*जौनपुर: खंभा गाड़ने के विवाद में 55 वर्षीय किसान मलिक चंद्र यादव की हत्या, न्याय के लिए शव के साथ धरने पर बैठे परिजन।*
*भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के हस्तक्षेप के बाद मृतक के संस्कार की कार्रवाई की गई।*
जौनपुर:
मीरगंज थाना क्षेत्र के कमासिन गांव में बिजली का खंभा और तार लगाने को लेकर हुआ मामूली विवाद एक किसान मानिक चंद्र यादव की जान पर भारी पड़ गया। इस खूनी संघर्ष में 55 वर्षीय मानिक चंद यादव की जान चली गई। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल है और आक्रोशित परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के बजाय दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, मानिक चंद यादव अपने खेत में कार्य कर रहे थे, तभी पट्टीदारों के साथ बिजली का तार और खंभा गाड़ने को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि गोल गिरोह बनाकर जान से मारने की नीयत से धक्का-मुक्की के दौरान मानिक चंद को इतनी बेरहमी से लाठी डंडे एवं लात घुसो से मारते पीटते हैंडपंप के ठीहे पर जोर से धकेल दिया गया, जिससे उनके सिर एवं कई जगह अंद्ररूनी गंभीर चोट आई और घटना स्थल पर उनकी मृत्यु हो गई।
पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर निम्नलिखित व्यक्तियों को नामजद किया गया है:
1. विनय कुमार (पिता: स्व. रामनरायण)
2. लालू (पिता: राजबली)
3. पवन (पिता: चंदबली)
4. बृजेश यादव (मुख्य आरोपी)
घटना के बाद पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम तो करा लिया है, लेकिन परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हैं। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सभी नामजद आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आते, वे धरना जारी रखेंगे। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में सुस्ती बरतने का गंभीर आरोप लगाया है।
इस पूरे प्रकरण को भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एके बिंदुसार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी की पुरजोर मांग की हैं
मीरगंज थानाध्यक्ष अरविंद सिंह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कहा कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
परिजनों की प्रमुख मांगें
सभी नामजद आरोपियों को तुरंत पुलिस हिरासत में लिया जाए।
घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच हो ताकि दोषियों को सख्त सजा मिले।
पीड़ित परिवार ने भविष्य की अनहोनी को देखते हुए प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए और प्रशासन को तब तक चुप नहीं बैठने दिया जाएगा जब तक दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होती।








