एटा ख़बर
मंत्री बेबी रानी मौर्या के डीएम को सार्वजनिक रूप से दुर्व्यवहार पर उठे सवाल, प्रोटोकॉल को लेकर विवाद
एटा सरकारी कार्यक्रम में देरी से पहुंचीं यूपी की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्या और जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के बीच प्रोटोकॉल को लेकर हुई बातचीत अब चर्चा का विषय बन गई है।
जिला मुख्यालय पहुंचीं मंत्री बेबी रानी मौर्या ने डीएम से नाराजगी जताते हुए कहा— “यह गलत बात है, यह नहीं चलेगा। हम आपसे पूछना चाह रहे हैं कि क्या व्यवस्थाएं हैं। आप प्रोटोकॉल में बड़े हैं, हमसे इसलिए आप बात नहीं करेंगे?
मंत्री के इस व्यवहार को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि कार्यक्रम में प्रोटोकॉल या व्यवस्थाओं को लेकर कोई कमी थी, तो उसे सार्वजनिक रूप से अधिकारी से दुर्व्यवहार के बजाय संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर या मीडिया के सामने तथ्य स्पष्ट करके रखा जा सकता था।
हालांकि, प्रोटोकॉल में आखिर क्या कमी रही थी और मंत्री की नाराजगी का वास्तविक कारण क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। इस संबंध में पत्रकारों द्वारा मंत्री बेबी रानी मौर्या से कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।
जिला स्तरीय अधिकारी के साथ व्यवहार को लेकर भी उठे सवाल
घटना को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी के साथ सार्वजनिक रूप से इस तरह की नाराजगी जाहिर करना क्या उचित है। आलोचकों का कहना है कि यदि कोई प्रशासनिक कमी थी तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत उठाया जाना चाहिए था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी बहस होती रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई कि अच्छे अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने में कई बार दबावों का सामना करना पड़ता है।
इसी संदर्भ में एटा के पूर्व जिलाधिकारी विजय किरण आनंद का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जिनके कार्यकाल को लेकर भी बेहतर प्रशासनिक कामकाज की बात कही थी।
फिलहाल पूरे मामले में मंत्री बेबी रानी मौर्या का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया कि प्रोटोकॉल में वास्तविक कमी क्या थी कथित फोन ना उठाने के इस पूरे मामले पर अब तक जिलाधिकारी अरविंद सिंह या मंत्री बेबी रानी मौर्य का कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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