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गौरक्षा धर्मयात्रा लेकर सैफई पहुंचे शंकराचार्य, सरकार को घेरा, मुलायम परिवार की सराहना, रिपोर्ट शंकर देव तिवारी

*गौरक्षा धर्मयात्रा लेकर सैफई पहुंचे शंकराचार्य, सरकार को घेरा, मुलायम परिवार की सराहना*

 

*सैफई में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- धर्मयुद्ध में सबसे अधिक साथ समाजवादी पार्टी ने दिया*

 

*(वी पी सिंह यादव दैनिक जागरण सैफई-9058333340)*

 

सैफई : गौरक्षा धर्मयात्रा के तहत शनिवार को सपा मुखिया अखिलेश यादव के पैतृक गांव सैफई पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में गौ संरक्षण, सनातन परंपरा और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बेबाक राय रखी। उन्होंने गौहत्या के मुद्दे पर केंद्र और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आज देश में गाय की दुर्दशा के लिए सबसे अधिक जिम्मेदारी सत्ता में बैठे लोगों की है। वहीं, सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार और समाजवादी पार्टी के सहयोग की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि गौरक्षा के लिए चलाए जा रहे उनके धर्मयुद्ध में सबसे अधिक साथ समाजवादी पार्टी ने दिया है।

सैफई स्थित निजी इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव, मैनपुरी सांसद डिंपल यादव, बदायूं सांसद आदित्य यादव, करहल विधायक तेज प्रताप यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता और श्रद्धालु मौजूद रहे। नेताओं ने शंकराचार्य का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में सैफई समेत आसपास के जनपदों से पहुंचे लोगों की खासी भीड़ रही।

अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि वर्ष 2016 में जंतर-मंतर पर गौरक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ स्वयं पहुंचे थे और गाय को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि उस समय जो लोग गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग का समर्थन कर रहे थे, सत्ता में आने के बाद उनकी सोच बदल गई। यदि गाय वास्तव में माता है तो उसे राष्ट्रमाता का दर्जा देने में संकोच क्यों है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े बूचड़खानों का संचालन जारी है और गौ संरक्षण के नाम पर केवल घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज केवल गाय ही नहीं, बल्कि समाज के अनेक वर्ग अन्याय का सामना कर रहे हैं। मंचों से बड़ी-बड़ी बातें कही जाती हैं, लेकिन वास्तविकता उससे अलग दिखाई देती है।

शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने वर्षों से सैफई का नाम सुना था, लेकिन पहली बार यहां आने का अवसर मिला। गांव में प्रवेश करते ही भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा ने उनका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रतिमा में भगवान श्रीकृष्ण का हाथ में रथ का चक्र लिए स्वरूप अत्यंत भावुक करने वाला है। यह उस प्रसंग की याद दिलाता है, जब भगवान ने अपने भक्त की प्रतिज्ञा की रक्षा के लिए स्वयं अपनी प्रतिज्ञा का त्याग कर दिया था। उन्होंने शिवपाल सिंह यादव का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न अवसरों पर उनसे मुलाकात होती रही है। कई बार मतभेद भी हुए, लेकिन शिवपाल सिंह यादव ने हमेशा धैर्य और सहजता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि असहमति के बावजूद संवाद बनाए रखना ही लोकतांत्रिक और सामाजिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता है। शंकराचार्य ने मुलायम सिंह यादव से जुड़ा एक पुराना प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उनके गुरु को प्रशासन ने हिरासत में लिया था, जिससे संत समाज में नाराजगी थी। बाद में एक कार्यक्रम के दौरान मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि वह निर्णय उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था और उन्होंने अपनी भावना भी व्यक्त की थी। शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की महानता अपनी भूल स्वीकार करने में होती है।

उन्होंने वर्ष 2015 में वाराणसी में हुए लाठीचार्ज का भी उल्लेख किया। कहा कि उस समय तत्कालीन मंत्री शिवपाल सिंह यादव और ओमप्रकाश सिंह उनसे मिलने आए थे। बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रशासन से मिली गलत सूचना का हवाला देते हुए खेद व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि अपनी त्रुटियों को स्वीकार कर आगे बढ़ने की क्षमता ही किसी नेतृत्व को बड़ा बनाती है।

गौरक्षा धर्मयात्रा का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि गाय के नाम पर राजनीति करने वाले दल और उनके कार्यकर्ता इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हर पड़ाव पर उनका सहयोग किया। उन्होंने कहा कि जहां-जहां यात्रा पहुंची, वहां बड़ी संख्या में समाजवादी कार्यकर्ता धर्मयुद्ध के समर्थन में दिखाई दिए।

उन्होंने कहा कि समय के साथ मुलायम सिंह यादव के परिवार से उनका संबंध और अधिक आत्मीय होता गया है। यह रिश्ता केवल औपचारिकता का नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास का है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने अखिलेश यादव की पीडीए अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को जोड़ने वाले प्रयासों को व्यापक रूप दिया जाना चाहिए, ताकि सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके।

करीब एक घंटे तक चले संबोधन के दौरान श्रद्धालु और कार्यकर्ता पूरे समय मौजूद रहे। धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस कार्यक्रम में शंकराचार्य के वक्तव्य चर्चा का केंद्र बने रहे।

Ronda Faulk
Author: Ronda Faulk

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