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तिरंगा हाथ में लेने निकले थे बच्चे, रास्ते में थम गई गाड़ी, रिपोर्ट अनिल सोलंकी

*डीएम साहब एक नज़र इधर भी…….*

*आजादी के 79 साल बाद भी ‘दलदल’ में विकास! तिरंगा फहराने स्कूल जा रहे बच्चों की गाड़ी कीचड़ में धंसी*

*आजादी के 79 साल बाद भी पिथनपुर के नौनिहाल कीचड़ में फंसे, स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल जा रही गाड़ी एक घंटे तक दलदल में धंसी रही*

एटा। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के 79 वर्ष पूरे हो चुके हैं। देश ने चांद तक पहुंचने से लेकर डिजिटल क्रांति तक का सफर तय कर लिया, लेकिन गांव पिथनपुर में विकास आज भी कीचड़ में धंसा नजर आया। स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल में तिरंगा फहराने निकले नौनिहालों की गाड़ी रास्ते में ऐसे दलदल में फंस गई कि करीब एक घंटे तक बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए संघर्ष करते रहे। आखिरकार ग्रामीणों ने मोर्चा संभाला और धक्का लगाकर गाड़ी को दलदल से बाहर निकाला।

*तिरंगा हाथ में लेने निकले थे बच्चे, रास्ते में थम गई गाड़ी*

मारहरा ब्लॉक के गांव पिथनपुर में स्वतंत्रता दिवस को लेकर बच्चों में खासा उत्साह था। बच्चे स्कूल की गाड़ी से तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे। लेकिन स्कूल पहुंचने से पहले ही अधूरे खड़ंजे और कीचड़ से भरे रास्ते ने बच्चों की राह रोक दी।

स्कूल की गाड़ी दलदल में धंस गई। चालक ने गाड़ी निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन पहिए कीचड़ में धंसते चले गए। देखते ही देखते बच्चों का इंतजार बढ़ता गया। करीब एक घंटे तक नौनिहाल उसी दलदल में फंसे रहे। जिस दिन उन्हें आजादी का जश्न मनाना था, उसी दिन उन्हें रास्ते से निकलने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

*बच्चों की मायूसी देख ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा*

गाड़ी को फंसा देख आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। बच्चों की परेशानी और मायूसी देखकर ग्रामीणों ने एकजुट होकर गाड़ी को धक्का लगाना शुरू किया। कई लोगों की सामूहिक कोशिश के बाद किसी तरह गाड़ी दलदल से बाहर निकल सकी।

यानी जिस काम की जिम्मेदारी व्यवस्था और विकास तंत्र की थी, उसे आखिर ग्रामीणों को अपने हाथों से पूरा करना पड़ा।

*खड़ंजा डला, लेकिन रास्ता अधूरा छोड़ दिया!*

ग्रामीणों के अनुसार इस रास्ते पर खड़ंजा ब्लॉक प्रमुख रवि वर्मा ने डलवाया था डलवाया गया था, लेकिन काम पूरा नहीं कराया गया। बारिश होते ही अधूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल गया। अब यही रास्ता ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है।

सवाल सिर्फ एक गाड़ी के फंसने का नहीं है। सवाल उस विकास मॉडल का है, जिसमें कागजों पर रास्ते बनते हैं, लेकिन जमीन पर बच्चे कीचड़ में फंसते हैं।

*जिम्मेदारों से सवाल किया तो फोन ही नहीं उठा*

मामले को लेकर मारहरा ब्लॉक प्रमुख रवि वर्मा से संपर्क कर यह जानने का प्रयास किया गया कि खड़ंजे का काम अधूरा क्यों छोड़ा गया और बच्चों को इस बदहाल रास्ते से क्यों गुजरना पड़ रहा है। लेकिन उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।

वहीं मारहरा बीडीओ सुधाकर दुबे से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनका फोन नॉट रीचेबल आता रहा।

*एडीओ पंचायत बोले—जांच कर कार्रवाई करेंगे*

मामले में एडीओ पंचायत दीपक गुप्ता से बात की गई। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

*सबसे बड़ा सवाल—तिरंगे तक पहुंचने के लिए भी क्या बच्चों को दलदल पार करना होगा?*

देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। ग्राम पंचायत से लेकर क्षेत्र पंचायत और जिला स्तर तक जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की जिम्मेदारी गांवों तक विकास पहुंचाने की है। लेकिन पिथनपुर की तस्वीर उन तमाम विकास के दावों को आईना दिखा रही है।

जिस दिन बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर देश की आजादी का जश्न मनाने निकले, उसी दिन उनका वाहन कीचड़ में धंस गया। करीब एक घंटे तक नौनिहाल फंसे रहे और अंत में ग्रामीणों ने धक्का लगाकर उन्हें बाहर निकाला।

*आजादी का पर्व था… तिरंगा फहराना था… लेकिन पिथनपुर में विकास खुद दलदल में फंसा नजर आया। इससे बड़ा सवाल आखिर क्या हो सकता है?*

 

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