*न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग, डिजिटल आचरण और राजनीतिक तटस्थता को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी*
——————————————-
*न्यायालय परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, रील्स बनाने एवं लाइव स्ट्रीमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध*
——————————————
*निजी सोशल मीडिया खातों के माध्यम से संस्थागत सूचनाओं का प्रचार तथा यूट्यूब-इंस्टाग्राम पर मोनेटाइजेशन करने पर भी रोक*
*एटा, 31 अक्टूबर 2026 (सू0वि0)।* जनपद न्यायाधीश ने अवगत कराया है कि माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पत्रांक C.L. No. 15/Admin-‘G-II’, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 के माध्यम से समस्त न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों के डिजिटल आचरण, सोशल मीडिया के उपयोग तथा राजनीतिक तटस्थता बनाए रखने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उक्त निर्देशों के अनुपालन में सभी न्यायिक अधिकारियों को अपने एवं अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के स्तर पर निर्धारित व्यवस्थाओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार न्यायालय परिसर में न्यायिक कार्यवाही, न्यायाधीशों के चैंबर, कोर्ट रूम, रिकॉर्ड रूम, कार्यालय कक्षों, गलियारों एवं आवासीय कार्यालयों की बिना अनुमति फोटो खींचना, वीडियो बनाना, रील्स अथवा ऑडियो क्लिप रिकॉर्ड करना तथा उन्हें निजी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना, लाइव स्ट्रीमिंग या प्रसारित करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। न्यायालय परिसर, डायस, काउंटरों एवं प्रशासनिक शाखाओं में सुरक्षा कारणों से किसी भी प्रकार की अनधिकृत फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम-9 के अंतर्गत किसी भी शासकीय दस्तावेज, फाइल नोटिंग अथवा परिपत्र को अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा नहीं किया जा सकेगा।
डिजिटल आचरण के संबंध में निर्देशित किया गया है कि कोई भी न्यायिक अधिकारी अथवा कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों या किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से संचालित सोशल मीडिया खातों का उपयोग संस्थागत मामलों के प्रचार-प्रसार अथवा अपने पद से संबंधित विशेषाधिकारों के प्रदर्शन के लिए नहीं करेगा। ऐसे खातों के माध्यम से किसी भी प्रकार की सूचना लीक होने पर संबंधित कर्मचारी की व्यक्तिगत जवाबदेही निर्धारित की जाएगी। इसके अतिरिक्त आचरण नियमावली के नियम-15 के तहत निजी यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम अकाउंट अथवा ब्लॉग आदि पर मोनेटाइजेशन, विज्ञापन राजस्व या स्पॉन्सरशिप प्राप्त करना प्रतिबंधित रहेगा।
राजनीतिक तटस्थता बनाए रखने के लिए आचरण नियमावली के नियम-5 के अंतर्गत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों एवं राजनीतिक एजेंडे से संबंधित गतिविधियों से पूर्णतः दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर किसी भी राजनीतिक अथवा विवादित पोस्ट को लाइक, शेयर, कमेंट या रीपोस्ट करने तथा शासकीय नीतियों एवं चुनाव संबंधी ऑनलाइन बहसों में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
जनपद न्यायाधीश द्वारा समस्त न्यायिक अधिकारियों एवं पीठासीन अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों एवं कार्यालयों के लिए पृथक आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी अधीनस्थ कर्मचारियों, जिनमें पेशकार, लिपिक, आशुलिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं, से आदेश के अनुपालन के संबंध में स्पष्ट हस्ताक्षर प्राप्त कर हस्ताक्षरित मूल आदेश को संबंधित न्यायालय की गार्ड फाइल में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय कक्ष एवं डायस के आसपास मोबाइल फोन का उपयोग रिकॉर्डिंग अथवा लाइव स्ट्रीमिंग के लिए न होने देने की जिम्मेदारी भी संबंधित पीठासीन अधिकारियों को सौंपी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त निर्देशों का उल्लंघन अथवा अनुपालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली के नियम-3 के अंतर्गत लोक सेवक के अवांछनीय आचरण की श्रेणी में माना जाएगा। दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध Uttar Pradesh State District Court Service Rules, 2013 के अंतर्गत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जनपद न्यायाधीश ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
*कार्यालय जिला सूचना अधिकारी एटा*















