जल जीवन मिशन मिर्जापुर में मजदूरों का शोषण: 14 घंटे काम, न PF न मेडिकल सुविधा

जल जीवन मिशन मिर्जापुर में मजदूरों का शोषण: 14 घंटे काम, न PF न मेडिकल सुविधा।

 

मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश, 8 मई 2026

 

 

 

14 घंटे काम के बदले सिर्फ 12,000 रुपये महीना, पिछले 6 माह से आधा-अधूरा भुगतान

PF घोटाला, 3 साल से PF जमा नहीं, खाते में शून्य बैलेंस

मेडिकल सुविधा,बीमारी में भी छुट्टी नहीं, कोई मेडिकल सहायता या बीमा नहीं

अवैध वसूली, ठेकेदार द्वारा प्रति मजदूर 8,000 रुपये की वसूली का आरोप

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ के तहत मिर्जापुर जिले में ‘हर घर नल से जल’ पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। लेकिन इस योजना को जमीन पर उतार रहे मजदूरों की हालत बेहद दयनीय है। जमालपुर ब्लॉक समेत कई जगहों पर ऑपरेटर हेल्पर के पद पर तैनात श्रमिक पिछले तीन साल से शोषण का शिकार हो रहे हैं।

1. 14 घंटे काम, 12 हजार वेतन और छुट्टी पर धमकी

मजदूरों का आरोप है कि उनसे रोजाना सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक, यानी 14 घंटे लगातार काम कराया जाता है। इसके एवज में उन्हें मात्र 12,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाता है, जो श्रम कानूनों के तहत तय न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।

सबसे गंभीर बात यह है कि पिछले 6 महीने से वेतन का पूरा भुगतान भी नहीं हो रहा है। मजदूर रामदास ने बताया, “साहब कहते हैं आधा पैसा अभी लो, आधा बाद में। लेकिन वो ‘बाद में’ कभी नहीं आता।”

छुट्टी मांगना तो यहां गुनाह है। एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अगर बीमार पड़ जाओ और एक दिन की छुट्टी मांग लो, तो ठेकेदार सीधे काम से बाहर निकालने की धमकी देता है। कहता है, ‘PF तो मिलेगा नहीं, जाओ दूसरा काम ढूंढो’।”

2. तीन साल का PF गायब, मेडिकल सुविधा शून्य

नियमानुसार, किसी भी कर्मचारी का PF हर महीने जमा होना चाहिए। लेकिन यहां पिछले तीन साल से किसी भी मजदूर का PF जमा नहीं किया गया। मजदूरों ने जब अपना UAN नंबर चेक किया तो खाते में बैलेंस शून्य मिला। 6 महीने से वेतन के साथ-साथ PF की कटौती भी नहीं दिख रही है।

‘मेडिकल’ सुविधाओं की स्थिति और भी बदतर है। बरसात के मौसम में खुले में पाइपलाइन बिछाने का काम चलता है। रहने के लिए कोई टेंट या अस्थायी आवास नहीं दिया गया है। भीगने से कई मजदूर बीमार पड़ जाते हैं, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई मेडिकल सहायता, दवा या बीमा कवर नहीं है। ठेकेदार साफ कह देता है, “बीमार हो तो अपने पैसे से इलाज कराओ।” ESI कार्ड तक नहीं बनवाए गए हैं।

3. 8 हजार की अवैध वसूली, शिकायत पर नहीं होती सुनवाई

मजदूरों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदार द्वारा काम पर रखने से पहले ही प्रति मजदूर 8,000 रुपये की अवैध वसूली की जाती है। यह पैसा ‘सिक्योरिटी’ के नाम पर लिया जाता है और काम छोड़ने पर वापस नहीं किया जाता।

जब मजदूर अपनी समस्याएं लेकर जल निगम के अधिशासी अभियंता के पास जाते हैं, तो उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है। एक पीड़ित मजदूर ने बताया, “साहब कहते हैं ‘वो लगेगा, हो जाएगा’, लेकिन 3 साल से कुछ नहीं हुआ। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।”

प्रशासन का पक्ष

इस संबंध में जल जीवन मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं, मुख्य विकास अधिकारी ने कहा, “मामला संज्ञान में आया है। मजदूरों के PF, मेडिकल सुविधा और वेतन की जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। दोषी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई होगी।”

मजदूरों की मांग

1. पिछले 6 महीने का बकाया वेतन तुरंत दिया जाए।

2. 3 साल का PF ब्याज सहित खाते में जमा कराया जाए।

3. सभी मजदूरों का ESI कार्ड बनवाकर मेडिकल सुविधा शुरू की जाए।

4. 8 घंटे काम और साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित किया जाए।

5. अवैध वसूली करने वाले ठेकेदार का लाइसेंस रद्द हो।

जल जीवन मिशन जैसी बड़ी योजना की सफलता उसके जमीनी कर्मचारियों पर निर्भर करती है। अगर उन्हें ही मूलभूत सुविधाएं न मिलें, तो ‘हर घर जल’ का सपना अधूरा रह जाएगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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