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27 धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की याचिका, अदालत ने उठाए अहम सवाल; आदेश सुरक्षित, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*27 धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की याचिका, अदालत ने उठाए अहम सवाल; आदेश सुरक्षित*

 

 

आगरा। टेढ़ी बगिया स्थित बीच सड़क पर बनी रहमानी मस्जिद सहित 27 कथित अवैध मस्जिदों, मजारों और दरगाहों के ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर दायर वाद पर शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) मृदुल दुबे की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने वादी की ओर से दायर याचिका के दायरे और अधिकार को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया। आदेश शनिवार तक आने की संभावना जताई जा रही है। यह वाद योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष एवं तेजोमहालय प्रकरण के पक्षकार कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर के माध्यम से दायर किया है। वाद संख्या 819/26 में आगरा के जिलाधिकारी, नगर निगम के नगर आयुक्त, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता तथा छावनी परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संपदा अधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सबसे पहले यह जानना चाहा कि वादी को यह वाद दायर करने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त है। इस पर वादी के अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर ने अदालत को बताया कि यह वाद प्रतिनिधि क्षमता में दायर किया गया है और वादी को ऐसा करने का विधिक अधिकार प्राप्त है। इसके बाद न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए पूछा कि क्या वादी को केवल मस्जिदों, मजारों और दरगाहों के बीच सड़क अथवा सरकारी भूमि पर बने होने की जानकारी है, या फिर मंदिरों के संबंध में भी ऐसी कोई जानकारी है। इस पर अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वादी ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर वाद दायर किया है, जिनकी उन्हें जानकारी थी। जिन मामलों की जानकारी नहीं है, उनका उल्लेख याचिका में नहीं किया गया है। याचिका में बताया गया है कि कुंवर अजय तोमर ने 20 अप्रैल 2026 को धारा 80 सीपीसी के तहत आगरा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता तथा छावनी परिषद के अधिकारियों को नोटिस भेजकर टेढ़ी बगिया की रहमानी मस्जिद सहित 27 धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की मांग की थी। वादी का कहना है कि नोटिस दिए जाने के 60 दिन बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण लेते हुए वाद दायर किया। याचिका में कहा गया है कि सरकारी भूमि, सड़क, फुटपाथ, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर बने धार्मिक स्थलों के कारण यातायात बाधित होता है तथा अतिक्रमण की स्थिति पैदा होती है। ऐसे निर्माणों को हटाया जाना जनहित में आवश्यक है। वादी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा है कि सार्वजनिक भूमि पर बने अवैध धार्मिक स्थलों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है और उन्हीं के अनुपालन की मांग की जा रही है।

कुंवर अजय तोमर इससे पहले भी एमजी रोड स्थित बीच सड़क पर बनी एक मजार को हटाने के लिए न्यायालय में वाद दायर कर चुके हैं। उस मामले में प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए संबंधित मजार को हटाकर दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। अब टेढ़ी बगिया सहित 27 धार्मिक स्थलों से जुड़े इस मामले में अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। मामले में न्यायालय का फैसला आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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