*संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद*
*-आगरा मंडल में युद्धस्तर पर राहत और बचाव की तैयारियां*
*आगरा।* मंडल में मानसूनी बारिश और यमुना, चंबल, उटंगन तथा अन्य सहायक नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासनिक महकमा पूरी तरह सतर्क हो गया है। पूरे मंडल के सभी चार जिलों आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में बाढ़ की किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की गई हैं। सभी उपजिलाधिकारियों को नदियों और तालाबों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में त्वरित कदम उठाए जा सकें।
*यमुना और चंबल पर विशेष निगरानी*
आगरा जिले में यमुना, चंबल और उटंगन नदियों के उफान के खतरे को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं। पिनाहट, बाह, एत्मादपुर और फतेहाबाद जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। आगरा में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत शिविरों और सुरक्षित आश्रय स्थलों का चिन्हीकरण पूरा हो चुका है। इसी तरह मथुरा जिले में यमुना नदी के खादर क्षेत्रों, जिनमें वृंदावन, मांट, महावन और छाता तहसीलें शामिल हैं, में तटबंधों की सघन निगरानी की जा रही है। मथुरा प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित होने वाले ग्रामीणों के लिए सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली है।
*जलभराव और कटाव को रोकने के इंतजाम*
फिरोजाबाद जिले में यमुना नदी के तटीय गांवों के निवासियों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है। इसके अलावा, शिकोहाबाद व टूंडला क्षेत्रों में जलभराव की समस्या और भू-कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की टीमें मुस्तैद हैं। वहीं मैनपुरी जिले में ईसन और काली नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर रखी जा रही है। मैनपुरी प्रशासन ने निचले और जलभराव वाले इलाकों में पानी की त्वरित निकासी के लिए उच्च क्षमता वाले पंपों की व्यवस्था की है।
*स्वास्थ्य, पशुपालन और आपातकालीन सेवाओं की पुख्ता व्यवस्था*
संपूर्ण आगरा मंडल में आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। खाद्य सामग्री और राहत किट वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। बाढ़ के दौरान बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हर ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें (आरआरटी) तैनात की हैं। आशा कार्यकर्ताओं को भी निर्देशित किया गया है और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, पशुओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों (गौशालाओं) का चिन्हीकरण कर उनके लिए चारे का पुख्ता प्रबंध किया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोरों, एनडीआरएफ और मोटर बोट्स (फ्लोटर्स/स्टीमर्स) की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर ली गई है।













