पंकज कुमार की खास रिपोर्ट।
प्रयागराज के बारा तहसील में भ्रष्टाचार का ‘बारा’ कांड – किसान बोले, “पैसे दो तभी काम होगा”।
आप देख रहे हैं भारतीय मीडिया फाउंडेशन का विशेष खुलासा पार्ट 2,
प्रयागराज की बारा तहसील इन दिनों भ्रष्टाचार के आरोपों से दहल रही है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन की प्रयागराज टीम के खुलासे के बाद यहां हड़कंप मच गया है।
किसानों का आरोप है कि बारा तहसील में बिना “सुविधा शुल्क” के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। पीड़ित किसानों के मुताबिक तहसील के बाबू प्रदीप सरोज ने खुलेआम कहा – “हम यहां कमाने आए हैं। पैसा दोगे तभी काम होगा। अगर हम पैसे नहीं लेंगे तो एसडीएम साहब को हिस्सा कैसे देंगे?”
आरोप सिर्फ यहीं नहीं रुके। किसानों ने कहा कि कुछ स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर भी बाबू के इशारे पर सक्रिय हैं और किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ने का काम कर रहे हैं। साथ ही आरोप लगा कि जब प्रदीप सरोज का ट्रांसफर हुआ तो मोटी रिश्वत देकर उसे रुकवा लिया गया, ताकि उगाही का खेल चलता रहे। इस मामले में पूर्व एसडीएम गणेश कनौजिया पर भी गंभीर आरोप लगे हैं।
आक्रोशित किसानों ने अब मोर्चा खोल दिया है। उनकी मांग है कि आरोपी बाबू की चल-अचल संपत्ति की जांच हो, बाबू और प्रॉपर्टी डीलरों की कॉल डिटेल निकाली जाए और जांच के बाद दोषियों को जेल भेजा जाए।
लेकिन सवाल ये है कि प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप क्यों हैं? क्या ये चुप्पी भ्रष्टाचार को बचाने की कोशिश है?
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने साफ कर दिया है – जब तक कार्रवाई नहीं होगी, मुहिम जारी रहेगी। बारा की जनता अब सिर्फ न्याय का इंतजार कर रही है।
संगठन के संस्थापक एके बिंदुसार ने कहा कि किसानों का बयान एवं कुछ दस्तावेज इकट्ठा किए गए हैं अभी इन्वेस्टिगेशन जारी हैं।
क्या शासन-प्रशासन बारा तहसील को भ्रष्टाचार के चंगुल से मुक्त करा पाएगा? हम आगे पार्ट 3 में और नए खुलासे लेकर आएंगे।
बने रहिए भारतीय मीडिया फाउंडेशन के साथ पार्ट 3 में हम जोरदार खुलासा करेंगे।









