क्या 7 साल बाद भी नहीं बदला खेल? | रेणुकूट में गैस वितरण पर फिर उठे गंभीर सवाल!
क्या आम उपभोक्ता को पूरा हक मिल रहा है, या फिर उसके हिस्से की गैस रास्ते में ही गायब हो रही है?
आज रेणुकूट के काली मंदिर के सामने गैस वितरण की सूचना मिलने पर मैं मौके पर पहुँचा। तब तक लगभग 35–40 सिलेंडर वितरित किए जा चुके थे।
संयोग से एक उपभोक्ता का सिलेंडर मौके पर उपलब्ध था। जब मैंने कर्मचारियों से उसका वजन कराने का अनुरोध किया, तो पहले बताया गया कि वजन करने का उपकरण उपलब्ध नहीं है। बाद में एक उपकरण की व्यवस्था की गई और सार्वजनिक रूप से सिलेंडर का वजन किया गया।
वजन में लगभग डेढ़ किलो की कमी दिखाई दी। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो मैंने फेसबुक लाइव के माध्यम से सार्वजनिक किया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वितरण के समय वजन जाँचने की व्यवस्था ही उपलब्ध नहीं रहती, तो उपभोक्ता कैसे सुनिश्चित करे कि उसे पूरा गैस सिलेंडर मिला है?
यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब सात वर्ष पहले भी इसी एजेंसी से जुड़े गैस वितरण और अवैध रिफिलिंग के आरोपों पर समाचार प्रकाशित हुए थे, जिनके बाद प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी। अब यदि फिर ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह संबंधित विभागों के लिए गंभीर समीक्षा का विषय है।
मौके पर मौजूद कुछ उपभोक्ताओं ने कैमरे पर यह भी कहा कि वजन की जाँच सामान्यतः नहीं कराई जाती और मांग करने पर टालमटोल की जाती है। इन बयानों की निष्पक्ष जाँच संबंधित विभागों द्वारा की जानी चाहिए।
यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि एक गंभीर जनहित के प्रश्न को सामने रखने के लिए है। यदि एजेंसी या संबंधित अधिकारियों का कोई पक्ष या स्पष्टीकरण है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब सवाल जनता पूछ रही है— क्या उपभोक्ताओं को पूरा गैस मिल रहा है? क्या वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी हो रही है? और यदि पहले कार्रवाई हो चुकी थी, तो ऐसी शिकायतें फिर क्यों सामने आ रही हैं?
मैं हूँ डॉ. अजीत कुशवाहा। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आवाज। सवाल सत्ता से नहीं, व्यवस्था से है… क्योंकि जनहित सर्वोपरि है।#Renukut #Sonbhadra #IndianGas #ConsumerRights #InvestigativeJournalism #BhrashtacharKeKhilafEkAawaz #AjitKushwaha
“यदि संबंधित एजेंसी या अधिकारियों का कोई पक्ष होगा, तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।”









