आलिंगन को व्याकुल हैं चारों मीनारें ताज की
दो बाँहे शाहजहाँ की हैं दो बहिंयां हैं मुमताज की
शिव सागर शर्मा ने पढ़ीं तो नागरी प्रचारणी सभा में बैठी आगरा की हिंदी गौरवान्वित हो भार्गव जी को धन्यवाद ज्ञापित करने लगी.
आगरा. प्रख्यात मनोविज्ञानी और साहित्य मनीषयों के चहेते डॉक्टर महेश भार्गव स्मृति काव्य सम्मेलन में उत्तर भारत के प्रसिद्ध सरस गीतकार शिवसागर शर्मा के छन्द की उक्त पंक्तियाँ,आलिंगन को व्याकुल हैं चारों मीनारें ताज की
दो बाँहे शाहजहाँ की हैं दो बहिंयां हैं मुमताज की।,शर्मा ने पढ़ीं तो नागरी प्रचारणी सभा में बैठी आगरा की हिंदी गौरवान्वित हो भार्गव जी को धन्यवाद ज्ञापित करने लगी.
यह पल था,, “डॉ महेश भार्गव स्मृति समारोह में हुआ पुस्तक विमोचन एवं राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का ”
डॉ राजकुमार रंजन के संयोजन में नागरी प्रचारिणी पुस्तकालय भवन में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ ।
इस अवसर पर कवि शिक्षा एवं पर्यावरणविद् मुन्ना लाल मिश्रा धुआँधार को मुख्य अतिथि महेंद्र कुमार गोयल एवं रामेन्द्र त्रिपाठी के हाथों डॉ महेश भार्गव स्मृति सम्मान दिया गया ।
शहर के वरिष्ठ गीतकार डॉ राघवेन्द्र शर्मा की सघः प्रकाशित गीत कृति चुटकी भर चाँदनी का विमोचन मुख्य अतिथि महेन्द्र गोयल एवं डॉ वेद त्रिपाठी, अंतर राष्ट्रीय गीतकार रामेंद्र मोहन त्रिपाठी आदि के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर कवि राजबहादुर राज, डॉ राजकुमार रंजन एवं डॉ केशव शर्मा ने कृति के संबन्ध में अपने विचार व्यक्त किये
सभी विद्वानों ने कृति के सामाजिक, राष्ट्रीय सन्दर्भ के गीतो की भूरि भूरि प्रशंसा की ।
अंतर राष्ट्रीय गीतकार रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुये कवि सम्मेलन में मंजुल मयंक ने व्यंग्य शैली मे कहा –
एक प्रश्न हवा में उछला
खाना कब खाया जाय
कविराज हमें बताया जाय
हमने कहा
अमीर को भूख लगने पर
गरीब को जब मिल जाय
प्रख्यात गीतकार शिवसागर शर्मा के गीतों छंदों ने समा बाँधा – आलिंगन को व्याकुल हैं चारों मीनारें ताज की
दो बाँहे शाहजहाँ की हैं दो बहिंयां हैं मुमताज की
वहीं धौलपुर से पधारी कवयित्री ने हिंदी वंदना से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया –
प्यारी बोली हिंदी भाषा,ब्रज भाषा मृदुभाषा।
बिंदी बन कर भाल सजाऊँ कबसे है मन प्यासा ।
श्लेष,यमक,अनुप्रास रहे हिंदी की साज सजावट,
लिखूँ वेदना हिन्दी में मेरे दिल की अभिलाषा ।
सुमधुर गीतकार डॉ राजकुमार का गीत वर्तमान परिस्थियों सामाजिक विद्रुपताओं पर करारी चोट करता नज़र आया
हँसी यहाँ गायब है मुक्त कंठ वाली
कानों ही कानों में हो रही जुगाली
सब कुछ अनसूझा है काँटे हैं पाँव में
सबको है नजर लगी मेरे इस गाँव मे
गज़लकार अरविन्द समीर की गजल बेहद सराही गयी –
बेकरारी के आलम में करार आ जाए।
तू जो आए तो गुलिस्तां में बहार आ जाए।
इसके अलावा रमेश पंडित , शीलेंद्र वशिष्ठ, डॉ. राघवेन्द्र शर्मा, मीना शर्मा, रजनीकान्त लवानिया, राजबहादुर सिंह राज डॉ केशव शर्मा आदि ने श्रेष्ठ काव्य पाठ किया ।
इस अवसर पर सुनयन शर्मा,ओम ठाकुर, डा कृष्ण कुमार सिंह,राहुल राज, रघुराज सिंह सिसौदिया उपस्थित रहे विशिष्ट मुख्य अतिथि महेन्द्र कुमार गोयल को सम्मानित किया गया ।
धन्यवाद ज्ञापन संस्था अध्यक्ष अरुण रावत ने किया.















