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आस्था या अंधविश्वास का व्यापार? पूर्वांचल से मध्य भारत तक फैले ढोंगी बाबाओं के काले साम्राज्य पर अब प्रहार

पार्ट 2 की प्रस्तुति:

 

*आस्था या अंधविश्वास का व्यापार? पूर्वांचल से मध्य भारत तक फैले ढोंगी बाबाओं के काले साम्राज्य पर अब प्रहार*

 

धर्म का चोला, ठगी का धंधा: फर्जी बाबाओं की अकूत संपत्ति और पाखंड पर कसेगा शिकंजा, शासन-प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

विशेष रिपोर्ट — चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर और मुगलसराय क्षेत्र से पार्ट -3 में अब उन ढोंगी बाबाओं के नाम का होगा खुलासा!

 

धर्म और जन-आस्था भारत की सांस्कृतिक चेतना के मूल स्तंभ रहे हैं। परंतु, जब इसी आस्था का इस्तेमाल भय, प्रलोभन और अंधविश्वास फैलाकर करोड़ों की अवैध उगाही के लिए किया जाने लगे, तो यह समाज और कानून दोनों के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति बन जाती है।

चंदौली, मुगलसराय, मिर्जापुर, सोनभद्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में एक ऐसा ही संगठित मकड़जाल फल-फूल रहा है। दरबार लगाने, तांत्रिक अनुष्ठान करने और चमत्कार के झूठे दावों के नाम पर मासूम और असहाय जनता को बेखौफ लूटा जा रहा है। अब इस पाखंड और आर्थिक शोषण के खिलाफ ‘भारतीय मीडिया फाउंडेशन’ ने आर-पार की कानूनी व सामाजिक लड़ाई छेड़ने का निर्णय लिया है।

चमत्कार का जाल और डर का कारोबार: ठगी के विभिन्न तरीके

इन कथित बाबाओं और तांत्रिकों द्वारा लोगों की मजबूरी, अज्ञानता और पारिवारिक समस्याओं का सीधा फायदा उठाया जा रहा है। दर्ज शिकायतों और क्षेत्रीय इनपुट्स के अनुसार, ठगी के मुख्य हथकंडे निम्नलिखित हैं:

संतान प्राप्ति और लिंग चयन का झूठा दावा: मनचाही संतान (लड़का या लड़की) का झांसा देना, गोद भराई का ढोंग करना और लड़की होने पर विवाह का पूरा खर्च उठाने जैसे भ्रामक दावे करके मोटी रकम ऐंठना।

अंधविश्वास का डर: भूत-प्रेत भगाने, काला जादू काटने, वशीकरण करने, मोहिनी मंत्र देने और खोए हुए व्यक्तियों को वापस बुलाने के नाम पर मानसिक दबाव बनाना।

अवैध अनुष्ठान एवं बलि का भय: बलि-बलिदान और विशेष तंत्र-मंत्र के नाम पर प्रति व्यक्ति ₹2,000 से लेकर ₹20,000 या उससे भी अधिक की वसूली करना।

लूट से बने साम्राज्य की जांच: अकूत संपत्ति और बेनामी लेन-देन

केवल धार्मिक आडंबर ही नहीं, बल्कि इस पाखंड की आड़ में बनाए गए विशाल आर्थिक साम्राज्य को उजागर करना भी अब प्राथमिकता में शामिल है।

भारतीय मीडिया फाउंडेशन की नेशनल कोर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि लगातार मिल रही जन-शिकायतों के आधार पर अब इन ढोंगी बाबाओं की चल-अचल संपत्ति की बिंदुवार समीक्षा और पारदर्शी जांच की मांग की जाएगी:

अवैध आश्रम और भूमि कब्जा: बिना किसी वैध पंजीकरण या सरकारी अनुमति के संचालित हो रहे आश्रमों और जमीनों की वास्तविक स्थिति।

लक्जरी जीवनशैली: दान और चंदे के नाम पर एकत्र किए गए धन से खरीदी गई लग्जरी गाड़ियों, महंगे गैजेट्स और बेनामी संपत्तियों का ब्योरा।

वित्तीय हेराफेरी व कर चोरी: ट्रस्टों के नाम पर सरकारी अनुदान, दान और चंदे में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और आयकर (Income Tax) की चोरी की गहन समीक्षा।

कानूनी शिकंजा: RTI और आर्थिक जांच संस्थाओं की भूमिका

संगठन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार के अनुसार, इस पूरे अभियान को केवल बयानों तक सीमित न रखकर ठोस कानूनी साक्ष्यों के साथ अंजाम तक पहुँचाया जाएगा।

“हमें लगातार पीड़ित परिवारों की शिकायतें मिल रही हैं। अब यह बर्दाश्त से बाहर है। पहले हर शिकायत की गहनता से सत्यता परखी जाएगी, उसके बाद साक्ष्यों के साथ ढोंगी बाबाओं का पर्दाफाश कर उनके नाम सार्वजनिक किए जाएंगे। धर्म के नाम पर लूट मचाकर बनाई गई उनकी संपत्ति, आश्रम और गाड़ियों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।”

रणनीति के मुख्य बिंदु:

सूचना का अधिकार (RTI): विभिन्न विभागों से आश्रमों की भूमि, ट्रस्ट पंजीकरण, और कर-भुगतान से संबंधित जानकारी प्राप्त की जाएगी।

प्रशासनिक शिकायत: अनियमितताओं, अवैध अतिक्रमण और अवैध उगाही से जुड़े पुख्ता दस्तावेज संबंधित जिला प्रशासन, पुलिस और आयकर विभाग को सौंपे जाएंगे।

पीड़ितों की सुरक्षा: अपनी शिकायत दर्ज कराने वाले किसी भी पीड़ित व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक चेतना

धर्म चेतना और शांति का मार्ग है, न कि आर्थिक शोषण की दुकान। जब जनता के भय और मजबूरी को बाजार का रूप दे दिया जाए, तो वहां कानून और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता अनिवार्य हो जाती है।

ऐसे मामलों में केवल सामाजिक बहिष्कार ही नहीं, बल्कि आपराधिक धाराओं (420 IPC/संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धाराओं) और ड्रग्ज एंड मैजिक रेमेडीज (ऑब्जेक्शनल एडवरटाइजमेंट्स) एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि आस्था के नाम पर चल रहे इस अवैध व्यापार पर पूर्ण विराम लग सके।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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