WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.49 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.48 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 P
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.51 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50
WhatsApp Image 2026-08-14 at 8.40.50 PM

केवल कविता नहीं हमारे अन्त: का रोदन है! आत्मा का आक्रोश प्रदूषित वृत्ति का शोधन है!!!!! कविकिंकर

साहित्य समाज का दर्पण भी है!!!!!!और यथार्थ को आदर्श की दिशा दिखाने वाला प्रकाश स्तम्भ भी!!!!!!!! दर्पण के रूप में साहित्य अपने समकालीन समाज के गुण अवगुण को

सर्वांगसम सच्चे रूप में तथ्य रूप में प्रतिविम्बित करता है और दिशाबोधक के रूप में वह अवगुण रहित निर्दोष व्यवस्थापरक आदर्श की संकल्पना, प्रारूप प्रस्तुत करता है!!!!!!!! सत्पथ दिखाने वाला प्रकाश स्तम्भ बनता है!!!!!!!

अनिंद्य सुंदरी राजकुमारी को देखकर श्री नारद जी जैसे मुनि का मोहविमूढ काम भाव ग्रसित होकर अज्ञानीवत , हे प्रभु मिलहि कवन बिधि बाला!!!! कहना और मोक्षसुख परमज्ञान देने में समर्थ साक्षातपरमात्मा के समक्ष होकर

सुंदर शरीर जैसी नितान्त तुच्छ लौकिक वस्तु की मांग करना, आन उपाय न पावहुं ओही, जेहि बिधि होइ नाथ हित मोरा, करहु सो बेगि दास मैं तोरा, यह मायामोहित विमूढात्मा लोगों का यथार्थ

गोस्वामी तुलसीदास जी ने व्यक्त किया है, यह दर्पण दिखाना है और श्री भगवान के श्रीमुख से यह कहलवाना कि

कुपथ मांग रुज व्याकुल रोगी!

वैद्य न देइ सुनहु मुनि योगी!!!!!

ऐहि विधि मैं तुम्हार हित ठयऊ!!!!

अस कहि अन्तरहित हरि भयऊ!!!!!!!!!!!

यह दिशाबोधक आदर्श वाक्य है!!!! यही साहित्य का समाज

हित का परम उद्देश्य है जो उसके साहित्य नाम को सार्थक

करता है!!!!

केवल कविता नहीं हमारे अन्त: का रोदन है!

आत्मा का आक्रोश प्रदूषित वृत्ति का शोधन है!!!!!

कविकिंकर

Leave a Comment