*डीएम अरविन्द सिंह ने ग्राम मानपुर स्थित 24 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण*
( 18 एमएलडी सीवेज का प्रतिदिन हो रहा शोधन, शोधित जल की गुणवत्ता का लिया जायजा )
एटा! जनपद में संचालित महत्वपूर्ण एवं बड़ी परियोजनाओं के सुचारु संचालन तथा आमजन को उनका पूर्ण लाभ सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने ग्राम मानपुर स्थित नगर पालिका परिषद एटा द्वारा संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने प्लांट के विभिन्न यूनिटों का गहन निरीक्षण करते हुए सीवेज शोधन की पूरी प्रक्रिया, प्लांट की क्षमता, तकनीकी व्यवस्थाओं, शोधित जल की गुणवत्ता तथा प्रयोगशाला में की जा रही जांच के संबंध में विस्तृत जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद में संचालित इस प्रकार की महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्धारित क्षमता के अनुरूप पूरी दक्षता एवं निरंतरता के साथ संचालित रहें। संचालन में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी, लापरवाही अथवा व्यवधान उत्पन्न न होने दिया जाए। उन्होंने प्लांट की सभी अनिवार्य तकनीकी इकाइयों की नियमित जांच एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि सीवरेज शोधन की व्यवस्था निर्बाध रूप से चलती रहे।
निरीक्षण के दौरान जल निगम (नगरीय) के अधिकारियों द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि अमृत कार्यक्रम के अंतर्गत एटा शहर की सीवरेज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तीन चरणों में योजनाएं संचालित की गई हैं। परियोजना के अंतर्गत 24 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ग्राम मानपुर में स्थापित किया गया है
अधिकारियों ने बताया कि एसटीपी एसबीआर (Sequencing Batch Reactor) तकनीक पर आधारित है। प्लांट से वर्तमान में सीवर गृह संयोजनों एवं नाला टैपिंग के माध्यम से प्राप्त लगभग 18 एमएलडी (180 लाख लीटर प्रतिदिन) सीवेज का शोधन किया जा रहा है। शोधन के पश्चात शोधित जल को नाले के माध्यम से ईशन नदी में प्रवाहित किया जाता है। परियोजना के समस्त कार्य पूर्ण कर नगर पालिका परिषद एटा को हस्तांतरित किए जा चुके हैं तथा वर्तमान में प्लांट के संचालन एवं रखरखाव का कार्य नगर पालिका परिषद द्वारा कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने शोधित जल की गुणवत्ता से संबंधित प्रयोगशाला जांच एवं निर्धारित मानकों का भी अवलोकन किया। उन्होंने निर्देश दिए कि शोधन प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ प्रयोगशाला जांच को भी प्रभावी ढंग से जारी रखा जाए तथा निर्धारित गुणवत्ता मानकों का हर स्थिति में अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने प्लांट से शोधन प्रक्रिया के बाद निकलने वाले अपशिष्ट/स्लज के समुचित उपयोग के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों के मध्य व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें बताया जाए कि निर्धारित प्रक्रिया एवं आवश्यक सावधानियों के अनुरूप इस अपशिष्ट का उपयोग जैविक खाद के रूप में खेतों में किया जा सकता है। इसके लिए डीपीआरओ,कृषि एवं संबंधित विभागों के माध्यम से किसानों को आवश्यक जानकारी एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि सीवरेज जैसी आधारभूत परियोजनाएं सीधे तौर पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी हैं। अतः इन परियोजनाओं का संचालन धरातल पर पूर्ण क्षमता और प्रभावशीलता के साथ दिखाई देना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्लांट की कार्यप्रणाली पर सतत निगरानी रखते हुए किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
निरीक्षण के दौरान जल निगम (नगरीय) के अधिशासी अभियंता सैयद तारिक अली सहित जल निगम एवं संबंधित स्टाफ उपस्थित रहा।













