*नोएडा के पत्रकार पंकज पराशर की जमानत मंज़ूर

करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जो लिखा है वो नोएडा पुलिस प्रशासन के कामकाज का आईना है।*
हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 के अपने आदेश में साफ लिखा है कि पंकज पराशर के ख़िलाफ़ अधिकतर केस स्थानीय पुलिस की शह पर दर्ज किए गए।
हाईकोर्ट अपने आदेश में लिखता है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पंकज पराशर लगातार पुलिस प्रशासन की कारगुजारियों को उजागर कर रहे थे,
इसलिए उन्हें झूठा फँसाया गया है।
पंकज पराशर का मामला एक पत्रकार पर किसी अतिशय ताकतवर अधिकारी की खुन्नस के परिणाम स्वरूप,
कानून के सीमातोड़ दुरुपयोग के आरोपों का भयावह उदाहरण है!!
पहले उन्हें एक मामले में जेल भेजा गया और उसके बाद जब-जब ज़मानत की बारी आती, कोई नया मामला दर्ज कर दिया जाता।
आज तक उन पर करीब 17 मामले दर्ज हो चुके हैं।
दो-दो गैंगस्टर लगा दिए गए।
जेल बदल कर नोएडा से प्रतापगढ़ कर दी गई।
पर समय बदलता है।
आप अपनी शक्ति का कितना भी दुरुपयोग कर लें पर समय से शक्तिशाली कुछ भी नहीं।
इसीलिए कहा जाता हैं कि शक्ति के दुरुपयोग में मदांध हो चुके हर हाथी को समय की चींटियों से डरना चाहिए!!









