*पेयजल संकट पर छावनी परिषद कार्यालय में हंगामा, अधिकारियों का घेराव*
आगरा। छावनी क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे पेयजल संकट को लेकर मंगलवार को लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू के नेतृत्व में क्षेत्रीय लोगों ने छावनी परिषद कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों का घेराव किया और पानी की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। लोगों का कहना है कि गंगाजल की आपूर्ति बंद होने, कई सबमर्सिबल खराब पड़े होने और कई पानी की टंकियां वैकल्पिक व्यवस्था के बिना तोड़े जाने से संकट गंभीर हो गया है।
खारे पानी की आपूर्ति भी सुबह-शाम महज 15 से 20 मिनट तक और कम दबाव के कारण पर्याप्त नहीं हो पा रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हर सप्ताह छावनी परिषद कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान अधिकारियों से जनसुविधाओं और विकास कार्यों का हिसाब मांगा गया तथा परिषद में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वत लेकर निजी भर्ती के आरोप भी लगाए गए। लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को शिकायती पत्र भेजकर समाधान की मांग की है। छावनी क्षेत्र में लंबे समय से बनी पेयजल समस्या ने मंगलवार को लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। पानी की पर्याप्त और नियमित आपूर्ति नहीं होने से परेशान क्षेत्रीय लोग पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू के नेतृत्व में छावनी परिषद कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों का घेराव किया। लोगों ने नारेबाजी करते हुए पेयजल संकट के स्थायी समाधान की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी लोगों को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। नियमित आपूर्ति नहीं होने के कारण घरों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है और लोगों के सामने पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है। आक्रोशित लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पेयजल संकट का समाधान जल्द नहीं किया गया तो अब हर सप्ताह छावनी परिषद कार्यालय पहुंचकर हल्लाबोल किया जाएगा और आंदोलन किया जाएगा। पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू ने बताया कि छावनी के वार्ड दो और तीन समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय से पानी की आपूर्ति प्रभावित चल रही है। उनके अनुसार गंगाजल की आपूर्ति बंद है और कई सबमर्सिबल भी खराब पड़ी हैं। इससे उन क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता और प्रभावित हुई है, जहां लोग पहले से ही नियमित आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना बालूगंज, शहजादी मंडी और कंपनी गार्डन की पानी की टंकियां भी तोड़ दी गईं। उनका कहना है कि इन टंकियों के हटने के बाद पहले से मौजूद समस्या और गंभीर हो गई तथा पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया। होने की बात सामने आने के बाद लोगों ने इसे गंभीर जनसमस्या बताते हुए स्थायी समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर भी था कि संकट के बीच पुरानी टंकियां तोड़ी गईं, लेकिन उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। बालूगंज, शहजादी मंडी और कंपनी गार्डन की टंकियों का मामला उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पानी की समस्या के बीच भंडारण व्यवस्था का कमजोर होना संकट को और बढ़ाता है। लोगों ने मांग की कि जलापूर्ति से जुड़े सभी संसाधनों की स्थिति की समीक्षा की जाए और जहां सबमर्सिबल खराब हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराया जाए। साथ ही कम दबाव की समस्या का भी समाधान किया जाए, ताकि उपलब्ध पानी वास्तव में लोगों के घरों तक पहुंच सके।
लोगों ने कहा कि पेयजल संकट का असर सीधे तौर पर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। सुबह-शाम सीमित समय के लिए पानी आने और कम दबाव के कारण लोगों को पानी जमा करने में परेशानी होती है। खारे पानी की सीमित आपूर्ति भी जरूरत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। ऐसे में लोग लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि समस्या का समाधान केवल आश्वासन से नहीं होगा, बल्कि नियमित आपूर्ति, पर्याप्त दबाव, खराब सबमर्सिबल की मरम्मत, वैकल्पिक जल व्यवस्था और पर्याप्त टैंकरों की उपलब्धता जैसे ठोस कदम उठाने होंगे।
मंगलवार का घेराव इसी बढ़ते असंतोष का परिणाम रहा। लोगों ने अधिकारियों से जवाब मांगा और अपनी मांगों को सामने रखा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को नियमित रूप दिया जाएगा। हर सप्ताह छावनी परिषद कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी के साथ लोगों ने संकेत दिया कि अब वे पेयजल संकट के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री को शिकायती पत्र भेजकर समाधान की मांग किए जाने से मामला स्थानीय स्तर से आगे भी पहुंचाया गया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि छावनी परिषद पेयजल संकट को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और कब तक क्षेत्र में पर्याप्त एवं नियमित जलापूर्ति बहाल हो पाती है।













