संविधान निर्माता की जयंती पर बोले अरविंद सिंह चौहान: “बाबासाहेब का संघर्ष सामाजिक समानता के लिए था, अरविंद चौहान

संविधान निर्माता की जयंती पर बोले अरविंद सिंह चौहान: “बाबासाहेब का संघर्ष सामाजिक समानता के लिए था”

एटा। आज भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर प्रांत विशेष सह संपर्क प्रमुख अरविंद सिंह चौहान ने डॉ अम्बेडकर पुस्तकालय पर उपस्थित होकर बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन और उनके कड़े संघर्षों को याद करते हुए समाज को एकजुट होने का संदेश दिया।

हिंदुत्व और सामाजिक सुधार पर विचार

समाचार को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने डॉ. अंबेडकर के उन विचारों को भी रेखांकित किया जो उन्होंने तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था और हिंदुत्व के संदर्भ में व्यक्त किए थे। उन्होंने कहा:

जातिवाद मुक्त समाज: बाबासाहेब ने स्पष्ट कहा था कि यदि हिंदुत्व को जीवित रहना है, तो उसे जातिवाद के बंधनों को तोड़कर समरसता और बंधुत्व को अपनाना होगा।

मानवता सर्वोपरि: डॉ. अंबेडकर का मानना था कि धर्म वही है जो व्यक्ति को स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक मान्यताओं से ऊपर मानवीय गरिमा होनी चाहिए।

आंतरिक सुधार की आवश्यकता: श्री चौहान ने बताया कि बाबासाहेब ने हिंदुत्व के भीतर व्याप्त कुरीतियों और छुआछूत जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, ताकि एक न्यायपूर्ण राष्ट्र का निर्माण हो सके।

शिक्षित समाज ही देश का भविष्य

अरविंद सिंह चौहान ने युवाओं से अपील की कि वे बाबासाहेब के मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश की एकता और अखंडता के लिए उनके विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने संविधान की रक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की शपथ ली। इस अवसर पर कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक सहित जिला मंत्री मुकेश राठौर, सौरभ सोलंकी, अतुल भदौरिया, अंकित बघेल अश्विनी चक सहित अन्य विहिप कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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