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राम के नाम पर धंधा, जिलाधिकारी की आँखों में झूठ की धूल,BMF News

*राम के नाम पर धंधा, जिलाधिकारी की आँखों में झूठ की धूल!👇*

 

जनपद एटा में सैनिक छावनी पर आयोजित प्राचीन राम लीला आयोजन में बड़ा घोटाला सामने आ रहा है. सूत्र बता रहे है कि *राम लीला कमेटी बिना शासकीय अनुमति व बिना महत्वपूर्ण विभागों की NOC के आयोजन कर रही है*.

 

आरोप यह भी है कि राम लीला कमेटी द्वारा अभी तक जिलाधिकारी एटा को कमेटी का पूर्व ऑडिट नहीं दिखाया है जबकि *पूर्व जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल व प्रेम रंजन सिंह द्वारा राम लीला कमेटी को अब तक के खर्चे व दुकानदारों से बसूली धन को लेकर कई बार पूर्व जिलाधिकारियो द्वारा पत्र सहित व्यक्तिगत भी कहा गया था* किन्तु रामलीला कमेटी अभी तक ऑडिट क्यों नहीं करा सकी है.प्रश्न तो बनता ही है।

 

 

*आरोप गहरा रहे है! शुरू हुआ संकट का दौर 👇*

 

राम के नाम पर अगर धंधा हो रहा है तो फिर सोसाइटी GST के दायरे में क्यों नहीं है. *करोडो के इस खेल को GST सहित कई सरकारी उपक्रमों में पंजीकृत क्यों नहीं किया गया है*. आखिर इतने बड़े आयोजन में अगर किसी भी तरह की बड़ी दुर्घटना होती है आम जनता व दुकानदारों का बीमा इत्यादि क्यों नहीं किया गया है। आग लगने जैसी घटनाओ को रोकने के लिए कमेटी फायर विभाग व सुरक्षा विभाग से क्या अनुमति लेती है।

 

*सुरक्षा मानको* को अनदेखा करके झूलो को लगाया जाता है👇

 

वर्तमान जिलाधिकारी एटा को कमेटी के पूर्व पदाधिकारी अनिल कुमार शर्मा द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि कमेटी पूर्व से ही आगरा चिट फंड में रजिस्ट्रेशन अवधि 2026 से 2031 तक नवीनीकरण हो चूका था। आखिर क्यों नई कमेटी फर्जी तरीके से पंजीकृत की गई है।तमाम आरोपों के साथ शिकायतकर्ता द्वारा 22 सितंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत की गई है.

 

*पूर्व जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने क्या किया!👇*

 

पूर्व अधिकारी द्वारा राम लीला कमेटी के एक बड़े गोरखधंधे पर प्रहार किया था।जिसमे यह रामलीला कमेटी दीपावली पर पटाखो की दुकानदारो को सैनिक छावनी पर लगवा कर अवैध बसूली करती थी जिस बसूली को खत्म करते हुए IAS अंकित कुमार अग्रवाल द्वारा दीपावली पर लगने वाली पटाखों की दुकानों को इस कमेटी के अवैध बसूली धंधे से बाहर कर एक नया इतिहास लिखा था। जनपद एटा की आम जनता आज भी याद करती है. इसी तरह से राम लीला कमेटी के इस गोरखधंधे पर एक गहरा प्रहार करने की बेहद सख्त आवश्यकता है जिससे आस्था को धंधा बनाने वालों के चेहरे समाज के सामने उजागर हो सके। *वर्तमान जिलाधिकारी एम. अनुमोझी से जनपद एटा की जनता को बेहद आशा है* कि राम लीला कमेटी के माफियाओ के खिलाफ क़ानूनी मुकदमा दर्ज हो और रामलीला कमेटी प्रशासन की अध्यक्षता में बने व देखरेख में रामलीला का संचालन हो.जिससे गाँव अंचल तक राम की महिमा का गुणगान पहुंच सके. आधुनिकता के बहाव में वर्तमान कमेटी गोरखधंधे में पूर्णरूप से संलिप्त हो चुकी है इस सिण्डिकेट को खत्म करने का शायद अब समय आ चूका है।

 

*आपको महत्वपूर्ण जानकारी देते है 👇*

 

इस खेल में पहले भी झगड़े हुए है क्योंकि राम लीला कमेटी सैनिक छावनी को commercial प्रयोग में लिए जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं रखती है यह अधिकार मात्र जिला प्रशासन के पास सुरक्षित है। इस भूमि को COMMERCIAL प्रयोग में लेने के लिए जिला प्रशासन की शासकीय कमेटी होना बेहद जरुरी है. राम लीला कमेटी सैनिक छावनी आगरा को लिखित में यह कह कर आती है कि रामलीला का संचालन जिला प्रशासन की कमेटी ही देखती है किन्तु जनपद एटा को यह भलीभांति पता है कि राम लीला कमेटी एक माफियाओ का अड्डा बनता जा रहा है। इस पुरे खेल के बड़े मास्टर माइंड उमाशंकर गिरी है जिन्होंने इस कमेटी में जनपद स्तर पर कभी चुनाव आमंत्रित नहीं किये है। इसी से पता चलता है कि कमेटी भ्रष्टाचार में लिप्त है।राम लीला कमेटी लगभग 1 करोड़ से 1.50 करोड़ तक की दुकानदारों से अवैध उगाही करती है जिस उगाही में उमाशंकर गिरी के इशारे पर कई लोगों को कमेटी में रख कर हिस्सेदारी रखी जाती है. पूर्व बर्ष 2025 में वर्तमान बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता व अनिल कुमार शर्मा के साथ विवाद की स्थिति बनी थी जो कि कई शिकायतो के बाद भी नहीं सुलझी थी किन्तु इस बार बीजेपी जिलाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता के कमेटी में शामिल होने के बाद ही अनिल कुमार शर्मा को बाहर रखने की अहम शर्त पर ही राम लीला होने देने की बात सामने आई है.

 

यह पूरा खेल जनपद एटा में 1 करोड़ से 1.50 करोड़ तक के धन का है जिसमे बड़ा बंदरबाट किया जाता है. पूर्व जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह की शिकायत भी शासन में बीजेपी नेता द्वारा की गई थी कि उक्त अधिकारी इस अवैध रामलीला कमेटी को व्यावसायिक रूप देने में मदद कर रहे है. विवादित मामले मे पूर्व सांसद के हस्तक्षेप के बाद मामला वही रुक गया था.

 

किन्तु पिछली बार ही राम लीला कमेटी ने जिलाधिकारी के सामने यह कहा था कि आगे से राम लीला कमेटी को व्यावसायिक रूप नहीं दिया जायेगा, आस्था का केंद्र बिंदु बने रहने देंगे किन्तु इस बार पुनः खेल करोडो में फ़स गया है.

 

*👉क्या राम लीला कमेटी GST के दायरे में आएगी या नहीं! यही सवाल सबसे बड़ा है!*

 

*👉क्या राम लीला कमेटी का ऑडिट FILE बनेगी या नहीं?*

 

*👉क्या भगवान श्री राम माफियाओ के हाथो से आजाद होंगे!*

 

*👉क्या राम के धंधे पर फिर बड़ा खेल होगा.*

 

*पी एस राजपूत*

एटा

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