*दिखावा नहीं, करके दिखाता है RPSS — चर्चित मामले -*
*सिस्टम सोयेगा तो मजबूरन राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ (RPSS) जागेगा*
पत्रकारों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई केवल नारों से नहीं जीती जाती, उसे जमीन पर लड़ना पड़ता है। राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ (RPSS) ने हर पत्रकार उत्पीड़न मामलों में यह साबित किया है कि वह मंचों पर भाषण देने वाला संगठन नहीं, बल्कि पत्रकारों के लिए मैदान में उतरकर न्याय दिलाने वाला परिवार है। समझ सकते हो तो समझो RPSS की तीन बड़ी कार्रवाइयों ने अहंकारी लचर सिस्टम को किस प्रकार सुधारा और देश भर के पत्रकारों में नया विश्वास जगाया ?
*केस 1: हाथरस — सोनू शर्मा हत्याकांड में 2 साल से सोई पुलिस को जगाया*
बतादें कि हाथरस के चर्चित पत्रकार सोनू शर्मा हत्याकांड में दो वर्षों से पुलिस और न्याय व्यवस्था खामोश पड़ी रही थी। स्वयं सोनू और उनका परिवार न्याय और सुरक्षा की गुहार लगा रहा था। मामला ठंडे बस्ते में जा चुका था। दो वर्षों से सोते सिस्टम और माफियाओं के बुलंद हौसलों के चलते सोनू शर्मा की निर्मम हत्या कर दी गयी, हत्यारों ने साक्ष्य छुपाने की नीयत से शव को गन्दे नाले में फेंक दिया । मामला RPSS के संज्ञान में आया, तो RPSS ने तत्काल शासनिक प्रशासनिक स्तर पत्राचार कर कार्यवाही करने को मजबूर किया और हाथरस पहुँच कर सोते सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोला । RPSS के एक्शन के बाद हाथरस पुलिस हरकत में आई और इस जघन्य हत्याकांड में *दो एनकाउंटर में चार बदमाशो सहित 11 हत्या आरोपियों की गिरफ्तारी* की। दो साल से न्याय की आस लगाए परिवार को न्याय दिलाने वाले RPSS के इस कदम की हाथरस ही नहीं देश की राजधानी के पत्रकारों ने सराहना की गई।
*केस 2: मध्य प्रदेश रीवा — 10 दिन से लापता पत्रकार RPSS के प्रयासों पर सकुशल बरामद*
रीवा, मध्य प्रदेश से पत्रकार अमित चतुर्वेदी पिछले 10 दिनों से लापता थे। परिजन परेशान थे, स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी।पीड़ित परिवार की सूचना के बाद RPSS ने इसे तत्काल संज्ञान में लेते हुए DGP मध्यप्रदेश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की । परिणाम DGP कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद पूरी पुलिस मशीनरी एक्शन में आई पुलिस की टीमें गठित की गई और लापता पत्रकार अमित चतुर्वेदी को उत्तर प्रदेश के अयोध्या से सकुशल बरामद कर परिजनों तक पहुंचाया गया।
*केस 3: अलीगढ़ गभाना — बंधक बनाकर पीटे गए पत्रकार को मिला न्याय*
अलीगढ़ के गभाना इलाके में कवरेज के दौरान पत्रकार योगेश उपाध्याय को बंधक बनाकर पीटा गया। पीड़ित पत्रकार थाने के चक्कर लगाता रहा, लेकिन पुलिस ने सुनवाई तक नहीं की, आरोपियों से मिली पुलिस ने उल्टा पीड़ित पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया । RPSS ने इस अमानवीय घटना पर कड़ा रुख अपनाया और शासनिक स्तर पर पत्र लिखा, RPSS के एक्शन के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ ।परिणाम जांच के बाद बड़ी कार्रवाई हुई। थानाध्यक्ष गभाना को तत्काल थाने से हटाकर टप्पल चौकी भेजा गया और मुकदमे के विवेचक को निलंबित किया गया। यह कार्रवाई पूरे अलीगढ़ पुलिस महकमे के लिए एक संदेश बना कि RPSS पत्रकारों से अभद्रता बर्दाश्त नहीं करता ।
*RPSS का संकल्प: सत्य, साहस और सरोकार के साथ*
राष्ट्रीय अध्यक्ष बबलू चक्रवर्ती कहते हैं कि — _”RPSS केवल एक संगठन नहीं, पत्रकारों का सुरक्षा कवच है। हम दिखावे के लिए नहीं, पत्रकारों के अधिकार और सम्मान के लिए सदैव तत्पर हैं। चाहे हाथरस हो, रीवा हो या अलीगढ़ — जहाँ भी पत्रकार पर अत्याचार होगा, RPSS की बुलंद आवाज गूंजेगी।”_
*पत्रकारों के सशक्त संगठन की बुलंद आवाज — RPSS, हेल्पलाइन: 01169296784*
*जय हिंद जय पत्रकारिता जय RPSS*
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