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बिजली वाले इंजीनियर, नक्शों में उलझे!* *कागज़ों में विकास, जमीन पर विराम! BMFNEWS

*बिजली वाले इंजीनियर, नक्शों में उलझे!*

 

*कागज़ों में विकास, जमीन पर विराम!*

 

*संवाददाता मोहम्मद सैफ साबरी*

उत्तर प्रदेश शासन के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने 15 जनवरी 2019 को एक साफ-सुथरा आदेश जारी किया था। विशेष सचिव संजीव सिंह के हस्ताक्षर से निकले इस हुक्म में कायदे की बात कही गई थी कि विकास प्राधिकरणों में अवैध निर्माण रोकने और प्रवर्तन का काम सिर्फ सिविल इंजीनियरों से ही कराया जाए। बिजली या मशीन वाले, विद्युत/यांत्रिक इंजीनियरों को तभी इस काम पर लगाया जाए जब सिविल इंजीनियरों का टोटा हो। लेकिन साहब, शासन के इस आदेश की स्याही भी ठीक से सूखी नहीं थी कि महकमे ने इसकी धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

 

विजिलेंस द्वारा विकास प्राधिकरणों में जब से मिलीभगत अवैध वसूली और बिचौलियों पर शिकंजा कसा है, तब से महकमे में भूचाल आया हुआ है। सबको लगा था कि अब हवा बदलेगी और व्यवस्था सुधरेगी, पर यहाँ तो वही हाल हुआ, खोदा पहाड़ और निकली चुहिया, ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर सिर्फ कुर्सियों के पते बदले गए हैं, हालात नहीं, एक कमरे से उठकर बाबूजी दूसरे कमरे में बैठ गए, पर लूट-खसोट और पुराना ढर्रा जस का तस बरकरार है।

 

अब जरा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष महोदय का वह करिश्मा देखिए, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे तकनीकी जानकारों का सिर चकरा जाए। हाल ही में इंजीनियरों की जो नई तैनाती सूची आई है, उसका हिसाब-किताब बड़ा दिलचस्प है। उस लिस्ट में कुल 15 इंजीनियरों को मैदान में उतारा गया है।

 

सिविल के नाम पर सिर्फ एक अकेला चेहरा, विपिन बिहारी राय, 6 इंजीनियर स्मारक समिति वाले, 7 इंजीनियर बिजली और विद्युत/यांत्रिक वाले और एक जनाब ऐसे हैं जिनका अता-पता ही गायब है।

 

अब आप ही सोचिए! जिनका ईंट, सीमेंट, कंक्रीट और नक्शों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं, जो जिंदगीभर बिजली के तार और मशीनें जोड़ते रहे, उन्हें जमीन पर अवैध निर्माण रोकने और नक्शे नापने के लिए भेज दिया जाए, तो वे क्याखाक खाक छानेंगे? जिन्हें नक्शा पढ़ना तक नहीं आता, वे जब प्रवर्तन दस्ते की कमान संभालेंगे तो माथापच्ची करने के बजाय शॉर्टकट तो ढूंढेंगे ही।

 

फिर क्या है? वे इन झंझटों को छोड़कर सीधा बिल्डरों की चौखट पर हाजिरी लगाते हैं। तार से तार जोड़ने वाले ये इंजीनियर अपनी जेब और अपनी तिजोरी मजबूत करने के हुनर में माहिर हो जाते हैं। जब ऊपर बैठे आकाओं को ही नियमों की परवाह नहीं है, तो नीचे बैठे बाबू और इंजीनियर क्यों देशभक्ति का चोला पहनकर ईमानदारी का ढोल पीटेंगे? वे भी अपनी पॉकेट और अपनी छवि चमकाने में जुट जाते हैं।

 

इस लूट-खसोट और अंधेरगर्दी का हिसाब मांगने वाला लखनऊ विकास प्राधिकरण में कोई नहीं है। यह महकमा किसी भी जवाबदेही को नहीं मानता, यहाँ अगर आपने गलती से भी कोई तीखा सवाल पूछ लिया, तो आपकी शामत आ जाएगी और रातों-रात आपकी फाइल तैयार करके विजिलेंस को थमा दी जाएगी।

 

इसलिए भलाई इसी में है कि आँखें बंद रखिए, चुपचाप तमाशा देखते रहिए और अपनी नौकरी की सलामती मनाते रहिए!

 

 

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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