खाकी का अहंकार या कानून का मखौल? SHO पर गिरेगी BNS की धाराओं की गाज; एके बिंदुसार ने खोला मोर्चा!

*खाकी का अहंकार या कानून का मखौल? SHO पर गिरेगी BNS की धाराओं की गाज; एके बिंदुसार ने खोला मोर्चा!*

 

 

 

मिर्जापुर ।

“वर्दी जनसेवा के लिए है, जुल्म के लिए नहीं!”—इन कड़े शब्दों के साथ भारतीय मीडिया फाउंडेशन (नेशनल) के संस्थापक एके बिंदुसार ने मिर्जापुर में अधिवक्ता व पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषी थाना प्रभारी (SHO) को अब कानून के कटघरे में खड़ा होना ही होगा।

धाराओं के चक्रव्यूह में घिरेंगे दोषी अधिकारी।

भारतीय मीडिया फाउंडेशन की लीगल सेल ने स्पष्ट किया है कि लोक सेवक द्वारा किया गया यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। संगठन ने मांग की है कि दोषी अधिकारी पर संविधान का अनुच्छेद 19 (1)ए के तहत एवं निम्नलिखित धाराओं के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज हो:

 

BNS धारा 198 (पद का दुरुपयोग): लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा कर किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाना।

BNS धारा 115 (मारपीट):बिना कारण शारीरिक चोट पहुँचाना।

BNS धारा 351 (गाली-गलौज):लोक शांति भंग करने के इरादे से अभद्र भाषा का प्रयोग।

BNS धारा 126 (अवैध अवरोध): राह चलते व्यक्ति को जबरन रोकना और बंधक जैसा व्यवहार करना।

संस्थापक एके बिंदुसार की ललकार: “सड़क से सदन तक गूंजेगी आवाज”

संगठन के संस्थापक एके बिंदुसार ने कड़े लहजे में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की यह ‘निरंकुशता’ अब बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने कहा:

> *”अगर रक्षक ही भक्षक बनकर कानून की धज्जियां उड़ाएंगे, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हमने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि दीपनगर चौराहे की CCTV फुटेज को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किया जाए। यह फुटेज ही पुलिसिया तानाशाही का सबसे बड़ा प्रमाण बनेगी। हम इस मामले को शासन के उच्च गलियारों तक ले जाएंगे।”*

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पत्रकार व अधिवक्ता सुरक्षा एक्ट की उठी मांग।

इस घटना ने एक बार फिर ‘पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुरक्षा अधिनियम’** की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है। कोर कमेटी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक पत्रकारों और अधिवक्ताओं को विशेष कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक ऐसे ‘वर्दीधारी अहंकारी’ अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते रहेंगे।

अंतिम चेतावनी: कार्रवाई नहीं तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन।

भारतीय मीडिया फाउंडेशन ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर दोषी SHO के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और FIR दर्ज नहीं की गई, तो संगठन के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

“न्याय मिलने तक हमारी कलम और हमारा संघर्ष विराम नहीं लेगा!”

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