एटा बिग ब्रेकिंग
गरीब के इलाज की योजना पर रिश्वतखोरी का आरोप!
सकीट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आयुष्मान मित्र धर्मेंद्र यादव एवं बागवाला पर तैनात यशवीर पर गंभीर आरोप।
बेटे का इलाज कराने के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर 40 हजार रुपये मांगने का आरोप।
पीड़ित देशराज का दावा—35 हजार रुपये एक निजी मोबाइल नंबर पर ट्रांसफर कराए गए, लेकिन इसके बाद भी वैध आयुष्मान कार्ड नहीं मिला।
पीड़ित के मुताबिक, कथित तौर पर उसे फर्जी आयुष्मान और अंत्योदय कार्ड थमा दिए गए।
सबसे बड़ा सवाल— मूल निवास गढ़िया कोची, फिर अंत्योदय कार्ड में निधौली खुर्द का पता कैसे दर्ज हो गया?
मामला सिर्फ आयुष्मान मित्र तक सीमित नहीं—जिला पूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में।
अंत्योदय कार्ड जारी करने से पहले पात्रता, पुराने राशन कार्ड और दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ?
अब सवाल बड़ा है—क्या गरीब के इलाज की सरकारी योजना में भी पैसों का खेल चल रहा था?
क्या स्वास्थ्य और पूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी?
आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई तो आयुष्मान से लेकर अंत्योदय कार्ड तक की पूरी प्रक्रिया की पोल खुल सकती है।
न्यूज़ का सीधा सवाल—
अगर आरोप सही हैं तो गरीब के हक की योजना में जिम्मेदार कौन?
कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?












