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ये नहीं चलेगा, वो नहीं चलेगा, आपको फोन उठाना चाहिए था.. क्या!! BMFNEWS

*ये नहीं चलेगा, वो नहीं चलेगा, आपको फोन उठाना चाहिए था.. क्या!!👇*

आप सभी इस तरह के बयान कल से सोशल मिडिया पर वायरल वीडियो में सुन देख रहे होंगे!

मिडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहे है जनपद एटा के तेजतर्रार जिलाधिकारी अरविन्द सिंह व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बेबी रानी मौर्य के बीच की है.

जैसा कि वीडियो में सुनाई देता है कि आपको (जिलाधिकारी)फोन उठाना चाहिए था, हम जानना चाहते थे कि क्या तैयारियां है!कुछ ऐसे शब्द सुनाई दे रहे है।

इस तरह की वार्ता अफसर के साथ तभी होती है ज़ब अफसर रिश्वत के दायरे में आ गया हो या फिर अपनी कार्यशेली ईमानदारी से कर रहा हो। अगर अफसर रिश्वत लेने लगा हो तो सरकार का कोई विधायक या मंत्री कभी कुछ कहता ही नहीं है क्योंकि सब बांट कर खाते है और सारे काम सुगमता से होते जाते है परन्तु ज़ब अफसर अपने काम के प्रति जिम्मेदारी निभा रहा हो और सरकार के निर्देशों पर काम कर रहा हो तब कोई भी एरा गेरा मंत्री आकर बेइज्जत करने की कोशिश करता है क्योंकि ऐसी घटनाओ के पीछे कई कारण छुपे होते है.

अभी हाल ही में जिलाधिकारी द्वारा कोर्ट के माध्यम से कई बड़े फैसले किये है जिसमे भू माफियाओ पर नकेल कसी गई थी उन्ही फेसलो के बाद प्रदेश के मुखिया से जिलाधिकारी की शिकायत भी की गई थी लेकिन जिलाधिकारी अरविन्द सिंह का नाम स्थानांतरण लिस्ट में नाम न होने के कारण फिर एक साजिश रची गई जो अब आपको वीडियो के माध्यम से दिखाई सुनाई दे रही है।

*फोन न उठने के कारणों पर बात करते है 👇*

जिलाधिकारी के पास आप समझ ही सकते है कि कितने काम होते है लेकिन फिर भी समय होने पर call भी करते है और msg भी करते रहते है. जिलाधिकारी के CUG नंबर अधिकतर स्टेनो के पास ही रहते है क्योंकि स्टेनों ही तय करते है कि CALL जिलाधिकारी को बताया जाये या नहीं…. लेकिन जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के प्रकरण में क्या स्टेनों द्वारा जिलाधिकारी को सूचना दी गई थी या नहीं क्योंकि सभी जानते है कि ज़ब मंत्री का CALL आये और एक IAS CALL न उठाये ऐसा हो ही नहीं सकता है, निश्चित रूप से स्टेनों द्वारा जिलाधिकारी को अवगत ही नहीं कराया गया होगा कि भ्रमण पर आ रही मंत्री महोदया का CALL आ रहा है. या फिर स्टेनो द्वारा CALL उठाया ही नहीं गया होगा.

जिलाधिकारी अरविन्द सिंह को जनपद से हटाने की तैयारी जोरो से चल रही है क्योंकि अरविन्द सिंह अपने बैच 2015 के सबसे तेज व्यक्ति है, क़ानून और कोर्ट दोनों की बारीकीयों से परिचित है।

बकौल अरविन्द सिंह के साथी बैच 2015 के अफसरों से ज़ब CONFERENCE की बात हुई तो बताया है कि अपने बैच में वो SIR के नाम से सम्बोधित किये जाते है. IAS अरविन्द सिंह के साथी मित्र कभी-कभी क़ानून की गहनता की जानकारी भी अरविन्द सिंह से समय- समय पर लेते रहते है…… जनपद एटा के लिए देखा जाये तो तत्कालीन जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल के बाद IAS अरविन्द सिंह का आना सुखद है.

*एक चातुर्य लॉबी नहीं चाहती है कि IAS अरविन्द सिंह एटा में रहे 👇*

मंत्री बेबी रानी मौर्य का प्रोटोकॉल क्या है और क्या होना चाहिए, यह विषय बहुत बाद है लेकिन एक मंत्री को यह अधिकार किस नियम का पैरा है कि आप सार्वजनिक स्थल पर सिविल सेवा से आये अधिकारी को इस तरह बोलेगी, शासन और प्रशासन की विधा की थोड़ी भी जानकारी महिला मंत्री को होती तो सार्वजनिक स्थल पर ऐसा बोलती ही नहीं!यही भाषा का कारण रहा जिस वजह से बेबी रानी मौर्य को राज्यपाल की सीट से हाथ होना पड़ा था क्योंकि उनका यही रवैया राज भवन में रहता था जिसकी शिकायत कई बार वहा के कर्मचारियों द्वारा केंद्र को भेजी गई थी. क्योंकि मंत्री बेबी रानी मौर्य को अफसरों को नीचा दिखाने की एक अदद शौक है।

महिला व पुष्टाहार मंत्री होने के बाद भी इस तरह का कृत्य शासन बेबी रानी मौर्य को माफ नहीं करेगा क्योंकि मंत्री और अफसर के बीच का प्रोटोकॉल मंत्री ने जिस तरह से तोड़ा है वह बड़ा शर्मनाक है।

जनता में यह भी चर्चा तेज हो चुकी है कि क्या मंत्री बेबी रानी मौर्य अपना फोन एक बार में उठा लेती है या फिर पुष्टाहार विभाग का भ्रष्टाचार खत्म करके ही एटा जनपद आई थी कि अब एटा में एक IAS अफसर को नीचा दिखाएंगे…. ऊँगली उठाएगी तो आप पर भी जनता ऊँगली उठाएगी ही..

*पी एस राजपूत*
*CONFERENCE*
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