शाबाश इंदौर..
.झोपड़ी में रहता था एक शहीद का परिवार।
युवाओं ने 11 लाख इकट्ठा कर बना दिया सुंदर आवास… और 15 अगस्त 2019 को शहीद की पत्नी को गिफ्ट भी कर दिया था….
बात इंदौर के बेटमा क्षेत्र में स्थित पीर पीपल्या गांव की है। साल 1992 में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए त्रिपुरा में BSF जवान मोहन सिंह शहीद हो गए थे। वक्त बीतता गया, तारीखें बदलती गईं, लेकिन शहीद के जाने के बाद पीछे छूटे उनके परिवार की सुध लेने वाला कोई न रहा। उनकी पत्नी, राजू बाई, वर्षों तक बेहद तंगहाली में उसी टूटी-फूटी, जर्जर झोपड़ी में रहने को मजबूर रहीं, जिसकी तस्वीर अक्सर सोशल मीडिया पर “देश के जवान का घर” लिखकर वायरल होती है।
जब गांव के ही करीब 20-25 युवाओं की नजर इस जर्जर झोपड़ी और शहीद की पत्नी के इस हाल पर पड़ी, तो उनका खून खौल उठा। उन्होंने तय किया कि देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद के परिवार को इस हाल में नहीं रहने देंगे। इन युवाओं ने मिलकर एक मुहिम शुरू की—’वन चेक-वन साइन’ (One Cheque-One Sign)।
गांव के युवाओं ने हाथ मिलाया, कदम से कदम मिलाए और आपसी सहयोग तथा चंदे के जरिए ₹11 लाख का कोष जुटाया। मकसद सिर्फ एक था—उस जर्जर झोपड़ी को मिटाकर वहां एक सम्मानजनक, पक्का और सुंदर आशियाना बनाना।
मेहनत रंग लाई। स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का पावन अवसर आया। युवाओं ने न केवल शहीद की पत्नी राजू बाई को नए मकान की चाबी सौंपी, बल्कि सम्मान की एक ऐसी मिसाल कायम की जिसे देखकर पूरा देश भावुक हो उठा। गृह प्रवेश के दिन, गांव के बेटों ने अपनी हथेलियां जमीन पर बिछा दीं और शहीद की वीरांगना पत्नी को अपनी हथेलियों पर पैर रखवाकर नए घर के अंदर आदरपूर्वक प्रवेश कराया।
इसके साथ ही, युवाओं ने अपने गांव के नायक शहीद मोहन सिंह की एक प्रतिमा भी गांव में स्थापित की, ताकि आने वाली हर पीढ़ी को अपने वीर सपूत के बलिदान पर गर्व हो सके।
सोशल मीडिया पर दिखती वह जर्जर झोपड़ी भले ही एक व्यवस्था की लाचारी की तस्वीर हो, लेकिन उस झोपड़ी की जगह बना नया पक्का मकानं, भारत की मिट्टी और उसके युवाओं के दिलों में जीवंत देशप्रेम और संवेदना की सबसे खूबसूरत दास्तान है।













