*भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल कोर कमेटी) की नज़र में रक्षाबंधन*
भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल कोर कमेटी), नई दिल्ली और इसके संस्थापक एके बिंदुसार की विचारधारा के अनुसार, रक्षाबंधन का पावन पर्व केवल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान या व्यक्तिगत पारिवारिक संबंधों तक सीमित नहीं है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी और उसकी केंद्रीय निर्णयदात्री समिति की दृष्टि में रक्षाबंधन “सामाजिक सुरक्षा, निष्पक्ष पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्र की सांस्कृतिक अखंडता” को समर्पित एक व्यापक संकल्प दिवस है।
जिस प्रकार एक बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर सुरक्षा का भरोसा प्राप्त करती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है, ठीक उसी प्रकार भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी रक्षाबंधन को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) और समाज के बीच एक नैतिक रक्षासूत्र के रूप में देखती है।
१. मीडिया की सामाजिक जवाबदेही और रक्षासूत्र का संकल्प
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के अनुसार, रक्षाबंधन का अर्थ समाज के हर शोषित, पीड़ित और वंचित वर्ग को मीडिया के माध्यम से सुरक्षा और न्याय की गारंटी देना है।
पत्रकारों की सुरक्षा का रक्षासूत्र: संस्था का मानना है कि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करने वाले जमीनी पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना ही मीडिया जगत का असली “रक्षाबंधन” है।
सामाजिक बुराइयों से रक्षा: दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न, बाल श्रम और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों से समाज को मुक्त कराने के लिए मीडिया अपनी लेखनी और आवाज के जरिए एक सुरक्षा कवच (रक्षासूत्र) का निर्माण करता है।
२. राष्ट्रीय अखंडता, भ्रातृभाव और लोकतंत्र का संवर्धन
एक राष्ट्रीय स्तर के मीडिया संगठन के दृष्टिकोण से, रक्षाबंधन का पर्व देश की विविधता में एकता का परिचायक है:
सांप्रदायिक सौहार्द: नेशनल कोर कमेटी रक्षाबंधन को जाति, धर्म और क्षेत्र से परे मानकर संपूर्ण देश में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक तालमेल को मजबूत करने का माध्यम मानती है।
सैनिकों और कोरोना योद्धाओं के प्रति सम्मान: देश की सीमाओं पर तैनात रक्षा बलों और समाज के अग्रिम पंक्ति के सेवकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए आवाज उठाना भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के प्राथमिक संकल्पों में शामिल है।
लोकतंत्र की रक्षा: संविधान के मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्य की रक्षा करना मीडिया का परम धर्म है। रक्षाबंधन इस बात की याद दिलाता है कि पत्रकारिता को सत्ता और समाज दोनों के बीच सेतु बनकर सत्य के संरक्षण का व्रत लेना चाहिए।
३. संस्थापक एके बिंदुसार की दृष्टि: “सशक्त मीडिया, सुरक्षित समाज”
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार और नेशनल कोर कमेटी (नई दिल्ली) का यह स्पष्ट संदेश है कि यदि समाज को सही मायनों में सुरक्षित और उन्नत बनाना है, तो मीडिया को अपनी भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।
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> भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल)कोर कमेटी की नजर में रक्षाबंधन का धागा केवल धागा नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, महिला सम्मान और राष्ट्र रक्षा की वह अटूट प्रतिज्ञा है, जिसे हर पत्रकार और नागरिक को अपने जीवन में धारण करना चाहिए।
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