अभियान के बाद, रेस्क्यू टीम ने सात फुट लंबे पायथन को सुरक्षित रूप से काबू में किया और उचित उपकरणों एवं तकनीकों का उपयोग करते हुए उसे नीचे उतारा। टीम ने इकट्ठी हुई भीड़ को भी संभाला ताकि अभियान सुरक्षित रूप से पूरा हो सके और सरीसृप तथा जनता दोनों के लिए जोखिम कम से कम हो।
वाइल्डलाइफ एसओएस में संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक और सरीसृप विशेषज्ञ बैजू राज एम.वी. ने समझाया ,भारतीय रॉक पायथन शक्तिशाली, गैर-विषैले संकोचक (कंस्ट्रिक्टर) होते हैं और, हालांकि मुख्य रूप से भूमि पर रहने वाले होते हैं, वे अच्छे चढ़ाकू भी होते हैं। इस रेस्क्यू के लिए हमारी टीम को पेड़ पर चढ़ना पड़ा और सरीसृप को सावधानीपूर्वक काबू में करके नीचे उतारना पड़ा। पायथन की ताकत उचित प्रशिक्षण और उपकरणों के बिना इसे संभालना खतरनाक बना देती है। लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और स्वयं सरीसृप को घेरने, उसका पीछा करने या पकड़ने का प्रयास करने के बजाय प्रशिक्षित वन्यजीव उद्धारकर्ताओं से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा सात फुट लंबे पायथन को देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन डर के कारण किसी पशु को कभी नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए। यह रेस्क्यू इस बात को रेखांकित करता है कि जब वन्यजीव मानव-प्रधान क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, तो प्रशिक्षित हस्तक्षेप और जिम्मेदार प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है। हम उत्तर प्रदेश वन विभाग के आभारी हैं, जिसने पायथन को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़े जाने को सुनिश्चित करने में सहायता और समन्वय किया। भारतीय रॉक पायथन (पायथन मोल्यूरस) भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली सबसे बड़ी साँप प्रजातियों में से एक है। आईयूसीएन रेड लिस्ट में निकट संकटग्रस्त (नियर थ्रेटन्ड) के रूप में सूचीबद्ध और वन्य जीवों एवं वनस्पतियों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (साइट्स) के परिशिष्ट I में शामिल यह प्रजाति भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के अंतर्गत उच्चतम स्तर का कानूनी संरक्षण भी प्राप्त करती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस निवासियों से अपील करता है कि यदि उन्हें पायथन या कोई अन्य वन्यजीव मिले तो वे शांत रहें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। वन्यजीवों को संभालने, उनका पीछा करने या उन्हें घेरने का प्रयास लोगों और पशुओं दोनों को जोखिम में डाल सकता है। निवासियों को सहायता के लिए प्रशिक्षित वन्यजीव उद्धारकर्ताओं या संबंधित वन विभाग से संपर्क करना चाहिए।
















